
राजधानी दिल्ली के सियासी गलियारों में पिछले कई हफ्तों से जिस सबसे बड़े घटनाक्रम की चर्चा जोरों पर थी, उस पर फिलहाल कुछ दिनों का ब्रेक लग गया है। केंद्र सरकार के बहुप्रतीक्षित कैबिनेट विस्तार और फेरबदल को लेकर उल्टी गिनती शुरू मानी जा रही थी, लेकिन अब संभावित मंत्रियों को अपनी नई जिम्मेदारियों के लिए थोड़ा और इंतजार करना होगा। इसकी मुख्य वजह है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का दो देशों का अहम राजनयिक दौरा। प्रधानमंत्री मध्य एशिया के दो रणनीतिक देशों—उज्बेकिस्तान और किर्गिस्तान की यात्रा पर रवाना हो रहे हैं, जहां वे 26वें शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के वार्षिक शिखर सम्मेलन में भी भाग लेंगे। जब तक प्रधानमंत्री का यह कूटनीतिक मिशन पूरा नहीं हो जाता और वे स्वदेश वापस नहीं लौट आते, तब तक राष्ट्रपति भवन में नए मंत्रियों के शपथ ग्रहण समारोह की संभावनाओं पर पूर्ण विराम लग गया है।
पीएम मोदी का मध्य एशिया दौरा: उज्बेकिस्तान और किर्गिस्तान का पूरा कार्यक्रम
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यह विदेश यात्रा भारत की ‘कनेक्ट सेंट्रल एशिया’ नीति और यूरेशियाई क्षेत्र में रणनीतिक पकड़ के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण है। विदेश मंत्रालय (MEA) द्वारा साझा की गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, प्रधानमंत्री 28-29 अगस्त को उज्बेकिस्तान की राजकीय यात्रा पर रहेंगे। भारत और उज्बेकिस्तान के बीच 2011 से रणनीतिक साझेदारी रही है। इस यात्रा के दौरान दोनों देश ऊर्जा, व्यापार, कनेक्टिविटी, फार्मास्यूटिकल्स और रक्षा सहयोग के क्षेत्र में कई द्विपक्षीय समझौतों पर मुहर लगाएंगे।
इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी 31 अगस्त को किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक पहुंचेंगे। बिश्केक में 31 अगस्त से 1 सितंबर के बीच शंघाई सहयोग संगठन (SCO) का 26वां राष्ट्राध्यक्ष शिखर सम्मेलन आयोजित हो रहा है। इस सम्मेलन में प्रधानमंत्री व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहेंगे। मध्य एशिया और यूरेशिया के शीर्ष नेताओं की मौजूदगी वाले इस मंच पर सीमा पार आतंकवाद, अलगाववाद, क्षेत्रीय सुरक्षा, यूरेशियाई व्यापार और इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC) को गति देने पर गहन विमर्श होगा।
कब लौटेंगे प्रधानमंत्री और क्यों टल गया कैबिनेट विस्तार?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 1 सितंबर की देर रात या 2 सितंबर को अपनी विदेश यात्रा संपन्न करके नई दिल्ली लौटेंगे। राजनीतिक विश्लेषकों का स्पष्ट मानना है कि कैबिनेट विस्तार जैसा संवेदनशील और व्यापक फैसला प्रधानमंत्री की प्रत्यक्ष मौजूदगी, गृह मंत्री अमित शाह और पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के साथ अंतिम दौर की आमने-सामने की चर्चा के बाद ही संभव है।
संसद के मानसून सत्र के समाप्त होने के बाद और पार्टी संगठन में नए पदाधिकारियों के चयन के साथ ही यह कयास लगाए जा रहे थे कि रक्षाबंधन और अगस्त के अंतिम सप्ताह के बीच किसी भी दिन नए मंत्रियों को शपथ दिलाई जा सकती है। राष्ट्रपति भवन में भी प्रोटोकॉल की तैयारियों को लेकर सुगबुगाहट तेज थी। हालांकि, प्रधानमंत्री के विदेशी दौरे की व्यस्तताओं और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की प्राथमिकताओं को देखते हुए यह तय किया गया कि फेरबदल की प्रक्रिया को उनकी वापसी तक टाल दिया जाए।
कैबिनेट में खाली कुर्सियां और फेरबदल की जमीनी जरूरत
मोदी सरकार के मौजूदा कार्यकाल में मंत्रिपरिषद में फेरबदल की जरूरत कई कारणों से बनी हुई है। पिछले कुछ महीनों में विभिन्न राजनीतिक व संगठनात्मक कारणों से कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों में बदलाव देखने को मिले हैं। कुछ मंत्रियों के इस्तीफों और कुछ वरिष्ठ नेताओं को संगठन या चुनावी राज्यों में भेजे जाने के बाद कई मंत्रालयों का अतिरिक्त प्रभार अन्य कैबिनेट मंत्रियों के पास है।
इसके अलावा, आने वाले समय में होने वाले महत्वपूर्ण राज्यों के विधानसभा चुनावों के मद्देनजर क्षेत्रीय संतुलन साधना भी सरकार की शीर्ष प्राथमिकता है। जातिगत, क्षेत्रीय और गठबंधन दलों के प्रतिनिधित्व को मजबूत करने के लिए नए युवा चेहरों, प्रशासनिक अनुभव रखने वाले सांसदों और सहयोगी दलों के वरिष्ठ नेताओं को मंत्रिपरिषद में शामिल करने का दबाव है। यही कारण है कि नए चेहरों को शामिल करने और कुछ मौजूदा मंत्रियों के विभागों में बदलाव को लेकर एक विस्तृत ब्लूप्रिंट पहले ही तैयार किया जा चुका है।
मध्य एशिया दौरे का रणनीतिक और आर्थिक महत्व
जब देश में घरेलू राजनीति का पारा चढ़ा हुआ है, तब प्रधानमंत्री की यह विदेश यात्रा अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के लिहाज से बेहद अहम मोड़ पर हो रही है। मध्य एशियाई देश प्राकृतिक गैस, यूरेनियम और खनिज संपदा से समृद्ध हैं। भारत अपनी बढ़ती ऊर्जा जरूरतों के लिए इन देशों के साथ गहरे संबंध बनाना चाहता है। चाबहार बंदरगाह और इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC) के जरिए भारत मध्य एशिया तक अपनी निर्बाध पहुंच बनाना चाहता है, जिससे पाकिस्तान को बाईपास करके सीधा व्यापार किया जा सके।
बिश्केक में आयोजित SCO समिट में आतंकवाद के खिलाफ साझा रणनीति और खुफिया जानकारियों के रियल-टाइम आदान-प्रदान पर भी ठोस चर्चा होगी। प्रधानमंत्री का यह दौरा न केवल भारत की भू-राजनीतिक स्थिति को मजबूत करेगा, बल्कि मध्य एशिया में चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने में भी मदद करेगा।
सितंबर के पहले हफ्ते में शपथ ग्रहण की पूरी संभावना
प्रधानमंत्री मोदी की स्वदेश वापसी के बाद सितंबर के पहले सप्ताह (संभवतः 3 से 6 सितंबर के बीच) कैबिनेट विस्तार की औपचारिक प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जा सकता है। माना जा रहा है कि विदेश से लौटते ही प्रधानमंत्री पार्टी के शीर्ष नेताओं के साथ अंतिम सूची का पुनरावलोकन करेंगे, जिसके बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से समय लेकर नए मंत्रियों के शपथ ग्रहण समारोह का दिन तय किया जाएगा।
इस विस्तार में उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और दक्षिण भारत के राज्यों से नए प्रतिनिधित्व मिलने की प्रबल संभावना है। साथ ही, आगामी चुनावी राज्यों के समीकरणों को ध्यान में रखते हुए महिला और युवा सांसदों को राज्य मंत्री के रूप में मौका दिया जा सकता है। जब तक प्रधानमंत्री का विशेष विमान नई दिल्ली में लैंड नहीं करता, तब तक संभावित मंत्रियों और राजनीतिक गलियारों को सांस रोककर इंतजार करना होगा।
Shashwat Lokwarta – State News,Up News देश-दुनिया