‘पंजाबी आ गए ओए’ की जगह ‘इंडिया आ गए ओए’ क्यों नहीं बोलते? दिलजीत दोसांझ ने इस सवाल पर दिया दिल छू लेने वाला दो टूक जवाब

वैश्विक संगीत के सबसे बड़े मंचों, अंतरराष्ट्रीय स्टेडियमों और विदेशी शो में अपनी गायकी का परचम लहराने वाले भारतीय सुपरस्टार दिलजीत दोसांझ आज किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। अमेरिका के मशहूर कोचेला म्यूजिक फेस्टिवल में ऐतिहासिक प्रस्तुति देने से लेकर दुनिया भर में सोल्ड-आउट कॉन्सर्ट करने तक, दिलजीत का एक जुमला हर संगीत प्रेमी की जुबान पर चढ़ चुका है— ‘पंजाबी आ गए ओए!’ यह नारा अब केवल एक तकियाकलाम नहीं, बल्कि दुनिया के किसी भी कोने में रह रहे भारतीयों और दक्षिण एशियाई समुदाय के लिए गर्व और पहचान का प्रतीक बन चुका है। लेकिन हाल ही में जब एक बातचीत के दौरान सिंगर से यह सवाल पूछा गया कि वे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सिर्फ ‘पंजाबी आ गए ओए’ ही क्यों कहते हैं, इसकी जगह ‘इंडिया आ गए ओए’ या ‘भारतीय आ गए ओए’ क्यों नहीं बोलते, तो इस सवाल पर दिलजीत ने बिना किसी हिचकिचाहट के जो जवाब दिया, उसने न केवल सोशल मीडिया पर बहस को शांत कर दिया बल्कि हर भारतीय का सीना गर्व से चौड़ा कर दिया।

‘पंजाबी आ गए ओए’ के पीछे का भाव: अपनी जड़ों को स्वीकारना और देश को आगे रखना

दिलजीत दोसांझ ने इस सवाल का बेहद शांत, सहज और परिपक्व अंदाज में जवाब देते हुए कहा कि जब वे मंच पर गाते हैं, तो उनकी भाषा, उनकी संस्कृति और उनकी पगड़ी उनकी मूल पहचान को दर्शाती है, लेकिन यह कभी भी भारत से अलग नहीं है। सिंगर ने साफ शब्दों में स्पष्ट किया कि पंजाब भारत का ही एक अभिन्न अंग है और पंजाबी होना भारतीय होने से जुदा नहीं हो सकता। दिलजीत ने कहा कि जब वे मंच पर ‘पंजाबी आ गए ओए’ चिल्लाते हैं, तो उसका मतलब यह कतई नहीं होता कि वे अपने देश को भूल रहे हैं, बल्कि यह एक कलाकार का अपनी मातृभाषा, अपनी मिट्टी और उन संघर्षों के प्रति सम्मान होता है, जहां से उठकर वे आज दुनिया के सबसे बड़े मंचों तक पहुंचे हैं। उन्होंने मुस्कुराते हुए यह भी जोड़ा कि अगर कोई तमिल, बंगाली, गुजराती या मराठी कलाकार अपने राज्य और भाषा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसी तरह प्रस्तुत करता है, तो वह पूरे भारत का ही प्रतिनिधित्व होता है, क्योंकि भारत की असली ताकत उसकी विविधताओं और अलग-अलग सांस्कृतिक रंगों में ही बसी है।

तिरंगे को हमेशा सीने से लगाकर रखने वाले दिलजीत ने देशभक्ति पर उठ रहे सवालों को किया खारिज

अपने कई विदेशी कॉन्सर्ट्स का हवाला देते हुए दिलजीत ने याद दिलाया कि कैसे वे हर बड़े शो में भारत का राष्ट्रध्वज यानी तिरंगा पूरी शान के साथ मंच पर लहराते हैं। कोचेला के ऐतिहासिक मंच पर भी दिलजीत ने खुले तौर पर कहा था कि यह सिर्फ उनका शो नहीं, बल्कि पूरे भारत और दक्षिण एशिया का गौरव है। अपने आलोचकों को जवाब देते हुए सिंगर ने कहा कि किसी की देशभक्ति को सिर्फ एक नारे के शब्दों से नहीं तौला जा सकता। वे जहां भी जाते हैं, पूरी दुनिया उन्हें एक ‘भारतीय कलाकार’ के रूप में ही जानती और पहचानती है। उन्होंने कहा, ‘मैं चाहे दुनिया के किसी भी देश में चला जाऊं, मेरी पहचान हमेशा एक हिंदुस्तानी के तौर पर ही रहेगी। मेरी पगड़ी और मेरी भाषा भले ही पंजाब की है, लेकिन मेरी धड़कन और मेरा वजूद पूरी तरह से हिंदुस्तान का है।’ दिलजीत का मानना है कि क्षेत्रीय भाषा या संस्कृति पर गर्व करना देशप्रेम के आड़े नहीं आता, बल्कि यह देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को दुनिया के सामने और मजबूती से स्थापित करता है।

अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारतीय संगीत और संस्कृति की धाक जमाने का ऐतिहासिक सफर

दिलजीत दोसांझ का यह बयान ऐसे समय में आया है जब वे भारतीय संगीत उद्योग के सबसे बड़े ग्लोबल एंबेसडर बनकर उभरे हैं। बीबीसी, फॉक्स और हॉलीवुड के लेट-नाइट टॉक शो जैसे ‘द टुनाइट शो स्टारिंग जिमी फॉलन’ में अपनी पारंपरिक वेशभूषा, धोती-कुर्ता और पगड़ी पहनकर दिलजीत ने जब पंजाबी बीट्स पर अमेरिकी दर्शकों को थिरकने पर मजबूर किया था, तो वह पूरे देश के लिए एक ऐतिहासिक क्षण था। दिलजीत ने लगातार यह साबित किया है कि अपनी संस्कृति, अपनी बोली और अपनी पहचान से समझौता किए बिना भी दुनिया का दिल जीता जा सकता है। उन्होंने अंग्रेजी या पश्चिमी शैली की नकल करने के बजाय अपनी देसी धुन और पंजाबी भाषा को ही वैश्विक मंचों की मुख्यधारा बना दिया, जिसकी आज पूरी दुनिया मुरीद है।

फैंस और आम जनता ने दिलजीत के तार्किक और दिल छू लेने वाले जवाब का किया दिल खोलकर स्वागत

दिलजीत दोसांझ का यह स्पष्ट और भावनात्मक जवाब सामने आते ही सोशल मीडिया पर उनके फैंस और संगीत प्रेमियों ने जमकर उनकी सराहना की। लोगों का कहना है कि जब कोई खिलाड़ी या कलाकार किसी राज्य विशेष से निकलकर दुनिया में नाम कमाता है, तो उसकी सफलता पूरे भारत की सफलता होती है। ओलंपिक में मेडल जीतने वाला एथलीट जब अपनी माटी को याद करता है, तो कोई उस पर सवाल नहीं उठाता; ठीक उसी तरह दिलजीत का अपनी मातृभाषा पर गर्व करना हर भारतीय के लिए गर्व का विषय है। फैंस ने सोशल मीडिया पर लिखा कि दिलजीत ने हमेशा तिरंगे का मान बढ़ाया है और दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित मंचों पर भारतीय संगीत की पताका फहराई है। दिलजीत के इस बेबाक जवाब ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि वे केवल एक बेहतरीन गायक और अभिनेता ही नहीं, बल्कि जमीन से जुड़े एक ऐसे संवेदनशील इंसान हैं जो अपनी जड़ों और अपने मुल्क दोनों से बेपनाह मोहब्बत करते हैं।

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