CJP फंडिंग विवाद में अभिजीत दीपके ने फिर छेड़ा धर्मेंद्र प्रधान का नाम, केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह से ही पूछा- ‘उन्हें हटवाने का कितना कमीशन लिया?’

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से लेकर सोशल मीडिया के गलियारों तक छात्र आंदोलनों और राजनीतिक व्यंग्य के जरिए सुर्खियां बटोरने वाली कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) और केंद्र सरकार के बीच जुबानी जंग एक बार फिर बेहद तल्ख मोड़ पर पहुंच गई है। केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह द्वारा सीजेपी के शीर्ष नेताओं पर विदेशों और राष्ट्रविरोधी ताकतों से गैरकानूनी फंडिंग लेने का खुला आरोप लगाए जाने के बाद पार्टी नेतृत्व ने सीधे सरकार पर ही पलटवार कर दिया है। सीजेपी के संस्थापक और प्रमुख अभिजीत दीपके ने केंद्रीय मंत्री पर तंज कसते हुए पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के पुराने प्रकरण को एक बार फिर हवा दे दी है। दीपके ने सोशल मीडिया पर मंत्री से सीधा और असहज करने वाला सवाल पूछते हुए कहा कि अगर सीजेपी विदेशी फंडिंग से संचालित हो रही है, तो तत्कालीन शिक्षा मंत्री को पद से हटाने के लिए सरकार की ओर से वार्ता की मेज पर आए मंत्रियों ने उस कथित विदेशी फंड में से कितना कमीशन लिया था। इस तीखे सवाल और पूर्व बैठकों की तस्वीरें सार्वजनिक होने के बाद राजनीतिक हलकों में खलबली मच गई है।

‘अमेरिका और पाकिस्तान से मिल रहा फंड’ — जानिए क्या था केंद्रीय मंत्री का गंभीर आरोप

इस पूरे विवाद की चिंगारी उस समय भड़की जब केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने एक आधिकारिक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कॉकरोच जनता पार्टी के संचालन और उनके वित्तीय स्रोतों पर गंभीर सवाल खड़े किए। केंद्रीय मंत्री ने दावा किया कि खुफिया और प्रशासनिक स्तर पर ऐसे पुख्ता इनपुट मिले हैं जो यह दर्शाते हैं कि सीजेपी के स्वयंभू नेताओं को देश के बाहर सक्रिय भारत विरोधी एनजीओ, डीप-स्टेट से जुड़े तंत्र और विदेशी आकाओं से फंडिंग मिल रही है। मंत्री ने नाम लेते हुए आरोप लगाया कि सीजेपी संयोजक अभिजीत दीपके को अमेरिका स्थित कुछ डोनर्स से वित्तीय सहायता मिल रही है, जबकि पार्टी के सह-संयोजक आशुतोष रांका को सरकार विरोधी प्रदर्शनों और नैरेटिव को हवा देने के लिए पाकिस्तानी नेताओं और संपर्कों से आर्थिक मदद पहुंचाई जा रही है। मंत्री ने इसे देश के युवाओं को गुमराह करने और देश की आंतरिक व्यवस्था को अस्थिर करने की सुनियोजित अंतरराष्ट्रीय साजिश करार दिया था।

अभिजीत दीपके का सीधा वार: बातचीत की मेज पर हाथ मिलाते पुरानी तस्वीर की शेयर

केंद्रीय मंत्री के इन आरोपों के सामने आते ही सीजेपी के शीर्ष नेतृत्व ने पूरी आक्रामकता के साथ मोर्चा खोल दिया। अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक पुरानी तस्वीर साझा की, जिसने सत्ता पक्ष को बैकफुट पर ला खड़ा किया। इस तस्वीर में केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह खुद सीजेपी नेता आशुतोष रांका से गर्मजोशी से हाथ मिलाते हुए दिखाई दे रहे हैं, जबकि पृष्ठभूमि में भाजपा के शीर्ष नेता और मंत्री जेपी नड्डा के साथ-साथ सीजेपी के दूसरे प्रमुख चेहरे सौरभ दास भी खड़े नजर आ रहे हैं। इस तस्वीर को साझा करते हुए दीपके ने लिखा कि धर्मेंद्र प्रधान को उनके पद से हटवाने के लिए कथित विदेशी फंडिंग में से जितेंद्र सिंह ने कितना कमीशन लिया था, क्योंकि छात्रों के आंदोलन के समय सरकार की ओर से समझौते की मेज पर बातचीत करने वही आगे आए थे। दीपके के इस कटाक्ष ने सोशल मीडिया पर तेजी से तूल पकड़ लिया और नेटिजन्स सरकार के दोहरे मापदंडों पर सवाल उठाने लगे।

आशुतोष रांका और सौरभ दास ने भी कसा तंज, पूछा- ‘फिर हमारे साथ चाय-नाश्ता क्यों कर रहे थे?’

दीपके के इस आक्रामक हमले के तुरंत बाद आंदोलन के सह-संयोजक सौरभ दास और आशुतोष रांका भी पूरी तरह मैदान में कूद पड़े। सौरभ दास ने दीपके की पोस्ट को री-ट्वीट करते हुए व्यंग्यात्मक लहजे में लिखा कि ‘जितेंद्र भाई ने एक या दो प्रतिशत कट लिया था?’ और साथ ही हंसने वाली इमोजी जोड़ते हुए तंज कसा कि मंत्री जी ने उन्हें विदेशी फंडिंग वाली लिस्ट में भूलकर अच्छा किया। वहीं पाकिस्तानी फंडिंग के आरोपों से घिरे आशुतोष रांका ने केंद्रीय मंत्री पर सीधा सवाल दागते हुए कहा कि अगर हम विदेशी शक्तियों और पाकिस्तान के इशारे पर काम कर रहे थे, तो देश की हुकूमत और केंद्र सरकार के जिम्मेदार मंत्री हमारे साथ बंद कमरों में घंटों बैठकर बातचीत क्यों कर रहे थे और हमारे साथ बैठकर चाय-नाश्ता क्यों किया जा रहा था? रांका ने सरकार पर तंज कसते हुए यह भी लिखा कि जब भी देश में पेपर लीक होते हैं, बेरोजगारी बढ़ती है या स्कूलों की हालत खराब होती है, तो सरकार अपनी जवाबदेही से बचने के लिए तुरंत पाकिस्तान और विदेशी ताकतों का राग अलापने लगती है।

छात्र आंदोलन और धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की वो पृष्ठभूमि, जिससे जुड़ा है पूरा विवाद

इस पूरे वाकयुद्ध को समझने के लिए कुछ महीने पीछे मुड़कर देखना जरूरी है, जब मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट (NEET-UG) और प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक के आरोपों को लेकर देश भर में भारी बवाल मचा था। उस दौरान कॉकरोच जनता पार्टी के बैनर तले लाखों छात्रों और युवाओं ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर डेरा डाल दिया था और तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर अड़ गए थे। आंदोलन के प्रचंड दबाव, संसद में विपक्ष के तीखे हमलों और सड़क पर बढ़ते आक्रोश के बीच धर्मेंद्र प्रधान को अंततः अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा था। उस समय स्थिति को संभालने और आंदोलनकारी युवाओं के साथ गतिरोध खत्म करने के लिए सरकार की ओर से एक उच्चस्तरीय मध्यस्थता दल बनाया गया था, जिसमें केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह और संगठन के वरिष्ठ रणनीतिकार शामिल थे। सीजेपी नेताओं का कहना है कि उस समय जब सरकार अपनी साख बचाने के लिए उनसे मिन्नतें कर रही थी तब किसी को फंडिंग की याद नहीं आई, लेकिन आज जब आंदोलन के नए चरण की तैयारी हो रही है तो चरित्र हनन का सहारा लिया जा रहा है।

कानूनी लड़ाई या राजनीतिक घेराबंदी: आगे क्या मोड़ लेगा सीजेपी बनाम केंद्र का टकराव

विदेशी फंडिंग (FCRA) और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े गंभीर आरोपों के बाद यह मामला केवल सोशल मीडिया की बहस तक सीमित रहने वाला नहीं दिख रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि केंद्रीय मंत्री द्वारा सार्वजनिक रूप से प्रेस वार्ता में विदेशी धन के लेन-देन का दावा किए जाने के बाद जांच एजेंसियां इस मामले में सीजेपी नेताओं के बैंक खातों और डिजिटल फंडिंग अभियानों की प्रारंभिक जांच शुरू कर सकती हैं। दूसरी ओर, सीजेपी नेतृत्व ने भी स्पष्ट कर दिया है कि वे इन आरोपों से डरने वाले नहीं हैं और अगर सरकार के पास कोई पुख्ता सबूत हैं तो वह सार्वजनिक मंचों पर भाषणबाजी करने के बजाय कानूनी कार्रवाई करे या फिर अदालत में आकर मानहानि का मुकदमा झेले। युवाओं और छात्रों के बीच तेजी से पैठ बना रहे इस आंदोलन और सत्ता पक्ष के बीच छिड़ा यह घमासान आने वाले दिनों में देश के राजनीतिक माहौल को और अधिक गर्माने वाला साबित होगा।

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