
भारत के पड़ोसी देश बांग्लादेश में राजनीतिक अस्थिरता के बाद अब आर्थिक और श्रम असंतोष के चलते हालात एक बार फिर गंभीर रूप से बिगड़ चुके हैं। देश के आर्थिक पहिये की रीढ़ माने जाने वाले रेडीमेड गारमेंट (कपड़ा उद्योग) क्षेत्र के लाखों कर्मचारी और मजदूर न्यूनतम वेतन में सम्मानजनक वृद्धि की मांग को लेकर सड़कों पर उतर आए हैं। राजधानी ढाका सहित आसपास के प्रमुख औद्योगिक हब जैसे गाजीपुर, सावर, आशुलिया और नारायणगंज में स्थिति बेहद तनावपूर्ण हो गई है। कई दिनों से चल रहा यह गतिरोध अब हिंसक संघर्ष में बदल चुका है, जहां प्रदर्शनकारी कर्मचारियों और भारी संख्या में तैनात पुलिस और अर्धसैनिक बलों के बीच तीखी झड़पें, पथराव और आगजनी की घटनाएं सामने आ रही हैं। ढाका के प्रमुख राजमार्गों को प्रदर्शनकारियों ने पूरी तरह जाम कर दिया है, जिससे देश की राजधानी का संपर्क कई जिलों से कट गया है और आपूर्ति श्रृंखला पूरी तरह ठप हो गई है।
पुलिस वाहनों में लगाई आग, आंसू गैस और स्टन ग्रेनेड से छावनी में तब्दील हुई राजधानी
विरोध-प्रदर्शनों ने उस समय विकराल रूप ले लिया जब नारायणगंज के फतुल्लाह और ढाका के मीरपुर इलाके में हजारों की तादाद में जमा हुए मजदूरों ने सुरक्षा बलों के घेरे को तोड़ने का प्रयास किया। आक्रोशित भीड़ ने कई सार्वजनिक और पुलिस वाहनों में तोड़फोड़ की और कुछ गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया। बेकाबू होती भीड़ को तितर-बितर करने के लिए सुरक्षा बलों ने लाठीचार्ज किया, पानी की बौछारें छोड़ीं और लगातार दर्जनों राउंड आंसू गैस के गोले व स्टन ग्रेनेड दागे। इस भीषण टकराव में दर्जनों मजदूर और कई पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हो चुके हैं। राजधानी के प्रमुख और संवेदनशील इलाकों में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए 10,000 से अधिक अतिरिक्त पुलिसकर्मियों के साथ-साथ ‘बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश’ (BGB) की दर्जनों टुकड़ियों को सड़कों पर गश्त के लिए उतार दिया गया है।
इस भारी उपद्रव और आंदोलन की जड़ में कपड़ा मजदूरों की न्यूनतम मजदूरी बढ़ाने की मांग है। वर्तमान में बांग्लादेश में गारमेंट सेक्टर के कामगारों को न्यूनतम मासिक वेतन लगभग 12,500 टका मिलता है, जिसे मजदूर संगठन बढ़ाकर 30,000 टका (करीब 245 अमेरिकी डॉलर) करने की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों का कहना है कि देश में आवश्यक वस्तुओं, खाद्य तेल, चावल, रसोई गैस और मकान किराए की कीमतों में बेतहाशा वृद्धि हुई है, जिसके चलते मौजूदा वेतन में दो वक्त की रोटी जुटाना भी नामुमकिन हो गया है। यद्यपि प्रशासन ने एक नया न्यूनतम वेतन बोर्ड गठित कर कर्मचारियों को शांत करने का प्रयास किया था, लेकिन आंदोलनकारी लिखित गारंटी और तत्काल प्रभाव से लागू होने वाले ठोस फैसले की मांग पर अड़े हुए हैं।
सैकड़ों कपड़ा फैक्ट्रियां बंद, 40 लाख कामगारों वाले सबसे बड़े उद्योग पर गहराया संकट
बांग्लादेश गारमेंट मैन्युफैक्चरर्स एंड एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन (BGMEA) के अनुसार, इस उग्र आंदोलन और सुरक्षा जोखिमों को देखते हुए ढाका, गाजीपुर और आशुलिया बेल्ट की 600 से 1,000 से अधिक फैक्ट्रियों को अनिश्चितकाल के लिए बंद करना पड़ा है। चीन के बाद बांग्लादेश दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा रेडीमेड गारमेंट निर्यातक देश है, जहां लगभग 40 लाख से अधिक लोग इस उद्योग में सीधे कार्यरत हैं—जिनमें 60 प्रतिशत से अधिक ग्रामीण महिलाएं हैं। देश की कुल वार्षिक निर्यात आय में इस क्षेत्र का योगदान लगभग 80 प्रतिशत से ज्यादा यानी अरबों डॉलर का है। यदि यह गतिरोध और तोड़फोड़ जल्द समाप्त नहीं होती, तो अंतरराष्ट्रीय खरीदार और वैश्विक फैशन ब्रांड अपने ऑर्डर वियतनाम, कंबोडिया और भारत जैसे वैकल्पिक बाजारों में स्थानांतरित कर सकते हैं, जिससे बांग्लादेश की पहले से कमजोर अर्थव्यवस्था पर विनाशकारी प्रभाव पड़ सकता है।
पड़ोसी देश में बिगड़ते आंतरिक हालात और औद्योगिक अशांति को लेकर नई दिल्ली का सुरक्षा और विदेश नीति तंत्र बेहद सतर्क बना हुआ है। भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) ने स्पष्ट किया है कि भारत बांग्लादेश के ताजा घटनाक्रमों और जमीनी हालात पर लगातार सूक्ष्म नजर बनाए हुए है। सीमा सुरक्षा बल (BSF) को भी 4,096 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा पर अतिरिक्त सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं ताकि पड़ोसी मुल्क में उपद्रव और अशांति का फायदा उठाकर कोई अवांछित या असामाजिक तत्व सीमा पार घुसपैठ करने में सफल न हो सके। दक्षिण एशियाई क्षेत्र में स्थिरता और आर्थिक संतुलन के लिहाज से बांग्लादेश का यह नया आंतरिक संकट आने वाले दिनों में और जटिल मोड़ ले सकता है।
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