
अमेरिकी मध्यावधि (मिडटर्म) चुनावों में रिपब्लिकन पार्टी को लगे तगड़े झटके और कांग्रेस के दोनों सदनों में डेमोक्रेट्स की वापसी के तुरंत बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी कोर टीम में बड़ा फेरबदल कर दिया है। ट्रंप ने अपनी सबसे भरोसेमंद रणनीतिकार और व्हाइट हाउस की पहली महिला चीफ ऑफ स्टाफ सूजी वाइल्स (Susie Wiles) को पद से हटाते हुए अपने सबसे आक्रामक और लंबे समय से सहयोगी रहे स्टीफन मिलर (Stephen Miller) को नया व्हाइट हाउस चीफ ऑफ स्टाफ नियुक्त करने का आधिकारिक ऐलान कर दिया है। 41 वर्षीय स्टीफन मिलर, जो अब तक डिप्टी चीफ ऑफ स्टाफ फॉर पॉलिसी और होमलैंड सिक्योरिटी एडवाइजर के रूप में कार्यरत थे, औपचारिक रूप से व्हाइट हाउस की प्रशासनिक बागडोर संभालेंगे। अमेरिकी सत्ता के शीर्ष गलियारों में आए इस अप्रत्याशित बदलाव को ट्रंप की ‘अमेरिका फर्स्ट’ और हार्डलाइनर नीतियों को और अधिक आक्रामक बनाने के स्पष्ट संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
‘आइस मेडन’ की विदाई: शांत रणनीति की जगह अब आक्रामक तेवर की वापसी
व्हाइट हाउस के भीतर ‘आइस मेडन’ (Ice Maiden) के नाम से मशहूर सूजी वाइल्स ने 2024 के राष्ट्रपति चुनाव अभियान से लेकर अब तक ट्रंप के प्रशासन को व्यवस्थित और नियंत्रित रखने में केंद्रीय भूमिका निभाई थी। पर्दे के पीछे रहकर काम करने वाली वाइल्स ने पहली बार ट्रंप के व्हाइट हाउस में एक अनुशासित व्यवस्था कायम करने की कोशिश की थी। लेकिन मिडटर्म चुनावों में महंगाई, ईरान नीति और विदेशी युद्धों के प्रभाव के चलते मतदाताओं ने जब रिपब्लिकन पार्टी को नकार दिया, तो ट्रंप प्रशासन के भीतर रणनीति में बुनियादी बदलाव की मांग उठने लगी। ट्रंप ने वाइल्स के सेवाकाल की औपचारिक सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने असाधारण नेतृत्व दिया है, लेकिन वॉशिंगटन में अब विपक्ष के दबदबे वाली नई कांग्रेस से दो-दो हाथ करने के लिए उन्हें एक ‘लड़ाके’ की जरूरत है। हालांकि वाइल्स प्रशासन से पूरी तरह अलग नहीं होंगी और ट्रंप के राजनीतिक संचालन तंत्र में सलाहकार के तौर पर जुड़ी रहेंगी।
स्टीफन मिलर: ‘अमेरिका फर्स्ट’ और आव्रजन नीति के सबसे कट्टर सिपहसालार
स्टीफन मिलर कोई नए चेहरे नहीं हैं, बल्कि वे 2016 के शुरुआती दिनों से ही ट्रंप के वैचारिक और रणनीतिक आंदोलन का मुख्य चेहरा रहे हैं। ट्रंप के पहले कार्यकाल में भाषण लेखक और वरिष्ठ नीति सलाहकार के तौर पर मिलर ने ‘मुस्लिम देशों पर ट्रैवल बैन’ और मैक्सिको सीमा पर कड़ी दीवारों जैसे फैसलों की रूपरेखा तैयार की थी। इसके बाद ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में उन्होंने बड़े पैमाने पर अवैध प्रवासियों के डिपोर्टेशन (Mass Deportation) और सख्त सीमा सुरक्षा योजनाओं को लागू करने का जिम्मा संभाला। मिलर को रिपब्लिकन बेस में एक ऐसे नेता के रूप में देखा जाता है जो किसी भी राजनीतिक दबाव के आगे झुकते नहीं हैं। कई दक्षिणपंथी टिप्पणीकारों और ट्रंप समर्थकों ने उनके चयन को ‘वॉर-टाइम चीफ ऑफ स्टाफ’ की ताजपोशी करार दिया है, जो आने वाले दिनों में विरोधी खेमे के साथ सीधे वैचारिक और प्रशासनिक टकराव के लिए तैयार रहेगा।
नई डेमोक्रेटिक कांग्रेस के साथ टकराव का खुला मंच
मिडटर्म नतीजों के बाद कैपिटल हिल का शक्ति संतुलन पूरी तरह बदल चुका है। जब प्रतिनिधि सभा और सीनेट में विपक्षी डेमोक्रेट्स मजबूत स्थिति में आ गए हैं, तब व्हाइट हाउस के सामने हर विधायी प्रस्ताव और बजट को पास कराने की भारी चुनौती होगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना था कि ट्रंप किसी ऐसे व्यक्ति को चीफ ऑफ स्टाफ बनाएंगे जो दोनों दलों के बीच पुल का काम कर सके। लेकिन स्टीफन मिलर की नियुक्ति ने साफ कर दिया है कि ट्रंप समझौते के मूड में बिल्कुल नहीं हैं। मिलर अपनी सख्त बयानबाजी और कट्टर दक्षिणपंथी रुख के लिए जाने जाते हैं, जिसका डेमोक्रेटिक पार्टी लंबे समय से तीखा विरोध करती रही है। ऐसे में मिलर की अगुवाई में आने वाले दो वर्षों के दौरान व्हाइट हाउस और कांग्रेस के बीच अभूतपूर्व गतिरोध और तीखी नोकझोंक देखने को मिल सकती है।
सत्ता का नया केंद्र: 2028 की तैयारी और ट्रंप का सख्त संदेश
इस बड़े फैसले से ट्रंप ने अपने विरोधियों और पार्टी के भीतर असंतुष्ट गुटों को साफ संदेश दे दिया है कि चुनावी झटके के बावजूद वे अपनी बुनियादी नीतियों से एक इंच भी पीछे नहीं हटेंगे। स्टीफन मिलर के हाथों में कमान आने का मतलब है कि आव्रजन, आंतरिक सुरक्षा और व्यापारिक नीतियों पर प्रशासनिक आदेशों (Executive Orders) का इस्तेमाल और ज्यादा तेजी से किया जाएगा। ट्रंप प्रशासन अब रक्षात्मक होने के बजाय अपने कोर समर्थकों को एकजुट रखने और आगामी राजनीतिक लड़ाइयों के लिए मोर्चेबंदी करने में जुट गया है। व्हाइट हाउस में हुआ यह फेरबदल सिर्फ एक प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि अमेरिकी राजनीति के सबसे ध्रुवीकृत और आक्रामक दौर की शुरुआत का संकेत है।
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