‘यह मोदी बनाम मीर जाफर की लड़ाई’: स्टारलिंक विवाद और एलन मस्क के ट्वीट पर राहुल गांधी के बयान पर BJP का तीखा हमला

दुनिया के सबसे अमीर उद्योगपति एलन मस्क की सैटेलाइट इंटरनेट सेवा स्टारलिंक (Starlink) को भारत में लाइसेंस मिलने में हो रही देरी को लेकर शुरू हुआ विवाद अब एक बड़े सियासी घमासान में तब्दील हो गया है। एलन मस्क द्वारा भारतीय नियामकीय प्रक्रियाओं पर सवाल उठाने के बाद लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा मस्क के समर्थन में किए गए पोस्ट पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने तीखा प्रहार किया है। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता और सांसद संबित पात्रा ने नई दिल्ली स्थित पार्टी मुख्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर राहुल गांधी के रुख की तुलना ऐतिहासिक गद्दार ‘मीर जाफर’ से करते हुए कहा कि देश में यह मुकाबला किसी नीति का नहीं, बल्कि “मोदी बनाम मीर जाफर” का है।

राहुल गांधी के ‘वेलकम टू इंडिया’ पोस्ट से गरमाया विवाद

विवाद की शुरुआत तब हुई जब एलन मस्क ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा कि सभी भारतीय नियमों का पालन करने के बावजूद स्टारलिंक को 5 साल से भारत में सैटेलाइट ब्रॉडबैंड का लाइसेंस हासिल करने में बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है। इस पर राहुल गांधी ने मस्क के पोस्ट को रिपोस्ट करते हुए लिखा:

“Welcome to India, Elon. Wait till you discover the other guy.” (भारत में आपका स्वागत है, एलन। रुकिए जब तक आप दूसरे व्यक्ति के बारे में नहीं जान लेते)।

इसके जवाब में मस्क ने लिखा, “Thank you, Rahul. This is indeed troubling”। इस संवाद के सामने आते ही भाजपा ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी विदेशी उद्योगपतियों के हित साधने और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला करने के चक्कर में भारत के संप्रभु नियमों और राष्ट्रीय सुरक्षा चिंताओं को ताक पर रख रहे हैं।

‘सत्ता के लिए देश को गिरवी रखने वाले मीर जाफर’—संबित पात्रा

संबित पात्रा ने राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी के रुख को घेरते हुए कहा कि यह दोहरे चरित्र की पराकाष्ठा है। पात्रा ने कहा:

“आज यह स्पष्ट हो गया है कि यह लड़ाई मोदी बनाम मीर जाफरों की है। कुछ ऐसे लोग हैं जो बिना चुनाव जीते, बिना मेहनत किए प्रधानमंत्री की कुर्सी पर बैठने के लिए देश के हितों को भी गिरवी रखने को तैयार हैं। जो कांग्रेस नेता कुछ समय पहले कह रहे थे कि विदेशी सैटेलाइट इंटरनेट भारत की सुरक्षा के लिए खतरा है और मोदी सरकार ने अमेरिका के आगे सरेंडर कर दिया, आज उनके ही नेता राहुल गांधी अचानक एलन मस्क के पैरोकार बनकर खड़े हो गए हैं। भारत कोई ‘बनाना रिपब्लिक’ नहीं है जहां किसी भी विदेशी कंपनी को राष्ट्रीय सुरक्षा जांचे बिना खुली छूट दे दी जाए। भारत में मुगलों और अंग्रेजों ने ऐसे ही मीर जाफरों की मदद से सत्ता हथियाई थी, लेकिन आज देश के हितों की रक्षा के लिए नरेंद्र मोदी खड़े हैं।”

CJP आंदोलन और सड़क पर अराजकता फैलाने का आरोप

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पात्रा ने शनिवार को दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और विपक्षी दलों द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ बुलाए गए जंतर-मंतर प्रदर्शन को भी इस कड़ी से जोड़ा। उन्होंने कहा कि जब विपक्ष चुनावी मैदान में पराजित हो जाता है, तो वह चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्थाओं की साख गिराने और सड़कों पर अराजकता पैदा करने की कोशिश करता है। पात्रा के अनुसार, चाहे विदेशी कंपनियों का मुद्दा हो या चुनाव आयोग के खिलाफ प्रायोजित प्रदर्शन, इन सबका एकमात्र मकसद देश में अस्थिरता पैदा करना है।

स्टारलिंक के लाइसेंस पर क्या है सरकार का आधिकारिक रुख?

केंद्र सरकार और दूरसंचार विभाग (DoT) ने स्पष्ट किया है कि भारत में सैटेलाइट स्पेक्ट्रम आवंटन और कमर्शियल वीसैट/जीएमपीटीएस (GMPTS) लाइसेंस पूरी तरह से टेलीकॉम एक्ट और राष्ट्रीय सुरक्षा मानकों के अधीन हैं:

  • डेटा सिक्योरिटी और लोकल गेटवे: भारत की सुरक्षा एजेंसियों का सख्त नियम है कि भारतीय सीमा के भीतर संचालित होने वाले सैटेलाइट इंटरनेट का सारा डेटा ट्रैफिक स्थानीय (घरेलू) अर्थ स्टेशनों और गेटवे से होकर ही गुजरना चाहिए ताकि साइबर सुरक्षा और इंटरसेप्शन नियमों का उल्लंघन न हो।

  • समान अवसर (Level Playing Field): घरेलू टेलीकॉम ऑपरेटरों (जैसे जियो और एयरटेल) का तर्क रहा है कि सैटेलाइट स्पेक्ट्रम का आवंटन नीलामी (ऑक्शन) के जरिए होना चाहिए, जबकि वैश्विक कंपनियां इसे प्रशासनिक आवंटन के रूप में मांग रही थीं। सरकार का कहना है कि नियम सभी कंपनियों के लिए एक समान और पारदर्शी रहेंगे।

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