
रूस और यूक्रेन के बीच जारी भीषण युद्ध और पश्चिमी देशों के साथ शीतयुद्ध जैसे तनाव के बीच रूस की राजधानी मॉस्को से एक ऐसी चौंकाने वाली खबर सामने आई है जिसने पूरी दुनिया के रक्षा और कूटनीतिक विशेषज्ञों के कान खड़े कर दिए हैं। अमेरिकी वायुसेना (USAF) का महाकाय रणनीतिक सैन्य परिवहन विमान बोइंग C-17A ग्लोबमास्टर III अप्रत्याशित रूप से मॉस्को के व्नुकोवो अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरा। दोनों देशों के बीच आधिकारिक उड़ानों और एयरस्पेस पर लगे कड़े प्रतिबंधों के दौर में एक अमेरिकी एक्टिव-ड्यूटी सैन्य विमान का सीधे रूसी राजधानी में उतरना कोई सामान्य घटना नहीं थी। शुरुआती घंटों तक इस रहस्यमयी उड़ान के मकसद और इसमें सवार लोगों को लेकर कयासों का बाजार गर्म रहा, लेकिन अब इस राज से पर्दा उठ चुका है। यह विशाल सैन्य विमान किसी सामान्य कार्गो के लिए नहीं, बल्कि अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए (CIA) के डायरेक्टर जॉन रैटक्लिफ को एक बेहद गोपनीय और संवेदनशील मिशन पर मॉस्को लेकर पहुंचा था।
ज्वाइंट बेस एंड्रयूज से रीगा होते हुए मॉस्को तक का सफर
फ्लाइट-ट्रैकिंग और ओपन-सोर्स इंटेलिजेंस डेटा के अनुसार, इस अमेरिकी सैन्य विमान (कॉलसाइन RCH4555 और टेल नंबर 07-7181) ने अमेरिका के मैरीलैंड स्थित ऐतिहासिक ‘ज्वाइंट बेस एंड्रयूज’ से उड़ान भरी थी। यह वही सैन्य अड्डा है जहां अमेरिकी राष्ट्रपति का आधिकारिक विमान ‘एयर फोर्स वन’ तैनात रहता है। इसके बाद विमान ने यूरोपीय देश लातविया की राजधानी रीगा में संक्षिप्त पड़ाव डाला। रीगा से उड़ान भरने के महज सत्तर मिनट बाद इस विमान ने रूसी एयरस्पेस में प्रवेश किया और सीधे मॉस्को के व्नुकोवो एयरपोर्ट के रनवे पर अपने पहिए टिका दिए। रूसी वायुक्षेत्र पूरी तरह से पश्चिमी देशों के लिए बंद होने के बावजूद इस विमान का सीधे मॉस्को में उतरना इस बात का पुख्ता प्रमाण था कि इस गुप्त उड़ान को क्रेमलिन और रूसी विमानन प्राधिकरणों की शीर्ष स्तर से विशेष अनुमति हासिल थी।
सीआईए चीफ जॉन रैटक्लिफ का पहला गुप्त दौरा और बंद कमरों की वार्ता
अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स और शीर्ष सूत्रों के हवाले से यह पुष्टि हुई है कि सीआईए डायरेक्टर का पद संभालने के बाद जॉन रैटक्लिफ की यह पहली मॉस्को यात्रा है। इससे पहले नवंबर 2021 में यूक्रेन युद्ध शुरू होने से ठीक पहले तत्कालीन सीआईए चीफ विलियम बर्न्स ने रूस का दौरा किया था। रैटक्लिफ की यह यात्रा इस लिहाज से भी ऐतिहासिक है क्योंकि वे मौजूदा ट्रंप प्रशासन के सबसे वरिष्ठ अधिकारी हैं जिन्होंने रूसी जमीन पर सीधे कदम रखा है। हवाई अड्डे पर उतरने के कुछ ही समय बाद अमेरिकी राजनयिक नंबर प्लेट वाली गाड़ियों का एक भारी सुरक्षा काफिला मॉस्को की सड़कों पर देखा गया, जो रूसी खुफिया और सुरक्षा प्रतिष्ठान के शीर्ष अधिकारियों के साथ उच्च स्तरीय बैठकों के लिए रवाना हुआ।
यूक्रेन में शांति वार्ता का रुका हुआ पहिया और बैक-चैनल कूटनीति
अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के विश्लेषकों का मानना है कि रैटक्लिफ के इस गुप्त दौरे का सबसे बड़ा और प्राथमिक एजेंडा यूक्रेन युद्ध को खत्म करने के लिए अटकी हुई वार्ताओं को दोबारा पटरी पर लाना है। पिछले कुछ हफ्तों से युद्धविराम और शांति प्रस्तावों को लेकर सार्वजनिक बातचीत पूरी तरह ठप पड़ी हुई थी। जब सार्वजनिक और औपचारिक कूटनीति विफल या धीमी हो जाती है, तब दुनिया की महाशक्तियां हमेशा ‘बैक-चैनल इंटेलिजेंस डिप्लोमेसी’ का सहारा लेती हैं। खुफिया प्रमुखों के बीच होने वाली बातचीत में राजनीतिक बयानबाजी से हटकर दोनों पक्ष सीधे उन शर्तों और लाल रेखाओं (रेड लाइन्स) पर चर्चा करते हैं, जिन पर दोनों देशों के राष्ट्रप्रमुख सार्वजनिक रूप से खुलकर बात नहीं कर सकते। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस बैठक के दौरान संभावित युद्धविराम की रूपरेखा और दोनों पक्षों की मुख्य सुरक्षा चिंताओं पर सीधा संवाद स्थापित किया गया।
कैदियों की अदला-बदली और रणनीतिक जोखिमों को टालने का प्रयास
इस औचक यात्रा का एक अन्य संभावित कारण अमेरिका और रूस के बीच कैदियों की अदला-बदली (प्रिजनर स्वैप) और मध्य पूर्व के जटिल हालात भी हो सकते हैं। पूर्व में भी सीआईए ने मॉस्को के साथ सीधे संवाद के जरिए अमेरिकी नागरिकों की रिहाई में महत्वपूर्ण मध्यस्थता की थी। इसके अलावा, ईरान संकट और परमाणु प्रसार से जुड़े मामलों पर भी वाशिंगटन और मॉस्को के बीच सीधी समझ विकसित करना इस गुप्त मिशन का एक प्रमुख हिस्सा माना जा रहा है। दोनों परमाणु महाशक्तियों के बीच किसी भी अप्रत्याशित सैन्य गलतफहमी को रोकने और हॉटलाइन संपर्कों को दुरुस्त रखने के लिए ऐसी गुप्त बैठकें बेहद अपरिहार्य मानी जाती हैं।
क्रेमलिन का सधा हुआ रुख और बयानों की कूटनीतिक दीवार
इस पूरे घटनाक्रम पर क्रेमलिन के आधिकारिक प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव से जब पत्रकारों ने सवाल किया, तो उन्होंने बेहद सधी हुई कूटनीति का परिचय देते हुए कहा कि उन्हें इस विमान की लैंडिंग या किसी अमेरिकी अधिकारी के साथ औपचारिक बैठक की कोई जानकारी नहीं है। कूटनीति के जानकारों के मुताबिक, खुफिया स्तर के मिशनों में हमेशा दोनों देशों की सरकारें आधिकारिक रूप से इनकार की नीति (Plausible Deniability) अपनाती हैं ताकि वार्ताओं के परिणाम निकलने से पहले किसी तरह का घरेलू या वैश्विक राजनीतिक दबाव न बने। हालांकि सोशल मीडिया पर मॉस्को के स्थानीय नागरिकों द्वारा बनाए गए विमान के लैंडिंग वीडियो वायरल हो चुके थे, जिससे इस मिशन को पूरी तरह छिपाना मुमकिन नहीं था।
ग्लोबमास्टर C-17 की खासियत: इस विमान को ही क्यों चुना गया?
सामान्यतः राजनयिक यात्राओं के लिए छोटे वीआईपी जेट्स का इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन सीआईए चीफ के इस मिशन के लिए भारी-भरकम C-17 ग्लोबमास्टर को चुनने के पीछे गंभीर सुरक्षा और तकनीकी कारण थे। C-17 विमान में ‘रोल-ऑन कॉन्फ्रेंस कैप्सूल’ (ROCC) जैसी आधुनिक और पूरी तरह से सुरक्षित मोबाइल सुविधाएं फिट की जा सकती हैं, जो हवा में उड़ते हुए भी अत्यधिक एन्क्रिप्टेड और सुरक्षित सैटेलाइट संचार प्रदान करती हैं। इसके अलावा, यह विमान मिसाइल रोधी आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक काउंटरमेजर्स और फ्लेयर्स सिस्टम से लैस होता है, जो किसी भी संवेदनशील या संभावित रूप से जोखिम भरे हवाई क्षेत्र में वीवीआईपी यात्रियों और खुफिया अधिकारियों को पूर्ण सुरक्षा कवच प्रदान करता है।
वैश्विक भू-राजनीति में बड़े बदलाव के संकेत
मॉस्को में अमेरिकी सैन्य विमान की यह लैंडिंग और सीआईए डायरेक्टर की मौजूदगी साफ इशारा कर रही है कि पर्दे के पीछे वाशिंगटन और मॉस्को के बीच बहुत बड़ी भू-राजनीतिक बिसात बिछाई जा रही है। यूक्रेन संघर्ष के भविष्य, यूरोप की नई सुरक्षा व्यवस्था और महाशक्तियों के बीच नए शक्ति संतुलन को तय करने में यह गुप्त मिशन मील का पत्थर साबित हो सकता है। आने वाले दिनों में जब इस यात्रा के परिणाम सामने आएंगे, तब यह स्पष्ट होगा कि इस ऐतिहासिक लैंडिंग ने दुनिया को युद्ध के मुहाने से शांति की ओर मोड़ने में कितनी निर्णायक भूमिका निभाई है।
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