यूपी में कानून-व्यवस्था और आगामी त्योहारों को लेकर 17 नवंबर तक पुलिसकर्मियों की छुट्टियां रद्द, डीजीपी ने जारी किए कड़े निर्देश

उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था को पूरी तरह चाक-चौबंद रखने और आगामी प्रमुख त्योहारों पर शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) राजीव कृष्ण ने सख्त रुख अपनाते हुए बड़ा आदेश जारी किया है। मुख्यालय से जारी दिशा-निर्देशों के तहत प्रदेश के सभी पुलिसकर्मियों, अधिकारियों, पीएसी बटालियनों और विशेष सुरक्षा दलों के सभी प्रकार के अवकाश आगामी 17 नवंबर तक तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिए गए हैं। देव दीपावली, कार्तिक पूर्णिमा, छठ पूजा, गुरु नानक जयंती और विभिन्न क्षेत्रों में राजनीतिक व सामाजिक आयोजनों के चलते प्रदेश भर में सुरक्षा व्यवस्था को हाई अलर्ट पर रखा गया है। पुलिस मुख्यालय का मानना है कि त्योहारों और संवेदनशील अवसरों पर असामाजिक तत्वों की गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश लगाने और जनसामान्य की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी जनपदों में शत-प्रतिशत पुलिस बल की भौतिक उपस्थिति अनिवार्य है। इस संबंध में सभी पुलिस कमिश्नरों, परिक्षेत्रीय आईजी, डीआईजी और जिले के कप्तानों (एसएसपी/एसपी) को आदेश की प्रति भेजकर तत्काल प्रभाव से इसका अनुपालन सुनिश्चित करने को कहा गया है।

केवल असाधारण परिस्थितियों में ही मिल सकेगी आपातकालीन छुट्टी की अनुमति

मुख्यालय द्वारा जारी सर्कुलर में स्पष्ट किया गया है कि 17 नवंबर तक किसी भी पुलिसकर्मी को सामान्य अथवा आकस्मिक अवकाश (कैजुअल लीव या ईएल) नहीं दिया जाएगा। यदि किसी पुलिसकर्मी अथवा अधिकारी के परिवार में कोई गंभीर चिकित्सकीय आपात स्थिति या कोई अत्यधिक अपरिहार्य परिस्थिति उत्पन्न होती है, तो केवल उस स्थिति में संबंधित जिले के पुलिस कमिश्नर अथवा पुलिस अधीक्षक के व्यक्तिगत अनुमोदन के बाद ही न्यूनतम अवधि का अवकाश स्वीकृत किया जा सकेगा। बिना सक्षम अधिकारी की लिखित पूर्व अनुमति के कोई भी कर्मी अपना कार्यक्षेत्र अथवा थाना क्षेत्र नहीं छोड़ सकेगा। गैर-हाजिर रहने अथवा आदेश का उल्लंघन करने वाले कर्मियों के विरुद्ध विभागीय अनुशासनहीनता के तहत कठोर दंडात्मक कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ ही पूर्व में स्वीकृत हो चुके अवकाशों को भी निरस्त करते हुए छुट्टी पर चल रहे जवानों को तुरंत अपनी संबंधित यूनिट और थानों में रिपोर्ट करने का निर्देश दिया गया है।

संवेदनशील जिलों और धार्मिक नगरियों में अतिरिक्त सुरक्षा घेरा

प्रदेश की राजधानी लखनऊ, धार्मिक नगरी अयोध्या, काशी (वाराणसी), मथुरा, प्रयागराज, गोरखपुर और कानपुर सहित सभी संवेदनशील जिलों में सुरक्षा का व्यापक खाका तैयार किया गया है। नदी घाटों, प्रमुख मंदिरों, भीड़भाड़ वाले बाजारों और अंतरराज्यीय सीमाओं पर अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की जा रही है। डीजीपी ने सभी वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देशित किया है कि वे कार्यालयों में सीमित रहने के बजाय खुद सड़कों पर उतरें और संवेदनशील इलाकों में नियमित रूप से पैदल गश्त (फुट पेट्रोलिंग) का नेतृत्व करें। नदी तटों पर छठ पर्व और कार्तिक पूर्णिमा स्नान के दौरान किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और जल पुलिस की विशेष टीमों को गोताखोरों व नावों के साथ तैनात रहने के निर्देश दिए गए हैं।

डायल 112 और त्वरित प्रतिक्रिया दल को जीरो रिस्पॉन्स टाइम का लक्ष्य

त्योहारों के दौरान किसी भी आपातकालीन सूचना पर पुलिस की मदद तुरंत जनता तक पहुंचे, इसके लिए यूपी-112 की सभी पीआरवी (पुलिस रिस्पॉन्स व्हीकल) को 24 घंटे रणनीतिक बिंदुओं पर सक्रिय रहने को कहा गया है। किसी भी सूचना पर न्यूनतम रिस्पॉन्स टाइम में मौके पर पहुंचने का लक्ष्य तय किया गया है। जनपदों में रिजर्व पुलिस लाइंस में दंगा-रोधी उपकरणों से लैस क्यूआरटी (क्विक रिस्पॉन्स टीम) और अतिरिक्त रिजर्व कंपनियों को स्टैंडबाई मोड में रखा गया है। जिला स्तरीय अभिसूचना इकाइयों (एलआईयू) को अपने नेटवर्क को पूरी तरह सक्रिय रखने और हर छोटी-बड़ी गतिविधि की गोपनीय रिपोर्ट सीधे पुलिस कप्तानों को उपलब्ध कराने के कड़े निर्देश दिए गए हैं ताकि किसी भी प्रकार के तनाव या विवाद की स्थिति को समय रहते नियंत्रित किया जा सके।

सोशल मीडिया और भ्रामक संदेशों पर साइबर सेल की 24 घंटे निगरानी

त्योहारों और संवेदनशील माहौल के दौरान सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने वालों से निपटने के लिए राज्य भर के साइबर क्राइम थानों और सोशल मीडिया मॉनिटरिंग सेल को सक्रिय कर दिया गया है। फेसबुक, एक्स (पूर्व में ट्विटर), इंस्टाग्राम और वॉट्सऐप ग्रुप्स पर प्रसारित होने वाले भड़काऊ, आपत्तिजनक और भ्रामक संदेशों पर तकनीकी टीमों द्वारा लगातार निगरानी रखी जा रही है। डीजीपी ने स्पष्ट किया है कि त्योहारों की आड़ में सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने या अफवाह फैलाने की कोशिश करने वालों पर आईटी एक्ट और सुसंगत आपराधिक धाराओं के तहत बिना किसी देरी के सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस कप्तानों को निर्देश दिया गया है कि वे स्थानीय शांति समितियों और डिजिटल वॉलंटियर्स के साथ लगातार संवाद बनाए रखें ताकि अफवाहों का तत्काल खंडन किया जा सके।

महत्वपूर्ण रेलवे स्टेशनों, बस अड्डों और बॉर्डर पर चेकिंग अभियान

त्योहारों पर लाखों यात्रियों की सुगम और सुरक्षित यात्रा के लिए जीआरपी और आरपीएफ के साथ समन्वय स्थापित कर रेलवे स्टेशनों, बस टर्मिनलों और प्रमुख टैक्सी स्टैंडों पर सघन चेकिंग अभियान शुरू किया गया है। मेटल डिटेक्टर, डॉग स्क्वॉड और सीसीटीवी कैमरों की मदद से 24 घंटे संदिग्ध व्यक्तियों व लावारिस वस्तुओं की जांच की जा रही है। इसके अतिरिक्त दूसरे राज्यों और जनपदों से जुड़ने वाले प्रमुख बॉर्डरों पर बैरियर लगाकर चौबीसों घंटे वाहनों की रैंडम चेकिंग की जा रही है ताकि किसी भी प्रकार के अवैध हथियार, शराब या अवांछित तत्वों के प्रवेश को पूरी तरह रोका जा सके। स्थानीय होटल, धर्मशाला और लॉज संचालकों को भी रुकने वाले प्रत्येक व्यक्ति का पहचान पत्र अनिवार्य रूप से दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं।

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