विंध्य-पूर्वांचल एक्सप्रेसवे निर्माण पकड़ेगा रफ्तार: भूमि अधिग्रहण के लिए ₹2800 करोड़ की भारी-भरकम राशि जारी

उत्तर प्रदेश के विंध्य क्षेत्र को प्रदेश के मुख्य सड़क तंत्र और औद्योगिक गलियारों से सीधे जोड़ने की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाते हुए शासन ने बहुप्रतीक्षित विंध्य-पूर्वांचल लिंक एक्सप्रेसवे के लिए भूमि अधिग्रहण मद में ₹2800 करोड़ की विशाल वित्तीय धनराशि जारी कर दी है। मुख्यमंत्री के विजन के अनुरूप तैयार किए जा रहे इस हाई-स्पीड ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे का प्राथमिक उद्देश्य मां विंध्यवासिनी की पावन धरा विंध्याचल, मिर्जापुर, सोनभद्र और भदोही जैसे जिलों को पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के माध्यम से सीधे प्रदेश की राजधानी लखनऊ और देश की राजधानी दिल्ली से निर्बाध गति से जोड़ना है। उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवेज औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) द्वारा इस परियोजना की विस्तृत कार्ययोजना को अंतिम रूप दिया जा चुका है और बजट का आवंटन होते ही संबंधित जनपदों के जिला प्रशासनों को जमीन की खरीद-फरोख्त और पारदर्शी अधिग्रहण प्रक्रिया को रिकॉर्ड समय में पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। इस विशाल बजटीय सहयोग से वर्षों से प्रतीक्षारत इस महत्वाकांक्षी परियोजना के जमीनी क्रियान्वयन में अभूतपूर्व तेजी देखने को मिलेगी, जिससे समूचे पूर्वी और दक्षिणी उत्तर प्रदेश के आधारभूत ढांचे की तस्वीर बदल जाएगी।

भूमि अधिग्रहण के लिए ₹2800 करोड़ की पहली बड़ी किस्त जारी

परियोजना को गति देने के लिए जारी की गई ₹2800 करोड़ की यह धनराशि सीधे तौर पर प्रभावित गांवों के किसानों और भूमि स्वामियों से पारदर्शी तरीके से जमीन खरीदने पर व्यय की जाएगी। यूपीडा के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, एक्सप्रेसवे के अलाइनमेंट में आने वाले समस्त राजस्व ग्रामों में जमीन के सर्वेक्षण और सीमांकन का कार्य ड्रोन व सैटेलाइट मैपिंग के जरिए पहले ही पूरा किया जा चुका है। अब इस जारी फंड के माध्यम से सर्किल रेट और तय नियमों के आधार पर भूमि स्वामियों के बैंक खातों में डीबीटी (प्रत्यक्ष लाभ अंतरण) प्रणाली के तहत मुआवजा राशि सीधे अंतरित की जाएगी। शासन ने सभी संबंधित जिलाधिकारियों को स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि भूमि अधिग्रहण के दौरान किसी भी प्रकार की प्रशासनिक शिथिलता, बिचौलियों की दखलअंदाजी या किसानों के उत्पीड़न को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। संबंधित तहसीलों में विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारियों की तैनाती कर कैंप मोड में बैनामे की रजिस्ट्री करवाई जाएगी ताकि निर्धारित समयावधि के भीतर निर्माण एजेंसियों को क्लीयर लैंड हैंडओवर किया जा सके।

मिर्जापुर, भदोही, वाराणसी और चंदौली के सैकड़ों गांवों को सीधा लाभ

विंध्य-पूर्वांचल लिंक एक्सप्रेसवे का रूट चार्ट इस प्रकार डिजाइन किया गया है कि यह सोनभद्र के औद्योगिक खनिज अंचल और मिर्जापुर के पहाड़ी इलाकों से शुरू होकर भदोही, वाराणसी के सीमावर्ती क्षेत्रों और गाजीपुर के नजदीक पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से जुड़ेगा। इस रूट के दायरे में आने वाले लगभग 150 से अधिक ग्रामीण क्षेत्रों में विकास की नई धारा बहेगी। वर्तमान में मिर्जापुर, सोनभद्र और आसपास के जिलों से लखनऊ अथवा पूर्वांचल एक्सप्रेसवे तक पहुंचने के लिए संकरे राज्य मार्गों और भारी जाम से जूझना पड़ता है, जिसमें 6 से 8 घंटे तक का समय व्यर्थ हो जाता है। इस नए एक्सेस-कंट्रोल्ड ग्रीनफील्ड मार्ग के अस्तित्व में आने के बाद यह सफर घटकर महज 3 से 4 घंटे का रह जाएगा। ग्रामीण क्षेत्रों में एक्सप्रेसवे के दोनों तरफ सर्विस लेन का निर्माण भी किया जाएगा, जिससे क्षेत्रीय किसानों को अपनी कृषि उपज, सब्जियां और दुग्ध उत्पाद नजदीकी बड़ी मंडियों तक पहुंचाने में भारी सहूलियत मिलेगी और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी का कायाकल्प होगा।

धार्मिक पर्यटन और मां विंध्यवासिनी धाम तक पहुंच होगी बेहद सुगम

यह परियोजना केवल एक सड़क मार्ग नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन को नई ऊंचाई देने वाला महामार्ग साबित होने जा रही है। मिर्जापुर स्थित सुप्रसिद्ध शक्तिपीठ मां विंध्यवासिनी धाम में हाल ही में भव्य विंध्य कॉरिडोर का निर्माण संपन्न हुआ है, जिसके बाद से देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में कई गुना बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इस लिंक एक्सप्रेसवे के जरिए प्रयागराज महाकुंभ क्षेत्र, काशी विश्वनाथ धाम (वाराणसी) और विंध्य धाम के बीच एक स्वर्णिम त्रिकोण स्थापित होगा। बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश और दिल्ली-एनसीआर से आने वाले तीर्थयात्री अब बिना किसी शहरी ट्रैफिक जाम में फंसे सीधे एक्सप्रेसवे की रफ्तार पकड़कर विंध्याचल पहुंच सकेंगे। इसके साथ ही चुनार का ऐतिहासिक किला, अहरौरा, लखनिया दरी, सिरसी जलप्रपात और सोनभद्र के प्राकृतिक पर्यटन स्थलों पर इको-टूरिज्म और हेरिटेज टूरिज्म को पंख लगेंगे, जिससे स्थानीय स्तर पर होटल, होमस्टे, रेस्टोरेंट और टूरिज्म गाइड जैसे सेवा क्षेत्रों में हजारों युवाओं को रोजगार के नए अवसर प्राप्त होंगे।

स्थानीय कालीन उद्योग, खनिज व्यापार और लॉजिस्टिक्स को मिलेगा नया जीवन

आर्थिक दृष्टि से यह एक्सप्रेसवे भदोही के विश्वविख्यात हस्तनिर्मित कालीन उद्योग (कार्पेट हब), मिर्जापुर के पीतल उद्योग व सैंडस्टोन व्यापार और सोनभद्र के कोयला, सीमेंट व बिजली उत्पादन क्षेत्रों के लिए लाइफलाइन साबित होगा। भदोही से विदेशों को निर्यात होने वाले उच्च गुणवत्ता वाले कालीनों को बंदरगाहों या दिल्ली-मुंबई के कार्गो हब तक भेजने के लिए अभी भारी मालवाहक ट्रकों को घंटों जाम में फंसना पड़ता है, जिससे ढुलाई भाड़ा बढ़ता है। इस आधुनिक एक्सप्रेसवे पर 100 से 120 किमी प्रति घंटे की नियंत्रित रफ्तार से मालवाहक दौड़ सकेंगे, जिससे माल ढुलाई का खर्च (लॉजिस्टिक्स कॉस्ट) लगभग 20 से 30 प्रतिशत तक कम होने का अनुमान है। यूपीडा द्वारा एक्सप्रेसवे के किनारे महत्वपूर्ण इंटरचेंज पॉइंट्स पर अत्याधुनिक लॉजिस्टिक्स पार्क, वेयरहाउसिंग हब, कोल्ड स्टोरेज और औद्योगिक नोड्स (इंडस्ट्रियल क्लस्टर्स) विकसित करने की भी योजना है, जहां बहुराष्ट्रीय कंपनियां अपनी निर्माण इकाइयां स्थापित करने के लिए आकर्षित होंगी।

किसानों को तय समयसीमा में मिलेगा पारदर्शी व आकर्षक मुआवजा पैकेज

राज्य सरकार ने किसानों के हितों की रक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए स्पष्ट किया है कि विंध्य-पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के दायरे में आने वाली निजी कृषि भूमि के स्वामियों को भूमि अधिग्रहण अधिनियम के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में सर्किल रेट का चार गुना तक मुआवजा उपलब्ध कराया जाएगा। आपसी सहमति के आधार पर जमीन देने वाले किसानों को त्वरित रजिस्ट्री के साथ विशेष प्रोत्साहन राशि भी दी जाएगी। मुआवजा वितरण प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और डिजिटल बनाने के लिए एक विशेष ऑनलाइन पोर्टल भी सक्रिय किया जा रहा है, जहां किसान अपनी जमीन का रकबा, गाटा संख्या और मिलने वाले मुआवजे का पूरा विवरण स्वयं देख सकेंगे। यदि किसी किसान की परिसंपत्ति, नलकूप, पक्के मकान अथवा वृक्ष अधिग्रहण क्षेत्र में आते हैं, तो उनका पीडब्ल्यूडी और वन विभाग के मानकों के अनुसार अतिरिक्त पारदर्शी मूल्यांकन कर शत-प्रतिशत भुगतान सीधे बैंक खाते में सुनिश्चित किया जाएगा।

आधुनिक इंजीनियरिंग और एक्सेस-कंट्रोल्ड ग्रीनफील्ड मार्ग की प्रमुख विशेषताएं

विंध्य-पूर्वांचल एक्सप्रेसवे का निर्माण अत्याधुनिक 4-लेन के रूप में शुरू किया जाएगा, जिसे भविष्य में यातायात का दबाव बढ़ने पर सुगमता से 6-लेन तक विस्तारित करने का स्ट्रक्चरल प्रावधान रखा गया है। यह पूरी तरह से एक एक्सेस-कंट्रोल्ड एक्सप्रेसवे होगा, जिसका अर्थ है कि आवारा मवेशियों, अप्रत्याशित वाहनों या राहगीरों के अचानक मुख्य मार्ग पर आने से रोकने के लिए दोनों तरफ मजबूत कंक्रीट अथवा स्टील क्रैश बैरियर की फेंसिंग की जाएगी। एक्सप्रेसवे पर सफर को अत्यधिक सुरक्षित और आरामदायक बनाने के लिए एडवांस ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (एटीएमएस), हाई-डेफिनिशन पीटीजेड कैमरे, स्पीड डिटेक्शन रडार, इमरजेंसी कॉल बॉक्स और वेरिएबल मैसेज साइन बोर्ड्स लगाए जाएंगे। हर 40 से 50 किलोमीटर की दूरी पर विश्वस्तरीय वे-साइड एमेनिटीज (मार्ग किनारे जनसुविधाएं) विकसित होंगी, जहां पेट्रोल पंप, इलेक्ट्रिक व्हीकल (ईवी) चार्जिंग स्टेशन, फूड कोर्ट, मेडिकल ट्रामा सेंटर और बच्चों के खेल क्षेत्र की पूरी सुविधा उपलब्ध रहेगी।

एक्सप्रेसवे नेटवर्क से तेजी से बदलेगी पूर्वांचल की आर्थिक तस्वीर

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा पिछले कुछ वर्षों में बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे, पूर्वांचल एक्सप्रेसवे, गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे और निर्माणाधीन गंगा एक्सप्रेसवे के जरिए पूरे राज्य में जो एक्सप्रेसवे का जाल बिछाया गया है, विंध्य-पूर्वांचल लिंक एक्सप्रेसवे उसमें एक अत्यंत रणनीतिक कड़ी को जोड़ेगा। इस कनेक्टिविटी के पूरा होते ही विंध्य क्षेत्र की दशकों पुरानी भौगोलिक दूरी समाप्त हो जाएगी और यह इलाका सीधे राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्गों से जुड़ जाएगा। ₹2800 करोड़ की पूंजी का प्रवाह स्थानीय अर्थव्यवस्था में नई तरलता और ऊर्जा लाएगा, जिससे न सिर्फ जमीन के दाम बढ़ेंगे बल्कि एक्सप्रेसवे के समीपवर्ती छोटे कस्बों और नगरों में आधुनिक रियल एस्टेट, आधुनिक स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षण संस्थान और व्यावसायिक केंद्र तेजी से उभरेंगे।

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