
सुबह की शुरुआत ताजगी और ऊर्जा के साथ होनी चाहिए, लेकिन कई लोगों के लिए दिन की शुरुआत दर्दभरे अहसास से होती है। जैसे ही वे रात की नींद के बाद बिस्तर से उठकर फर्श पर पहला कदम रखते हैं, एड़ी या तलवों के बीच में ऐसा तेज खिंचाव या चुभन महसूस होती है मानो कोई कील चुभ गई हो। कुछ कदम चलने के बाद यह दर्द थोड़ा हल्का जरूर पड़ जाता है, मगर कुर्सी पर कुछ देर बैठने के बाद दोबारा उठने पर वही तकलीफ लौट आती है। लखनऊ, कानपुर, दिल्ली और अन्य प्रमुख शहरों के आर्थोपेडिक और फिजियोथेरेपी क्लीनिकों में हर उम्र के लोग, विशेषकर महिलाएं और खड़े होकर काम करने वाले प्रोफेशनल्स, इस समस्या को लेकर पहुंच रहे हैं। चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि यह केवल सामान्य थकान नहीं है, बल्कि पैरों के अंदरूनी लिगामेंट्स और मांसपेशियों में आई गंभीर सूजन का नतीजा हो सकता है।
प्लांटर फैसीसाइटिस: सुबह के तलवे दर्द की सबसे बड़ी वजह
सुबह उठते ही तलवों में होने वाले दर्द का सबसे आम कारण ‘प्लांटर फैसीसाइटिस’ (Plantar Fasciitis) है। हमारे पैर के निचले हिस्से में एड़ी की हड्डी से लेकर उंगलियों के बेस तक एक मोटा, रबर जैसा रेशेदार ऊतक (Tissue) फैला होता है, जिसे प्लांटर प्रावरणी (Plantar Fascia) कहा जाता है। यह टिशू पैर के आर्च को सहारा देता है और चलते-दौड़ते समय शॉक एब्जॉर्बर का काम करता है। रात में जब हम सोते हैं, तो यह टिशू सुकड़कर ठंडा हो जाता है। सुबह जब अचानक बिना वार्मअप के शरीर का पूरा वजन इस पर पड़ता है, तो इसमें खिंचाव आ जाता है और तेज दर्द पैदा होता है। कुछ देर चलने-फिरने से जब टिशू थोड़ा गर्म और लचीला होता है, तो दर्द हल्का पड़ जाता है, लेकिन शाम ढलते ही फिर बढ़ सकता है।
यूरिक एसिड और हील स्पर भी हो सकते हैं जिम्मेदार
तलवे और एड़ी के दर्द के पीछे सिर्फ लिगामेंट का खिंचाव ही एकमात्र कारण नहीं है। शरीर में यूरिक एसिड का स्तर बढ़ना भी एक प्रमुख वजह है। जब रक्त में यूरिक एसिड की मात्रा अनियंत्रित हो जाती है, तो इसके नुकीले क्रिस्टल जोड़ों और एड़ी के आसपास जमा होने लगते हैं, जिससे भयंकर चुभन और लालिमा हो जाती है। इसके अलावा, यदि प्लांटर फैसीसाइटिस का इलाज लंबे समय तक न कराया जाए, तो एड़ी की हड्डी के निचले हिस्से पर कैल्शियम जमा होने लगता है, जिसे ‘हील स्पर’ (Heel Spur) कहते हैं। यह नुकीली हड्डी जैसी बनावट जब भी जमीन से टकराती है, असहनीय दर्द देती है। विटामिन डी3 और विटामिन बी12 की भारी कमी भी नसों में कमजोरी और पैरों के तलवों में लगातार दर्द या जलन पैदा करती है।
खराब फुटवियर और फर्श पर नंगे पैर चलने की आदत
अक्सर लोग घर के फर्श पर नंगे पैर चलते हैं या फिर बाहर निकलते समय बिल्कुल फ्लैट, पतले तलवे वाली चप्पलें और जूते पहनते हैं। मार्बल, टाइल्स या सीमेंट के सख्त फर्श पर बिना किसी कुशन के चलने से एड़ियों और तलवों के आर्च पर सीधा झटका लगता है। जिन लोगों के पैर ‘फ्लैट फुट’ (सपाट तलवे) वाले होते हैं, उनका वजन तलवे पर समान रूप से नहीं बंटता, जिससे प्लांटर प्रावरणी पर लगातार अतिरिक्त खिंचाव बना रहता है। महिलाओं में टाइट सैंडल या पेंसिल हील्स पहनने की आदत, और रसोई या दुकान में बिना ब्रेक लिए घंटों खड़े रहने से भी तलवों के टिश्यूज पर अत्यधिक दबाव पड़ता है।
वजन का बढ़ना और अचानक भारी वर्कआउट शुरू करना
शरीर के वजन का सीधा असर पैरों के तलवों पर पड़ता है। यदि हाल के महीनों में आपका वजन तेजी से बढ़ा है, तो पैरों की छोटी मांसपेशियों को इस अतिरिक्त भार को संभालने में मशक्कत करनी पड़ती है। इसी तरह, जो लोग बिना स्ट्रेचिंग के अचानक दौड़ना, कूदना या भारी वजन उठाना शुरू कर देते हैं, उनके पैरों की मांसपेशियां चोटिल हो जाती हैं। डिलीवरी के बाद महिलाओं में भी यह समस्या काफी आम देखी जाती है, क्योंकि वजन बढ़ने और शरीर के हार्मोनल बदलावों के कारण पैरों के लिगामेंट्स ढीले और कमजोर पड़ जाते हैं।
बिस्तर से उतरने से पहले अपनाएं ये आसान स्ट्रेचिंग
अगर आपको सुबह उठते ही यह दर्द सताता है, तो बिस्तर से तुरंत फर्श पर पैर रखने की गलती न करें। उठने से पहले बिस्तर पर बैठकर ही अपने पैरों के पंजों को 10-15 बार अपनी तरफ और फिर बाहर की तरफ घुमाएं। एक तौलिया या दुपट्टा लेकर उसे पंजे के नीचे फंसाएं और घुटने को सीधा रखते हुए दोनों सिरों को अपनी ओर खींचें। इस खिंचाव को 20 से 30 सेकंड तक रोककर रखें। इसके बाद, पैर के तलवे के नीचे एक छोटी पानी की बोतल या टेनिस बॉल रखकर उसे आगे-पीछे 2 मिनट तक रोल करें। ऐसा करने से तलवे के टिश्यूज में ब्लड सर्कुलेशन सुधर जाता है और सुबह का पहला कदम रखते वक्त तेज चुभन महसूस नहीं होती।
घरेलू उपाय और जीवनशैली में जरूरी बदलाव
इस दर्द से स्थायी राहत पाने के लिए कुछ सामान्य लेकिन बेहद प्रभावी उपाय अपनाए जा सकते हैं। दिन में दो बार प्लास्टिक की बोतल में पानी जमाकर (बर्फ बनाकर) उसे कपड़े में लपेटें और तलवों के नीचे 10 मिनट तक रोल करें; यह बर्फ की सिकाई अंदरूनी सूजन को तेजी से कम करती है। घर के अंदर कभी भी नंगे पैर न चलें; हमेशा सॉफ्ट ऑर्थोपेडिक या मेमोरी फोम वाले इनडोर स्लिपर्स पहनें। अपने जूतों में आर्च सपोर्ट वाले इनसोल का प्रयोग करें ताकि वजन संतुलित रहे। आहार में प्यूरीन युक्त खाद्य पदार्थ, अत्यधिक जंक फूड और मीठे पेय पदार्थों को सीमित करें ताकि यूरिक एसिड नियंत्रित रहे, और दूध, धूप तथा ताजे फलों के जरिए कैल्शियम और विटामिन्स की मात्रा बढ़ाएं।
कब आवश्यक हो जाता है डॉक्टर से मिलना?
यदि घरेलू देखभाल, स्ट्रेचिंग और जूते बदलने के बावजूद दर्द दो हफ्तों से अधिक समय तक लगातार बना रहे, या फिर एड़ी में सूजन, लालिमा और गर्माहट महसूस हो, तो इसे हल्के में न लें। आर्थोपेडिक सर्जन से संपर्क करके एक्स-रे या ब्लड टेस्ट (यूरिक एसिड व विटामिन प्रोफाइल) कराना चाहिए। समय पर फिजियोथेरेपी, नाइट स्प्लिंट्स या आवश्यक दवाओं की मदद से प्लांटर फैसीसाइटिस को पूरी तरह ठीक किया जा सकता है। याद रखें, पैर आपके पूरे शरीर की नींव हैं; यदि नींव में दर्द हो, तो पूरे शरीर का ढांचा प्रभावित हो सकता है।
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