नई दिल्ली (डिजिटल डेस्क): सुबह की गरमा-गरम चाय से लेकर रात के स्वादिष्ट डिनर तक, हमारे पूरे परिवार की सेहत का रास्ता घर की रसोई (किचन) से होकर ही गुजरता है। हम अक्सर बाजार से सबसे महंगी और ताजी सब्जियां खरीदने, शुद्ध मसाले चुनने और साफ-सफाई से खाना पकाने पर पूरा जोर देते हैं। लेकिन क्या आपने कभी गौर किया है कि जिस बर्तन में खाना पक रहा है या जिस डिब्बे में उसे स्टोर किया जा रहा है, वह आपकी सेहत के लिए कितना सुरक्षित है?
असुरक्षित खान-पान और किचन की लापरवाही के कारण होने वाली बीमारियों से दुनिया को हर साल करीब 310 अरब अमेरिकी डॉलर का भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। यही वजह है कि भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) से लेकर बड़े-बड़े स्वास्थ्य विशेषज्ञ अब सिर्फ खाने की क्वालिटी पर नहीं, बल्कि किचन के पूरे वातावरण (Ecosystem) पर ध्यान देने की सलाह दे रहे हैं।
आइए जानते हैं देश के जाने-माने डॉक्टरों से कि हमारी रसोई में रोजमर्रा की वो कौन सी छोटी-छोटी गलतियां हैं, जो सेहतमंद खाने को भी दूषित कर रही हैं।
रसोई की ये 5 आम गलतियां जो धीरे-धीरे आपको बना रही हैं बीमार
1. चॉपिंग बोर्ड की अधूरी सफाई (Cross-Contamination)
सब्जियां या मीट काटने के लिए आजकल हर घर में चॉपिंग बोर्ड का इस्तेमाल होता है, लेकिन यह बैक्टीरिया का सबसे बड़ा घर बन सकता है।
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बड़ी भूल: अक्सर लोग एक ही चॉपिंग बोर्ड पर कच्चा मांस या सब्जियां काटने के बाद, उसे बिना अच्छी तरह सैनिटाइज या डीप-क्लीन किए दूसरी खाद्य सामग्री काट लेते हैं। इससे बोर्ड पर मौजूद खतरनाक बैक्टीरिया (जैसे साल्मोनेला या ई-कोलाई) सीधे पके हुए भोजन में ट्रांसफर हो जाते हैं।
2. कीटाणुओं का घर बना ‘बर्तन साफ करने वाला स्पंज’
किचन सिंक में रखा स्पंज या डिशवॉश ब्रश बाहर से भले ही साफ दिखे, लेकिन वह सेहत का सबसे बड़ा दुश्मन हो सकता है।
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बड़ी भूल: लगातार नमी और गीलेपन के कारण स्पंज के भीतर लाखों कीटाणु और फंगस पनपने लगते हैं। यदि इस स्पंज को समय-समय पर बदला या उबलते पानी से साफ न किया जाए, तो बर्तनों को साफ करने के बजाय यह उन पर अदृश्य बैक्टीरिया की परत चढ़ा देता है।
3. एक ही तेल को बार-बार गर्म करना (Reheating Oil)
बचे हुए तेल को दोबारा इस्तेमाल करना भारतीय रसोई की एक बहुत आम आदत है, जो बेहद जानलेवा साबित हो सकती है।
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असर: जब तेल को बार-बार तेज आंच पर गर्म किया जाता है, तो उसमें ‘फ्री रेडिकल्स’ और ‘ट्रांस फैट’ की मात्रा अत्यधिक बढ़ जाती है। ऐसा तेल दिल की बीमारियों, हाई कोलेस्ट्रॉल और एसिडिटी का मुख्य कारण बनता है।
4. अम्लीय भोजन (Acidic Food) और गलत बर्तनों का तालमेल
भारतीय व्यंजनों में टमाटर, नींबू, दही, इमली और तेज मसालों का भरपूर उपयोग होता है, जो अम्लीय (Acidic) प्रकृति के होते हैं।
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असर: जयपुर के अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल के इंटरनल मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. रोहित शर्मा बताते हैं कि जब ये अम्लीय पदार्थ लगातार कम गुणवत्ता वाले बर्तनों या प्लास्टिक के संपर्क में आते हैं, तो केमिकल रिएक्शन होने लगता है। बर्तनों की सतह खराब होने से उनमें सूक्ष्म बैक्टीरिया अपनी जगह बना लेते हैं, जो पेट की गंभीर बीमारियों की वजह बनते हैं।
5. फल-सब्जियों को धोने में लापरवाही
बाजार से आने वाली फल और सब्जियों पर कई तरह के कीटनाशक (Pesticides) और धूल-मिट्टी चिपकी होती है। इन्हें केवल पानी के नीचे एक बार घुमाकर पका लेना पर्याप्त नहीं है। इन्हें कुछ देर पानी में भिगोकर और रगड़कर धोना बेहद जरूरी है।
डॉक्टरों की सलाह: सेहत के लिए कौन सा बर्तन है सबसे बेस्ट?
दिल्ली के श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टीट्यूट के डायरेक्टर डॉ. अरविंद अग्रवाल के अनुसार, आज के समय में फूड सेफ्टी को एक विज्ञान की तरह देखा जाना चाहिए। भोजन पकाने और रखने वाली सतहों का हमारी सेहत से सीधा संबंध है।
स्टेनलेस स्टील है सबसे सुरक्षित विकल्प: डॉ. अग्रवाल सुझाव देते हैं कि भारतीय रसोई के लिए स्टेनलेस स्टील (Stainless Steel) के बर्तनों का उपयोग सबसे सर्वोत्तम और सुरक्षित विकल्प है। इसके मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
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यह धातु अत्यधिक मजबूत होती है और तेज आंच पर भी रसायनों को भोजन में नहीं छोड़ती।
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इसमें जंग (Rust) लगने या स्क्रैच आने का खतरा न के बराबर होता है।
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इसकी सतह को साफ करना बेहद आसान होता है, जिससे बैक्टीरिया को पनपने की जगह नहीं मिलती।
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