
राजस्थान के बाड़मेर जिले के पचपदरा में निर्माणाधीन हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) राजस्थान रिफाइनरी प्रोजेक्ट में इंजीनियरिंग का एक अभूतपूर्व और ऐतिहासिक नजारा देखने को मिल रहा है। गुजरात के मुंद्रा पोर्ट से महीनों का लंबा, चुनौतीपूर्ण और जटिल जमीनी सफर तय करके पहुंचा विशालकाय इंडस्ट्रियल रिएक्टर अब अपने अंतिम गंतव्य यानी रिफाइनरी साइट पर पूरी तरह पहुंच चुका है। सैकड़ों टन वजनी इस महाकाय उपकरण को 308 पहियों वाले विशेष हाइड्रोलिक एक्सल ट्रेलर से सुरक्षित नीचे उतारने और इसे निर्धारित फाउंडेशन पर स्थापित करने के लिए एक हाई-स्टेक अनलोडिंग ऑपरेशन शुरू किया गया है।
इस संवेदनशील और विशाल ऑपरेशन को सफलतापूर्वक अंजाम देने के लिए 12 हाई-कैपेसिटी हेवी-ड्यूटी क्रेन, अत्याधुनिक हाइड्रोलिक जैकिंग सिस्टम और 250 से अधिक वरिष्ठ मैकेनिकल इंजीनियरों, सुरक्षा विशेषज्ञों व तकनीकी श्रमिकों का विशाल अमला 24 घंटे मुस्तैद है। परियोजना स्थल पर सुरक्षा के बेहद कड़े इंतजामात किए गए हैं, ताकि मिलीमीटर की सटीकता के साथ इस विशालकाय ढांचे को जमीन पर उतारा जा सके।
मुंद्रा से पचपदरा तक का सफर: सड़कों और पुलों की हुई थी विशेष इंजीनियरिंग
इस रिएक्टर का सड़क मार्ग से परिवहन अपने आप में देश के सबसे बड़े लॉजिस्टिक्स ऑपरेशनों में से एक रहा है। गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह से बाड़मेर के पचपदरा तक की दूरी तय करने में इस विशाल काफिले को कई महीनों का समय लगा। इस दौरान सैकड़ों किलोमीटर लंबे रूट पर बिजली के हाई-टेंशन तारों को अस्थाई रूप से ऊंचा किया गया, कई जगह सड़कों को चौड़ा किया गया और कमजोर पुलों को सहारा देने के लिए अतिरिक्त बाईपास व अस्थायी स्टील स्ट्रक्चर तैयार किए गए।
308 पहियों वाले इस विशेष मल्टी-एक्सल हाइड्रोलिक मॉड्यूलर ट्रेलर (Goldhofer/Hydraulic Puller) की विशेषता यह है कि यह भारी-भरकम वजन को सभी पहियों पर समान रूप से वितरित करता है, जिससे सड़क धंसने या पलटने का जोखिम पूरी तरह समाप्त हो जाता है। पूरे सफर के दौरान ट्रेलर की रफ्तार महज 5 से 10 किलोमीटर प्रति घंटा रखी गई थी, जहां आगे-पीछे पायलट गाड़ियां, तकनीकी टीमें और आपातकालीन बैकअप वाहन साथ-साथ चल रहे थे।
कैसे उतारा जाएगा सैकड़ों टन का यह विशाल रिएक्टर? जानिए पूरी तकनीक
इतने विशाल और भारी उपकरण को ट्रेलर से उतारना किसी क्रेन से साधारण सामान उठाने जैसा नहीं होता। इसके लिए ‘टैंडम लिफ्टिंग’ (Tandem Lifting) और ‘हाइड्रोलिक जैकिंग व स्लाइडिंग’ (Skidding System) की उन्नत तकनीकों का समन्वय किया जा रहा है:
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12 क्रेन और जैकिंग सिस्टम का संयुक्त जाल: अनलोडिंग पॉइंट पर विभिन्न क्षमताओं वाली 12 हेवी-ड्यूटी क्रेन तैनात की गई हैं, जिनमें मुख्य रूप से 500 से 1000 टन क्षमता वाली विशाल क्रॉलर व टेलीस्कोपिक क्रेन शामिल हैं। इन क्रेन और विशेष हाइड्रोलिक स्ट्रैंड जैक को कंप्यूटर नियंत्रित सेंसर से जोड़ा गया है।
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मिलीमीटर लेवल पर लोड बैलेंसिंग: रिएक्टर के चारों कोनों पर विशेष लिफ्टिंग लग्स (Lifting Lugs) लगाए गए हैं। क्रेन ऑपरेटर वायरलेस रेडियो और डिजिटल लोड-मॉनिटरिंग सिस्टम के जरिए एक साथ, एक समान गति से खिंचाव पैदा करते हैं, ताकि रिएक्टर का संतुलन एक डिग्री भी न बिगड़े।
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ट्रेलर को नीचे से बाहर निकालना: हाइड्रोलिक जैक की मदद से पहले रिएक्टर को ट्रेलर के प्लेटफॉर्म से कुछ इंच ऊपर उठाया जाता है। इसके बाद ट्रेलर को बेहद धीमी गति से आगे खींचकर पूरी तरह बाहर निकाल लिया जाता है।
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स्लाइडिंग बीम्स पर धीमी लैंडिंग: ट्रेलर हटने के बाद नीचे भारी स्टील गर्डर और कंक्रीट सपोर्ट लगाए जाते हैं, जिन पर रिएक्टर को धीरे-धीरे मिलीमीटर-दर-मिलीमीटर नीचे उतारा जाता है।
250 से ज्यादा विशेषज्ञों की टीम, सुरक्षा के सख्त प्रोटोकॉल
इस पूरे अनलोडिंग अभियान के दौरान कार्यस्थल पर 250 से अधिक कर्मियों की समर्पित टीम तैनात है। इनमें एचपीसीएल और एलएंडटी (L&T) जैसी शीर्ष इंजीनियरिंग कंपनियों के हेवी-लिफ्ट कंसल्टेंट्स, रिगिंग सुपरवाइजर्स, हाइड्रोलिक तकनीशियन और स्ट्रक्चरल इंजीनियर शामिल हैं। सुरक्षा के लिहाज से अनलोडिंग क्षेत्र के चारों तरफ आधा किलोमीटर के दायरे में बैरिकेडिंग कर दी गई है और गैर-जरूरी आवाजाही पूरी तरह प्रतिबंधित है।
हवा की गति और दिशा पर लगातार नजर रखने के लिए डिजिटल एनीमोमीटर लगाए गए हैं। मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के तहत यदि हवा की गति निर्धारित सीमा से अधिक होती है, तो ऑपरेशन को तुरंत रोक दिया जाता है। प्रत्येक कदम की कंप्यूटर सिमुलेशन के जरिए पहले ही वर्चुअल टेस्टिंग की जा चुकी है, जिससे वास्तविक निष्पादन के दौरान किसी भी अप्रत्याशित तकनीकी खराबी या मानवीय त्रुटि की गुंजाइश शून्य रहे।
बाड़मेर रिफाइनरी के लिए क्यों इतना महत्वपूर्ण है यह रिएक्टर?
पचपदरा में स्थापित हो रही यह पेट्रोकेमिकल रिफाइनरी राजस्थान के आर्थिक और औद्योगिक परिदृश्य को बदलने वाली ऐतिहासिक परियोजना है। यह विशाल रिएक्टर रिफाइनरी की कोर प्रोसेसिंग यूनिट का मुख्य अंग है, जहां कच्चे तेल को रिफाइन कर पेट्रोल, डीजल, एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) के साथ-साथ पॉलिमर और अन्य मूल्यवान पेट्रोकेमिकल उत्पादों में बदला जाएगा। इस भारी उपकरण की सफल अनलोडिंग और इसके बाद होने वाली स्थापना (Erection) रिफाइनरी को चालू करने की दिशा में एक बहुत बड़ा मील का पत्थर मानी जा रही है। इस रिएक्टर की स्थापना के बाद रिफाइनरी के मुख्य प्लांट की पाइपिंग, इलेक्ट्रिकल और ऑटोमेशन ग्रिड से कनेक्टिविटी का काम तेजी से आगे बढ़ सकेगा।
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