हजारों प्रदर्शनकारियों और नेताओं की हिरासत पर जताई गहरी चिंता; शांतिपूर्ण सभा के अधिकार की वकालत

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) के इस्तीफे और मतदाता सूची विवाद को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) तथा विपक्षी दलों के प्रस्तावित प्रदर्शन पर दिल्ली पुलिस की सख्त कार्रवाई का मामला अब अंतरराष्ट्रीय पटल पर पहुंच गया है। शनिवार को राजधानी को छावनी में तब्दील करने, 45 से अधिक मेट्रो स्टेशनों को बंद करने और CJP संस्थापक अभिजीत दीपके समेत 7,000 से अधिक प्रदर्शनकारियों व नेताओं को हिरासत में लिए जाने की घटनाओं पर संयुक्त राष्ट्र (United Nations) ने औपचारिक चिंता जताई है।

UN मानवाधिकार कार्यालय (OHCHR) ने क्या कहा?

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय (OHCHR) के प्रवक्ता थमीन अल-खीतान (Thameen Al-Kheetan) ने नई दिल्ली के घटनाक्रम पर आधिकारिक बयान जारी करते हुए कहा:

  • सामूहिक हिरासत पर चिंता: संयुक्त राष्ट्र भारत में शनिवार को शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल होने जा रहे हजारों नागरिकों, छात्र कार्यकर्ताओं, राजनीतिक नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं की सामूहिक हिरासत (Mass Detentions) की खबरों से चिंतित है।

  • शांतिपूर्ण सभा और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता: यूएन ने रेखांकित किया कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता (Freedom of Expression) और शांतिपूर्ण सभा का अधिकार (Right to Peaceful Assembly) किसी भी जीवंत लोकतंत्र के अनिवार्य मूल तत्व हैं। नागरिकों को लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं, संस्थाओं या नीतियों पर अपनी शांतिपूर्ण असहमति व्यक्त करने का अधिकार मिलना चाहिए।

  • समानुपातिक बल और संयम की अपील: संयुक्त राष्ट्र ने प्रशासन और सुरक्षा बलों से अपील की कि वे प्रदर्शनों से निपटने में संयम बरतें और केवल उतनी ही कानूनी शक्ति का इस्तेमाल करें जो कानून-व्यवस्था के लिहाज से अनिवार्य और समानुपातिक (Proportionate) हो। साथ ही यह भी दोहराया गया कि हिरासत में लिए गए लोगों के साथ अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार मानकों के अनुरूप मानवीय व्यवहार किया जाना चाहिए।

आंतरिक एडवाइजरी के बाद आया औपचारिक रुख

उल्लेखनीय है कि 10 अक्टूबर के इस प्रदर्शन से ठीक पहले संयुक्त राष्ट्र के दिल्ली स्थित कार्यालय ने अपने कर्मचारियों के लिए आंतरिक सुरक्षा परामर्श (Security Advisory) भी जारी किया था, जिसमें राजधानी में बड़े पैमाने पर नागरिक अशांति और जाम की संभावना को देखते हुए गैर-जरूरी यात्राओं से बचने की सलाह दी गई थी। इसके बाद शनिवार को जब दिल्ली पुलिस ने हवाई अड्डे से लेकर जंतर-मंतर तक व्यापक धरपकड़ की, तो यूएन के मानवाधिकार प्रकोष्ठ ने इस पर सार्वजनिक बयान जारी किया।

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी से भी मिले संकेत

यूएन की इस चिंता से पहले देश की सर्वोच्च अदालत ने भी पुलिस की अत्यधिक सख्ती पर सवाल उठाए थे। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने शुक्रवार को मेट्रो स्टेशन बंद करने और अत्यधिक नाकेबंदी पर सरकार को नसीहत देते हुए कहा था कि “व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाना ठीक है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि आप एक मक्खी मारने के लिए पूरे हथौड़े का इस्तेमाल कर दें।”

अंतरराष्ट्रीय टिप्पणी पर भारत का कड़ा रुख तय

हालांकि विदेश मंत्रालय (MEA) की ओर से अभी औपचारिक प्रतिक्रिया आनी बाकी है, लेकिन भारत का पारंपरिक और दृढ़ राजनयिक रुख रहा है कि देश की आंतरिक कानून-व्यवस्था, चुनावी प्रक्रियाएं और प्रशासनिक कदम पूरी तरह से भारत का संप्रभु मामला हैं। सरकार हमेशा से यह स्पष्ट करती रही है कि भारतीय न्यायपालिका और संवैधानिक तंत्र पूरी तरह स्वतंत्र हैं और किसी भी विदेशी संस्था या वैश्विक निकाय को घरेलू कानूनी प्रक्रियाओं पर अवांछित टिप्पणी करने का अधिकार नहीं है।

Check Also

CJP का दिल्ली पुलिस पर सनसनीखेज आरोप, अभिजीत दीपके, आशुतोष रांका और सौरव दास की लोकेशन अज्ञात

दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन को लेकर पुलिस कार्रवाई के बीच कॉकरोच जनता …