
उत्तर प्रदेश में विधान परिषद (एमएलसी) की 11 शिक्षक और स्नातक सीटों पर होने वाले चुनाव को लेकर सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुंच चुका है। आगामी विधानसभा चुनाव से ठीक पहले हो रहे इस मुकाबले को भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी दोनों ही नाक का सवाल बनाकर लड़ रही हैं। भाजपा खेमे की कमान खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने हाथों में ले ली है। चुनावी हवा को पूरी तरह से भगवा रंग में रंगने के लिए सीएम योगी धुआंधार प्रचार में जुटे हैं और इसी कड़ी में वे लगातार तीसरे दिन मैदान में उतरकर पार्टी प्रत्याशियों के पक्ष में माहौल तैयार करेंगे। पहले दिन गोरखपुर में 12 हजार से अधिक शिक्षकों के महासम्मेलन को संबोधित करने और दूसरे दिन बरेली में विपक्ष पर तीखा हमला बोलने के बाद अब सीएम योगी सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में जनसभा को संबोधित करेंगे।
11 सीटों पर 75 जिलों का दांव: क्यों सेमीफाइनल बना यह मुकाबला
उत्तर प्रदेश विधान परिषद का यह चुनाव केवल 11 सीटों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके जरिए पूरे प्रदेश के 75 जिलों का राजनीतिक मिजाज तय होने जा रहा है। स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों का भौगोलिक फैलाव पश्चिमी यूपी से लेकर पूर्वांचल, अवध और बुंदेलखंड तक फैला हुआ है। लोकसभा चुनाव के बाद समाजवादी पार्टी जहां अपने कार्यकर्ताओं का मनोबल बनाए रखकर मनोवैज्ञानिक बढ़त कायम रखना चाहती है, वहीं भाजपा इस चुनाव में दोहरे अंकों में सीटें जीतकर विपक्षी खेमे के हौसले पस्त करने की रणनीति पर काम कर रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चूंकि इस चुनाव में शिक्षक और स्नातक यानी समाज का सबसे जागरूक और बौद्धिक वर्ग मतदान करता है, इसलिए इसके परिणाम आगामी विधानसभा आम चुनाव के नैरेटिव और दिशा को तय करने में सबसे अहम भूमिका निभाएंगे।
गोरखपुर में सपा पर बरसे, बरेली में दिया कानून-व्यवस्था पर कड़ा संदेश
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के इस तीन दिवसीय प्रचार अभियान की शुरुआत गोरखपुर-अयोध्या खंड शिक्षक सीट से हुई, जहां उन्होंने भाजपा प्रत्याशी ध्रुव कुमार त्रिपाठी के समर्थन में विशाल शिक्षक सम्मेलन को संबोधित किया। गोरखपुर में सीएम योगी ने समाजवादी पार्टी की नीतियों पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा था कि सपा और शिक्षा दो ऐसे किनारे हैं जो कभी एक साथ नहीं आ सकते। इसके अगले दिन बरेली-मुरादाबाद खंड सीट पर पार्टी प्रत्याशी डॉ. हरि सिंह ढिल्लो के पक्ष में जनसभा करते हुए उन्होंने अपराधियों और दंगाइयों को सख्त चेतावनी दी और स्पष्ट किया कि नए उत्तर प्रदेश की पहचान अब उपद्रव से नहीं बल्कि उत्सव और विकास से होती है। इन दोनों जनसभाओं में उमड़ी भारी भीड़ ने भाजपा कार्यकर्ताओं में नया जोश भर दिया है।
वाराणसी में प्रतिष्ठा की लड़ाई: पिछली हार का बदला लेने उतरेगी भाजपा
प्रचार के तीसरे दिन काशी की धरती पर होने वाली जनसभा भाजपा के लिए बेहद प्रतिष्ठापूर्ण मानी जा रही है। पिछले विधान परिषद चुनाव में वाराणसी स्नातक और शिक्षक दोनों सीटों पर समाजवादी पार्टी ने जीत दर्ज कर भाजपा को बड़ा झटका दिया था। इस बार पार्टी ने स्नातक सीट पर केदारनाथ सिंह और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में प्रमोद मिश्रा को मैदान में उतारकर पूरा जोर लगा दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र से जुड़े होने के कारण मुख्यमंत्री खुद यहां कार्यकर्ताओं और मतदाताओं से सीधा संवाद स्थापित कर समीकरणों को अपने पक्ष में मोड़ने की कमान संभाल रहे हैं। इस जनसभा के जरिए आसपास के आठ जिलों चंदौली, गाजीपुर, जौनपुर, मिर्जापुर, सोनभद्र, भदोही और बलिया के मतदाताओं को भी सीधा संदेश दिया जाएगा।
संगठन से लेकर सरकार तक पूरी ताकत झोंकी: 23 अक्टूबर को होगा फैसला
एमएलसी चुनाव को फतह करने के लिए भाजपा ने संगठन और सरकार दोनों का माइक्रो-मैनेजमेंट सक्रिय कर दिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के तूफानी दौरों के साथ-साथ दोनों उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक भी क्रमशः प्रयागराज और लखनऊ खंड सीटों पर लगातार बैठकें और समीक्षा कर रहे हैं। मतदान 23 अक्टूबर को बैलेट पेपर के जरिए होना है और इसे निष्पक्ष व सुगम बनाने के लिए प्रशासन ने मतदाताओं के लिए विशेष आकस्मिक अवकाश की भी घोषणा की है। विपक्षी दलों के ईवीएम से जुड़े आरोपों के बीच बैलेट पेपर पर होने वाले इस चुनाव में जीत दर्ज कर भाजपा विपक्ष के दावों को पूरी तरह खारिज करने का मजबूत आधार तैयार करना चाहती है।
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