अखिलेश यादव 26 नवंबर को जारी करेंगे सपा का चुनावी घोषणापत्र

उत्तर प्रदेश की राजनीति में वर्ष 2027 के आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी बिसात बिछनी शुरू हो गई है। प्रमुख विपक्षी दल समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) ने चुनावी मुकाबले में बाजी मारने और राज्य की सत्ता में वापसी के लिए अपनी तैयारियों को बेहद तेज कर दिया है। इसी कड़ी में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने एक बड़ा राजनीतिक ऐलान करते हुए बताया है कि पार्टी आगामी 26 नवंबर को अपना चुनावी घोषणापत्र (Manifesto) जारी करने जा रही है। खास बात यह है कि सपा चीफ ने इस दिन का चयन बेहद रणनीतिक सोच के साथ किया है, क्योंकि 26 नवंबर को देश भर में ‘संविधान दिवस’ (Samvidhan Diwas) के रूप में मनाया जाता है। अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर पोस्ट साझा करते हुए इस घोषणापत्र को ‘सत्ताईस का संकल्प: पीडीए का प्रणपत्र’ और ‘जन-मन का मैनीफेस्टो’ का नाम दिया है, जिसके बाद उत्तर प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं।

अखिलेश यादव ने अपनी घोषणा में इस बात पर जोर दिया है कि 26 नवंबर का दिन भारतीय लोकतंत्र और संविधान के प्रति आस्था व्यक्त करने का सबसे पावन अवसर है। समाजवादी पार्टी लगातार केंद्र और राज्य सरकार पर संविधान और लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने के आरोप लगाती रही है। ऐसे में संविधान दिवस के मौके पर अपना घोषणापत्र जारी करके सपा यह कड़ा संदेश देना चाहती है कि उसका चुनावी विज़न पूरी तरह से संवैधानिक मूल्यों, सामाजिक न्याय और आम नागरिकों के अधिकारों की रक्षा पर आधारित है। लखनऊ स्थित समाजवादी पार्टी के प्रदेश मुख्यालय में इस अवसर पर एक भव्य कार्यक्रम आयोजित करने की तैयारी की जा रही है, जिसमें पार्टी के वरिष्ठ नेता, विधायक और राज्य भर से आए प्रतिनिधि शामिल होंगे।

समाजवादी पार्टी की मौजूदा राजनीतिक रणनीति का सबसे मजबूत स्तंभ ‘पीडीए’ (PDA – पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) का नारा रहा है। अखिलेश यादव ने स्पष्ट किया है कि यह घोषणापत्र केवल वादों का एक कागजी पुलिंदा नहीं होगा, बल्कि यह पीडीए समाज की आकांक्षाओं, उनके हक और उनके अधिकारों को सुनिश्चित करने का एक ठोस ‘प्रणपत्र’ होगा। इस मेनिफेस्टो में पिछड़ों, दलितों, अल्पसंख्यकों के साथ-साथ किसानों, युवाओं, महिलाओं, आधी आबादी और शोषित वर्गों से जुड़े सामाजिक व आर्थिक मुद्दों को प्राथमिकता दी जाएगी। ‘जन-मन का मैनीफेस्टो’ नाम देकर पार्टी यह दर्शाना चाहती है कि इसमें जनता से सीधे संवाद और सुझावों के आधार पर तैयार किए गए जमीनी मुद्दों को शामिल किया गया है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अखिलेश यादव अपने इस ‘प्रणपत्र’ में उत्तर प्रदेश की जनता को लुभाने के लिए कई बड़े और क्रांतिकारी कल्याणकारी वादों का ऐलान कर सकते हैं। इसमें सरकारी नौकरियों में रिक्त पड़े लाखों पदों को भरने की समयबद्ध योजना, युवाओं के लिए रोजगार गारंटी, मुफ्त और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा व स्वास्थ्य सेवाएं, और किसानों के लिए फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की कानूनी गारंटी जैसे विषय शामिल हो सकते हैं। इसके अलावा, सरकारी कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली और महिलाओं के लिए विशेष वित्तीय सहायता योजनाओं को भी सपा अपने इस घोषणापत्र का मुख्य आकर्षण बना सकती है ताकि हर वर्ग को अपने पाले में लाया जा सके।

समय से काफी पहले चुनावी घोषणापत्र जारी करने का ऐलान कर अखिलेश यादव ने राज्य में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) और अन्य विपक्षी दलों पर मनोवैज्ञानिक बढ़त बनाने की कोशिश की है। जहां आमतौर पर राजनीतिक दल चुनाव के ठीक पहले या नामांकन प्रक्रिया के दौरान अपना मेनिफेस्टो लाते हैं, वहीं सपा द्वारा एक साल से अधिक समय पहले ही अपना विज़न डॉक्यूमेंट जनता के सामने प्रस्तुत करना उसकी गंभीर तैयारियों को दर्शाता है। इस कदम से सपा कार्यकर्ता गांव-गांव और घर-घर जाकर पीडीए के इस प्रणपत्र का प्रचार कर सकेंगे। अब देखना यह दिलचस्प होगा कि 26 नवंबर को जारी होने वाले इस ‘जन-मन के मैनीफेस्टो’ में सपा कौन सी बड़ी गारंटियां देती है और यह उत्तर प्रदेश के चुनावी समीकरणों को किस दिशा में मोड़ता है।

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