
कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि का हिंदू सनातन परंपरा में अत्यंत विशिष्ट और कल्याणकारी स्थान है, जिसे पूरे देश में धनतेरस या धनत्रयोदशी के नाम से उल्लासपूर्वक मनाया जाता है। पौराणिक धर्मग्रंथों और विष्णु पुराण के आख्यानों के अनुसार, इसी पावन तिथि पर समुद्र मंथन के दौरान आयुर्वेद के जनक भगवान धन्वंतरि अपने चतुर्भुज हाथों में अमृत से भरा कलश, शंख, चक्र और औषधियां लेकर प्राकट्य हुए थे। यही कारण है कि धनतेरस केवल भौतिक धन-दौलत और सोना-चांदी खरीदने का दिन नहीं है, बल्कि यह हमारे जीवन के सबसे बड़े धन यानी ‘आरोग्य’ और उत्तम स्वास्थ्य को संजोने का महापर्व है। इस दिन धन की अधिष्ठात्री देवी महालक्ष्मी, देवताओं के कोषाध्यक्ष कुबेर देव और आरोग्य के देवता भगवान धन्वंतरि की एक साथ आराधना की जाती है, ताकि घर-परिवार में दरिद्रता का नाश होकर सुख, शांति, समृद्धि और लंबी आयु का वास हो सके। इसके साथ ही इस दिन शाम के समय यमराज के निमित्त दीपदान करने की प्राचीन परंपरा भी है, जिसे यम दीपदान कहा जाता है और जो परिवार के सदस्यों को अकाल मृत्यु व गंभीर व्याधियों से सुरक्षा प्रदान करता है।
धनतेरस पर खरीदारी और लक्ष्मी-धन्वंतरि पूजन का सबसे शुभ मुहूर्त
वैदिक पंचांग की गणना के अनुसार धनतेरस के दिन पूजन और कीमती वस्तुओं की खरीदारी हमेशा प्रदोष काल और स्थिर लग्न में करना सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। सूर्यास्त के बाद के लगभग दो घंटे चौबीस मिनट की अवधि को प्रदोष काल कहा जाता है, और इस दौरान जब वृषभ या सिंह जैसा स्थिर लग्न उदित होता है, तब की गई पूजा और खरीदारी का फल चिरस्थायी रहता है यानी लक्ष्मी घर में स्थिर होकर वास करती हैं। सामान्यतः शाम को प्रदोष काल का समय शाम 05:40 बजे से लेकर रात 08:15 बजे तक रहता है, जिसके भीतर स्थिर वृषभ लग्न का समय शाम 06:30 बजे से रात 08:25 बजे के मध्य पूजा के लिए सबसे शक्तिशाली माना गया है। यदि आप सोना, चांदी, पीतल के बर्तन, नए इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, वाहन या बहीखाता खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो दोपहर में चर, लाभ और अमृत के चौघड़िया मुहूर्त में खरीदारी करना अत्यंत मंगलकारी सिद्ध होता है। सुबह 11:45 बजे से दोपहर 01:15 बजे तक का समय और फिर शाम को प्रदोष काल का समय बाजार से शुभ वस्तुएं घर लाने के लिए सर्वोत्तम ऊर्जा का संचार करता है।
धनतेरस पूजा की आवश्यक सामग्री और घर में पूजा स्थल की तैयारी
विधि-विधान से पूजा संपन्न करने के लिए सुबह ही सभी आवश्यक सामग्रियों को एक स्थान पर व्यवस्थित कर लेना चाहिए ताकि शाम को पूजन के समय कोई व्यवधान न आए। पूजा सामग्री में एक लकड़ी की चौकी, उस पर बिछाने के लिए लाल या पीला नया सूती या रेशमी वस्त्र, गंगाजल, अक्षत (अखंडित चावल), रोली, चंदन, हल्दी, कलावा (मौली), तांबे या पीतल का कलश, नारियल, आम या अशोक के पांच पत्ते, शुद्ध देसी घी, सरसों का तेल, मिट्टी के कम से कम 13 या 21 दीपक, एक चौमुखा बड़ा दीपक, कपूर, धूपबत्ती, लाल व पीले ताजे फूल, कमल का फूल, पान के पत्ते, सुपारी, लौंग, इलायची, बताशे, पंचामृत, मौसमी फल और खीर या मेवे का भोग शामिल करें। इसके साथ ही धनतेरस के दिन बाजार से खरीदे गए नए पीतल के बर्तन, चांदी का सिक्का, धनिया के बीज और झाड़ू को भी पूजा स्थल के समीप गंगाजल छिड़क कर पवित्र करके अवश्य रखना चाहिए। घर के ईशान कोण (उत्तर-पूर्व दिशा) या पूर्व दिशा में पूजा स्थल को साफ करके वहां गंगाजल छिड़कें और चौकी पर स्वास्तिक का पावन चिह्न बनाकर उस पर भगवान गणेश, माता लक्ष्मी, कुबेर देव और धन्वंतरि जी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और कुबेर देव की संपूर्ण व सरल पूजा विधि
धनतेरस की शाम को स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके आसन पर बैठें। सर्वप्रथम तीन बार आचमन करें और अपने ऊपर तथा पूजा सामग्री पर पवित्र गंगाजल छिड़कें। पूजा का आरंभ विघ्नहर्ता भगवान गणेश के ध्यान और पूजन से करें, उन्हें तिलक लगाएं, दूर्वा, मोदक और पुष्प अर्पित करें। इसके बाद हाथ में थोड़ा सा जल, अक्षत और पुष्प लेकर पूजा का संकल्प लें कि आप परिवार के उत्तम स्वास्थ्य और समृद्धि के लिए यह अनुष्ठान कर रहे हैं। चौकी पर स्थापित कलश के मुख पर मौली बांधें, उसमें जल, सिक्का, सुपारी और आम के पत्ते डालकर ऊपर नारियल स्थापित करें। अब भगवान धन्वंतरि का आह्वान करते हुए उन्हें पीले पुष्प, चंदन और औषधियां (तुलसी या गिलोय) अर्पित करें तथा उनके सामने देसी घी का दीपक प्रज्वलित करें। इसके उपरांत माता लक्ष्मी और कुबेर देव को कमल का पुष्प, कमलगट्टा, रोली, अक्षत, इत्र और लाल चुनरी अर्पित करें। धनतेरस पर खरीदे गए नए बर्तनों में थोड़े बताशे या खीर भरकर भगवान को भोग लगाएं और घर की तिजोरी की चाबी व बहीखाते का भी गंध-पुष्प से पूजन करें ताकि व्यवसाय और आजीविका में बरकत बनी रहे।
अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति दिलाने वाला यम दीपदान और उसकी सही विधि
धनतेरस की रात का सबसे महत्वपूर्ण और अनिवार्य अनुष्ठान यम दीपदान है, जिसे परिवार के सभी सदस्यों के भोजन करने के बाद अथवा मुख्य पूजा के तुरंत बाद किया जाता है। इसके लिए मिट्टी अथवा गेहूं के आटे से बना एक बड़ा चौमुखा दीपक लें और उसमें चार बत्तियां लगाएं तथा उसमें शुद्ध सरसों या तिल का तेल भरें। इस दीपक को घर के पूजा घर में रखकर रोली, अक्षत और पुष्प से विधिवत पूजन करें और फिर परिवार का कोई भी वरिष्ठ सदस्य या गृहस्वामी इस जलते हुए दीपक को हाथ में लेकर घर के मुख्य द्वार से बाहर ले जाए। मुख्य द्वार के बाहर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके एक मुट्ठी साबुत गेहूं या खील की ढेरी बनाएं और उस ढेरी के ऊपर इस चौमुखे दीपक को दक्षिण दिशा की ओर देखते हुए स्थापित कर दें। दीपक रखते समय मन ही मन यमराज से प्रार्थना करें कि हे सूर्यपुत्र यमराज, आप हमारे समस्त पापों, व्याधियों और अकाल मृत्यु के भय का शमन कर हमारे कुल की रक्षा करें। ध्यान रखें कि इस दीपक को रखने के बाद सीधे घर के अंदर आ जाएं और पीछे मुड़कर न देखें, तथा इसके बाद घर का कोई सदस्य बाहर न जाए।
पूजा के दौरान इन शक्तिशाली मंत्रों का जाप और आरती से पाएं अक्षय वरदान
पूजा की पूर्णता और ईश्वरीय कृपा को आकर्षित करने के लिए मंत्रों का शुद्ध उच्चारण अत्यंत प्रभावशाली होता है। भगवान धन्वंतरि की आराधना करते समय ‘ॐ धं धन्वन्तरये नमः’ अथवा ‘ॐ नमो भगवते महासुदर्शनाय वासुदेवाय धन्वंतराये अमृतकलश हस्ताय सर्वभय विनाशाय सर्वरोगनिवारणाय त्रिलोकपतये त्रिलोकनाथाय श्री महाविष्णुस्वरूपाय श्रीधन्वंतरि स्वरूपाय श्री श्री श्री औषधचक्र नारायणाय नमः’ का कम से कम 11 या 21 बार जप करें। कुबेर देव को प्रसन्न करने के लिए ‘ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये धनधान्यसमृद्धिं मे देहि दापय स्वाहा’ और महालक्ष्मी की कृपा पाने के लिए ‘ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्री सिद्ध लक्ष्म्यै नमः’ मंत्र की एक माला फेरें। इसके बाद घर में 13 छोटे मिट्टी के दीयों में सरसों का तेल डालकर उन्हें प्रज्वलित करें और उन्हें घर की चौखट, छत, बालकनी, रसोई, जल के स्रोत और तुलसी के पौधे के पास स्थापित करें। अंत में कर्पूर जलाकर भगवान गणेश, धन्वंतरि जी, कुबेर देव और मां लक्ष्मी की भावपूर्ण आरती करें, उपस्थित परिजनों में चरणामृत व प्रसाद वितरित करें और जाने-अनजाने हुई भूलों के लिए क्षमा याचना करें।
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