बीजिंग/तेहरान। मध्य पूर्व (Middle East) में जारी भीषण युद्ध और ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) की नाकाबंदी को लेकर वैश्विक राजनीति में उबाल आ गया है। इस संकट पर अब दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी महाशक्ति चीन ने खुलकर मोर्चा खोल दिया है। बीजिंग ने सीधे तौर पर अमेरिका और इजरायल को इस पूरे विवाद का मुख्य सूत्रधार करार देते हुए उन्हें ‘सारे फसाद की जड़’ बताया है। चीन का यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान को ‘पाषाण युग’ में भेजने की चेतावनी दे रहे हैं।
चीन का सीधा हमला: ‘गैर-कानूनी सैन्य अभियान हैं असली वजह’
चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने गुरुवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में वाशिंगटन और तेल अवीव पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि होर्मुज समुद्री मार्ग से जहाजों की आवाजाही में जो रुकावट आ रही है, उसकी असल वजह ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल द्वारा चलाए जा रहे ‘गैर-कानूनी सैन्य अभियान’ हैं। चीन ने साफ किया कि जब तक ईरान पर हमले बंद नहीं होंगे, तब तक समुद्री मार्ग का संकट हल होना नामुमकिन है।
ट्रंप के ‘पल्ला झाड़ने’ पर चीन की आपत्ति
हाल ही में राष्ट्रपति ट्रंप ने एक बयान में कहा था कि जो देश होर्मुज के रास्ते तेल मंगाते हैं (जैसे चीन, भारत, जापान), उन्हें खुद इस जलमार्ग की सुरक्षा करनी चाहिए। ट्रंप ने अमेरिका की जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते हुए कहा कि प्रभावित देश खुद इस रास्ते को खुलवाएं।
चीन ने इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि सैन्य तरीकों से किसी भी समस्या का बुनियादी समाधान नहीं निकल सकता। चीन के लिए यह रास्ता इसलिए भी अहम है क्योंकि वह ईरानी तेल का सबसे बड़ा खरीदार है और उसकी ऊर्जा सुरक्षा सीधे तौर पर इस जलमार्ग से जुड़ी है।
ट्रंप की ‘पाषाण युग’ वाली धमकी और चीन की नसीहत
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने संबोधन में दावा किया था कि अगले 2-3 हफ्तों में अमेरिका ईरान के बिजली संयंत्रों और रणनीतिक ठिकानों पर इतने जोरदार हमले करेगा कि वह ‘पाषाण युग’ (Stone Age) में पहुंच जाएगा। इस पर चीन ने नसीहत देते हुए कहा कि संघर्षों का बढ़ना किसी भी पक्ष के हित में नहीं है। माओ निंग ने जोर देकर कहा कि बल प्रयोग के बजाय कूटनीति का रास्ता अपनाना चाहिए।
क्यों अहम है होर्मुज जलडमरूमध्य?
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग है। इसे ‘ग्लोबल इकोनॉमी की जीवन रेखा’ कहा जाता है:
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तेल का प्रवाह: दुनिया के कुल कच्चे तेल के व्यापार का लगभग 20-25% हिस्सा इसी संकरे रास्ते से होकर गुजरता है।
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प्रमुख निर्यातक: सऊदी अरब, ईरान, यूएई, कुवैत और इराक जैसे देश इसी रास्ते से अपना तेल निर्यात करते हैं।
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चीन और भारत पर असर: चीन और भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए इस रास्ते पर बहुत अधिक निर्भर हैं। इसकी नाकाबंदी से पेट्रोल-डीजल की कीमतें वैश्विक स्तर पर आसमान छू सकती हैं।
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