अकेला ‘समोसा’ नहीं, राघव चड्ढा और AAP के बीच आर-पार की जंग! क्या बीजेपी में शामिल होंगे अरविंद केजरीवाल के ‘खास’

नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी (AAP) के भीतर मचे घमासान ने अब एक नया मोड़ ले लिया है। कभी अरविंद केजरीवाल के सबसे भरोसेमंद और ‘पोस्टर बॉय’ माने जाने वाले राघव चड्ढा आज अपनी ही पार्टी में विलेन बनकर उभरे हैं। पार्टी ने न केवल उन्हें राज्यसभा में उप-नेता के पद से हटा दिया है, बल्कि उनकी संसदीय शक्तियों पर भी लगाम कस दी है। राजनीति के गलियारों में सवाल तैर रहा है कि क्या ‘समोसे’ और ‘जूस’ पर चर्चा करने वाले राघव का अगला ठिकाना भारतीय जनता पार्टी (BJP) होने वाला है?

विपक्ष की एकजुटता में लगाया अड़ंगा? आतिशी ने दागे तीखे सवाल

शुक्रवार को ‘आप’ की फायरब्रांड नेता आतिशी और सौरभ भारद्वाज ने राघव चड्ढा पर सीधा हमला बोलकर दरार को सार्वजनिक कर दिया। मामला मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव से जुड़ा है। आतिशी का आरोप है कि जब पूरा INDIA गठबंधन लोकतंत्र बचाने के लिए एकजुट था, तब राघव चड्ढा ने भाजपा के डर से प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया। आतिशी ने तीखा सवाल पूछते हुए वीडियो जारी किया— “राघव जी, आप पीएम मोदी और भाजपा से इतना क्यों डर रहे हैं?”

समोसे की कीमत और पीआर स्टंट: पार्टी नेताओं का तंज

पार्टी के भीतर नाराजगी का आलम यह है कि राघव के मुद्दों को अब ‘सतही’ बताया जा रहा है। सौरभ भारद्वाज ने चुटकी लेते हुए कहा कि जब देश एलपीजी किल्लत और गंभीर समस्याओं से जूझ रहा है, तब राघव हवाई अड्डों पर समोसे के दाम और जूस के डिब्बों में क्या है, जैसे मुद्दों पर मीम्स बनवाकर अपना पीआर चमकाने में व्यस्त हैं। पार्टी इसे केवल गंभीरता की कमी नहीं, बल्कि जानबूझकर मुख्य मुद्दों से ध्यान भटकाने की रणनीति मान रही है।

लंदन यात्रा और पंजाब की ‘सुपर सीएम’ वाली इमेज बनी गले की फांस

राघव चड्ढा और पार्टी के बीच कड़वाहट की कहानी पुरानी है। 2024 में जब अरविंद केजरीवाल जेल में थे, तब राघव आंखों के ऑपरेशन के नाम पर लंदन में थे। आतिशी ने अब इस पर भी घाव कुरेदे हैं— “हम सड़कों पर लाठियां खा रहे थे और आप लंदन में छिपे थे।” इसके अलावा, पंजाब चुनाव के बाद उन्हें मिला ‘सुपर मुख्यमंत्री’ का तमगा भी स्थानीय नेताओं को रास नहीं आया। 2026 में केजरीवाल और सिसोदिया के बरी होने के बाद जब राघव जंतर-मंतर की रैली से नदारद रहे, तो दूरी और बढ़ गई।

अशोक मित्तल ने ली जगह, राघव बोले- ‘मेरी चुप्पी को हार न समझें’

राघव चड्ढा को पद से हटाकर अब पंजाब के दिग्गज उद्योगपति अशोक मित्तल को राज्यसभा में उप-नेता की कमान सौंप दी गई है। इस कार्रवाई के बाद राघव ने एक वीडियो संदेश के जरिए अपनी बात रखी। उन्होंने अपनी चुप्पी पर स्पष्टीकरण देते हुए कहा, “जनता के मुद्दे उठाना क्या गुनाह है? मेरी चुप्पी को मेरी हार समझने की भूल न करें।” उनके इस बयान से साफ संकेत मिल रहे हैं कि वे पार्टी नेतृत्व के रवैये से खासे नाराज हैं।

क्या बीजेपी में होगा राघव चड्ढा का ‘राजतिलक’?

सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या राघव अब भगवा चोला पहनेंगे? पंजाब के सीएम भगवंत मान ने तो उन्हें ‘कॉम्प्रोमाइज्ड’ तक कह दिया है। उधर, दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने चुटकी लेते हुए कहा कि केजरीवाल लोगों का इस्तेमाल कर उन्हें फेंक देते हैं। हालांकि, राघव के अगले कदम पर सस्पेंस बरकरार है। क्या वे बागी बनकर नई राह चुनेंगे या बीजेपी के साथ जाकर ‘आप’ के लिए नई मुश्किलें खड़ी करेंगे, यह आने वाला वक्त ही बताएगा।

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