लखनऊ: उत्तर प्रदेश के करोड़ों कामगारों के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में 12 साल के लंबे इंतजार के बाद नये वेज बोर्ड (Wage Board) के गठन को हरी झंडी दे दी है। इस फैसले से न केवल श्रमिकों की न्यूनतम मजदूरी की दरों में सम्मानजनक वृद्धि होगी, बल्कि राज्य सरकार ने इसके जरिए 5 करोड़ लोगों को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाने का विशाल लक्ष्य भी निर्धारित किया है।
12 साल बाद वेतन विसंगतियां होंगी दूर
यूपी में पिछले 12 वर्षों से नया वेज बोर्ड गठित नहीं हुआ था, जिससे कामगार पुरानी दरों पर काम करने को मजबूर थे। अंतरराष्ट्रीय श्रमिक दिवस (1 मई) के अवसर पर मुख्यमंत्री ने इसका वादा किया था, जिसे अब अमलीजामा पहनाया जा रहा है। श्रम विभाग ने बोर्ड के गठन की प्रक्रिया तेज कर दी है। इस बोर्ड में श्रम संगठनों और नियोक्ताओं (Employers) की बराबर की हिस्सेदारी होगी, जबकि आर्थिक मामलों के विशेषज्ञ इसके स्वतंत्र सदस्य के रूप में शामिल किए जाएंगे।
5 करोड़ लोगों को ‘सुरक्षा कवच’ और ₹5 लाख का बीमा
योगी सरकार का लक्ष्य केवल वेतन बढ़ाना नहीं, बल्कि कामगारों के जीवन स्तर को सुधारना भी है। सरकार की योजना के अनुसार:
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प्रदेश के 1 करोड़ परिवारों यानी लगभग 5 करोड़ लोगों को ₹5 लाख का स्वास्थ्य बीमा कवर दिया जाएगा।
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न्यूनतम मजदूरी की दरें नए सिरे से तय होंगी, जो महंगाई और वर्तमान आर्थिक परिस्थितियों के अनुकूल होंगी।
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भारत सरकार द्वारा जल्द ही ‘फ्लोर वेज’ घोषित होने की उम्मीद है, जिसके बाद यूपी का वेज बोर्ड उससे अधिक या बराबर मजदूरी सुनिश्चित करेगा।
औद्योगिक विकास और श्रमिकों के बीच संतुलन
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि उद्योग और श्रमिक एक-दूसरे के पूरक हैं। नया वेज बोर्ड जहां एक तरफ श्रमिकों को आकर्षक मेहनताना दिलाएगा, वहीं दूसरी तरफ औद्योगिक विकास की गति को भी प्रभावित नहीं होने देगा। श्रम और सेवायोजन मंत्री अनिल राजभर के अनुसार, बोर्ड के अध्यक्ष और सदस्यों के नामों की घोषणा जल्द की जाएगी। श्रमायुक्त कार्यालय ने पहले ही संभावित सदस्यों की सूची शासन को भेज दी है।
नोएडा विवाद के बाद तेज हुई थी कवायद
बता दें कि नोएडा में हुए श्रमिकों के बवाल के बाद सरकार ने अंतरिम मजदूरी दरों में बढ़ोतरी की थी, लेकिन स्थायी समाधान के लिए नए वेज बोर्ड की मांग लंबे समय से की जा रही थी। अब मुख्यमंत्री की स्वीकृति के बाद जल्द ही नई नियमावली प्रकाशित होगी, जिससे असंगठित और संगठित क्षेत्र के करोड़ों मजदूरों को सीधा लाभ पहुंचेगा।
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