जिम सप्लीमेंट्स लेने वाले सावधान! किडनी को फेल होने से बचाएंगे ये 5 ब्लड टेस्ट, नेफ्रोलॉजिस्ट की बड़ी चेतावनी

आज के दौर में फिट दिखने और तेजी से मसल्स बनाने का क्रेज युवाओं में सिर चढ़कर बोल रहा है। जिम जाने वाले अधिकतर लोग प्रोटीन शेक, क्रिएटिन, प्री-वर्कआउट और मसल बिल्डिंग सप्लीमेंट्स को अपनी डेली डाइट का हिस्सा बना चुके हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि बिना जांच के इन सप्लीमेंट्स का लगातार सेवन आपकी किडनी को कितना भारी नुकसान पहुंचा सकता है? फोर्टिस अस्पताल (शालीमार बाग) के मशहूर कंसल्टेंट नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. भानु मिश्रा ने जिम जाने वालों को एक बड़ी चेतावनी जारी की है। उनका कहना है कि अगर आप नियमित रूप से सप्लीमेंट्स ले रहे हैं, तो आपको हर छह महीने में अपनी किडनी की सेहत की निगरानी जरूर करनी चाहिए।

सप्लीमेंट्स और हाई प्रोटीन डाइट से किडनी पर क्यों बढ़ता है दबाव?

डॉ. भानु मिश्रा के अनुसार, वैसे तो ज्यादातर सप्लीमेंट्स को अगर समझदारी और सही मात्रा में लिया जाए तो वे सीधे तौर पर खतरनाक नहीं होते। लेकिन दिक्कत तब शुरू होती है जब लोग इनका अत्यधिक सेवन करने लगते हैं, शरीर में पानी की कमी (निर्जलीकरण) होने देते हैं या फिर बिना किसी डॉक्टरी सलाह के सप्लीमेंट्स बदलते रहते हैं। जब आप हाई प्रोटीन डाइट या क्रिएटिन जैसी चीजें लेते हैं, तो आपकी किडनी को अतिरिक्त प्रोटीन और मेटाबॉलिक वेस्ट (चयापचय अपशिष्ट उत्पादों) को शरीर से बाहर निकालने के लिए दोगुनी मेहनत करनी पड़ती है। यही वजह है कि सप्लीमेंट लेने वालों के लिए नियमित ब्लड और यूरिन टेस्ट करवाना अनिवार्य हो जाता है।

नेफ्रोलॉजिस्ट के मुताबिक हर जिम लवर के लिए जरूरी हैं ये 5 ब्लड टेस्ट

अगर आप अपनी फिटनेस के साथ-साथ अपनी किडनी को भी लंबी उम्र देना चाहते हैं, तो डॉक्टरों द्वारा सुझाए गए इन 5 मुख्य ब्लड टेस्ट को कभी भी नजरअंदाज न करें। ये टेस्ट डॉक्टर को यह समझने में मदद करते हैं कि आपकी किडनी प्रोटीन और सप्लीमेंट्स के बढ़े हुए लोड को कितनी अच्छी तरह संभाल पा रही है:

  • सीरम क्रिएटिनिन (Serum Creatinine): यह टेस्ट बताता है कि खून में वेस्ट प्रोडक्ट की मात्रा कितनी है। क्रिएटिनिन का बढ़ा हुआ स्तर किडनी की कार्यक्षमता में कमी का संकेत हो सकता है।

  • रक्त यूरिया नाइट्रोजन (BUN): यह आपके खून में यूरिया नाइट्रोजन की मात्रा को मापता है, जो प्रोटीन के टूटने से बनता है।

  • अनुमानित ग्लोमेरुलर फिल्ट्रेशन दर (eGFR): इस टेस्ट से सटीक रूप से पता चलता है कि आपकी किडनी खून को कितनी अच्छी तरह फिल्टर कर पा रही है।

  • इलेक्ट्रोलाइट प्रोफाइल (Electrolyte Profile): सप्लीमेंट्स के कारण शरीर में सोडियम, पोटेशियम जैसे इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बिगड़ सकता है, जिसकी जांच इससे होती है।

  • यूरिक एसिड का स्तर (Uric Acid Level): हाई प्रोटीन डाइट के कारण यूरिक एसिड बढ़ सकता है, जो किडनी में पथरी या गाउट की समस्या पैदा कर सकता है।

इन 5 गलतियों से बढ़ जाता है किडनी डैमेज होने का खतरा

किडनी विशेषज्ञ का कहना है कि सिर्फ सप्लीमेंट लेना ही बुरा नहीं है, बल्कि जिम जाने वालों की कुछ खराब आदतें किडनी से जुड़े जोखिमों को कई गुना बढ़ा देती हैं। इनमें प्रमुख हैं:

  1. जरूरत से ज्यादा मात्रा में प्रोटीन पाउडर का सेवन करना।

  2. सप्लीमेंट लेने के बाद पर्याप्त मात्रा में पानी न पीना।

  3. बाजार में मिलने वाले सस्ते, अविश्वसनीय या नकली सप्लीमेंट्स के झांसे में आना।

  4. कैफीन और अन्य उत्तेजक पदार्थों से भरपूर प्री-वर्कआउट फॉर्मूले का बहुत ज्यादा इस्तेमाल करना।

  5. जल्दी बॉडी बनाने के चक्कर में खतरनाक एनाबॉलिक स्टेरॉयड का सहारा लेना।

पानी की मामूली कमी भी पड़ सकती है भारी

फिटनेस इंडस्ट्री में पानी पीने जैसी सबसे बुनियादी आदत को अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है। डॉ. मिश्रा बताते हैं कि जो लोग प्रोटीन सप्लीमेंट्स ले रहे हैं, उनके लिए पर्याप्त हाइड्रेशन (जलयोजन) बेहद जरूरी है। पानी किडनी की फिल्टरिंग प्रक्रिया को आसान बनाता है। इसके अलावा, कई तरह के उत्तेजक तत्वों से भरे प्री-वर्कआउट फॉर्मूले को आपस में मिलाने से बचना चाहिए, क्योंकि यह दिल और किडनी दोनों पर अचानक से दबाव बढ़ा देता है। इसके बजाय युवाओं को संतुलित पोषण, मध्यम अनुपूरण (सप्लीमेंट्स की सीमित मात्रा), विश्वसनीय ब्रांड्स और भरपूर पानी पीने पर ध्यान देना चाहिए।

यूरिन टेस्ट से मिल सकते हैं शुरुआती वॉर्निंग साइन

नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. भानु मिश्रा के अनुसार, केवल ब्लड टेस्ट ही नहीं, बल्कि नियमित यूरिन टेस्ट और मूत्र प्रोटीन परीक्षण (Urine Protein Test) भी किडनी के स्वास्थ्य का सटीक हाल बताते हैं। कई बार किडनी पर पड़ रहा दबाव या शुरुआती डैमेज के लक्षण बाहरी तौर पर दिखाई नहीं देते, लेकिन यूरिन टेस्ट के जरिए इन शुरुआती चेतावनी के संकेतों को समय रहते पकड़ा जा सकता है।

इन लोगों को सप्लीमेंट लेते समय बरतनी होगी दोगुनी सावधानी

विशेषज्ञों का मानना है कि कुछ लोगों को जिम सप्लीमेंट्स का इस्तेमाल करने से पहले या उसके दौरान बहुत ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है। खासकर:

  • मधुमेह (Diabetes) से पीड़ित लोग।

  • हाई ब्लड प्रेशर (High Blood Pressure) की समस्या वाले व्यक्ति।

  • ऐसे लोग जिनके परिवार में पहले से ही किसी को किडनी की बीमारी (Family History of Kidney Disease) रही हो।

आजकल सोशल मीडिया और फिटनेस इंडस्ट्री में तेजी से बॉडी बनाने, आक्रामक सप्लीमेंट प्लान और बेहद कठिन वर्कआउट रूटीन को प्रमोट किया जाता है। लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों का साफ कहना है कि किसी भी तरह के शॉर्टकट से ऊपर आपकी सेहत होनी चाहिए। दिखावे की बॉडी बनाने के चक्कर में अपनी किडनी को दांव पर न लगाएं और समय-समय पर डॉक्टर की सलाह से ये जरूरी टेस्ट करवाते रहें।

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