
Heart Attack Prevention : आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी, अनियमित दिनचर्या और अत्यधिक मानसिक तनाव के कारण सेहत का ख्याल रखना बेहद मुश्किल हो गया है। यही वजह है कि आज के समय में हार्ट अटैक (दिल का दौरा) और कार्डियक अरेस्ट के मामलों में अप्रत्याशित बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। ना तो सोने का कोई निश्चित समय है और ना ही खान-पान का, ऊपर से अत्यधिक जंक फूड और स्क्रीन टाइम का सेवन आग में घी का काम कर रहा है। हमारी रात की कुछ ऐसी अनजानी आदतें होती हैं, जो सीधे हमारे दिल पर बुरा असर डालती हैं। यदि समय रहते इन्हें नहीं सुधारा गया, तो दिल की बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
हृदय रोग विशेषज्ञों (Cardiologists) का मानना है कि यदि आप रात को सोने से पहले महज कुछ मिनट खुद के लिए निकालते हैं, तो इससे आपके दिल और दिमाग दोनों की सेहत को रीबूट किया जा सकता है। डॉक्टरों ने रात की 4 बेहद सरल लेकिन बेहद असरदार आदतों के बारे में बताया है, जिन्हें लाइफस्टाइल में शामिल करके आप गंभीर हृदय रोगों के जोखिम से खुद को सुरक्षित रख सकते हैं। आइए जानते हैं क्या हैं ये आदतें-
1. ‘4-2-6 ब्रीदिंग टेक्निक’ से दिल की धड़कन को करें नॉर्मल
सोने से ठीक पहले बिस्तर पर बैठकर कम से कम 5 मिनट तक ‘4-2-6 ब्रीदिंग’ (सांस लेने की विशेष विधि) का अभ्यास करें। यह आपके नर्वस सिस्टम के लिए एक थेरेपी की तरह काम करता है।
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कैसे करें: सबसे पहले 4 सेकंड तक गहरी सांस अंदर खींचें, फिर 2 सेकंड के लिए सांस को अंदर ही रोककर रखें (Hold करें) और अंत में 6 सेकंड तक बहुत धीरे-धीरे सांस को बाहर छोड़ें।
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क्या होगा फायदा: इस वैज्ञानिक तरीके को अपनाने से आपकी बढ़ी हुई हार्ट बीट (दिल की धड़कन) तुरंत नॉर्मल हो जाती है और फेफड़े बेहतर तरीके से काम करने लगते हैं। यह प्रक्रिया शरीर की ‘वेगस नर्व’ (Vagus Nerve) को एक्टिव कर देती है, जिससे कोर्टिसोल यानी स्ट्रेस हार्मोन का स्तर तेजी से गिरता है और रात में बहुत ही सुकून भरी गहरी नींद आती है।
2. ‘डार्कनेस विंडो’ अपनाएं और स्क्रीन को कहें अलविदा
सोने जाने से कम से कम 10 से 15 मिनट पहले अपने मोबाइल, लैपटॉप, टैबलेट और टीवी जैसी तमाम चमकीली स्क्रीन्स को पूरी तरह बंद कर दें और कमरे की लाइट को भी ऑफ या डिम कर दें। इसे मेडिकल भाषा में ‘डार्कनेस विंडो’ (Darkness Window) कहा जाता है।
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लगातार गैजेट्स की स्क्रीन या तेज रोशनी में रहने से शरीर में तनाव बढ़ाने वाला ‘कोर्टिसोल’ हार्मोन रिलीज होता है, जिससे दिमाग लगातार अलर्ट मोड पर रहता है और नींद का हार्मोन ‘मेलाटोनिन’ नहीं बन पाता।
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जब आप सोने से पहले अंधेरा करते हैं या स्क्रीन से दूरी बनाते हैं, तो शरीर तुरंत रिलैक्स मोड में आ जाता है। इससे आपकी रक्त वाहिकाओं (Blood Vessels) का तनाव कम होता है और ब्लड प्रेशर सामान्य बना रहता है।
3. चेस्ट रिलैक्सेशन थेरेपी से तनाव को करें छूमंतर
बिस्तर पर लेटने के बाद मात्र 2 मिनट के लिए अपने दाहिने हाथ को अपने सीने (हार्ट) पर रखें, आंखें बंद करें और बेहद शांति से गहरी सांस लें और छोड़ें।
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यह एक बेहद शक्तिशाली माइंडफुलनेस प्रैक्टिस है, जो आपके दिल और दिमाग के बीच एक सीधा और सकारात्मक कनेक्शन स्थापित करती है।
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ऐसा करने से आपके पैरासिम्पेथेटिक नर्वस सिस्टम को आराम मिलता है। दिनभर की एंग्जायटी, काम का स्ट्रेस और घबराहट शांत हो जाती है, जिससे रात के समय सोते हुए दिल पर अतिरिक्त दबाव नहीं पड़ता और हार्ट रेट पूरी तरह बैलेंस रहता है।
4. सोने से पहले धीरे-धीरे पिएं गुनगुना पानी
रात को सोने के समय से लगभग 30 मिनट पहले एक गिलास हल्का गुनगुना पानी (Lukewarm Water) घूंट-घूंट करके धीरे-धीरे पिएं।
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फायदा: गुनगुना पानी रातभर आपके शरीर को हाइड्रेटेड रखने में मदद करता है और ब्लड सर्कुलेशन (रक्त प्रवाह) को सुचारू बनाता है, जिससे धमनियों में थक्के (Clots) जमने का खतरा कम होता है।
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इसके अलावा, गुनगुना पानी आपके डाइजेशन (पाचन क्रिया) को भी दुरुस्त करता है। जिससे रात में पेट भारी नहीं होता और शरीर ज्यादा आराम महसूस करता है। यदि आप चाहें तो गुनगुना दूध भी ले सकते हैं, लेकिन डॉक्टरों के अनुसार सादा गुनगुना पानी दिल के लिहाज से ज्यादा सुरक्षित और बेहतरीन विकल्प है।
क्यों संजीवनी की तरह काम करती हैं रात की ये छोटी आदतें?
चिकित्सकों का कहना है कि हमारी ये छोटी-छोटी और आसान आदतें लंबे समय में दिल की सेहत पर बेहद सुरक्षात्मक और बड़ा सकारात्मक असर डालती हैं। यह आपके ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखती हैं और अचानक होने वाले कार्डियक अरेस्ट के खतरे को टालती हैं।
विशेष चिकित्सीय सलाह: यद्यपि ये आदतें पूरी तरह प्राकृतिक और सुरक्षित हैं, लेकिन यदि आप पहले से ही हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, हार्ट ब्लॉकेज या किसी अन्य पुरानी बीमारी से पीड़ित हैं, अथवा आपको पहले कभी हार्ट अटैक आ चुका है, तो अपने रूटीन में किसी भी तरह का बदलाव करने या इन तरीकों को आजमाने से पहले एक बार अपने कार्डियोलॉजिस्ट (हृदय रोग विशेषज्ञ) से व्यक्तिगत परामर्श जरूर लें।
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