भारत के साथ रणनीतिक संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की तैयारी के बीच, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने अपनी आगामी भारत यात्रा से ठीक पहले ऊर्जा सुरक्षा पर एक बड़ा और महत्वपूर्ण बयान दिया है। 23 से 26 मई के बीच अपनी पहली आधिकारिक भारत यात्रा पर आ रहे रूबियो ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए पूरी तरह तैयार है।
“जितनी ऊर्जा चाहिए, उतनी देंगे”: अमेरिका का वादा
रूबियो ने ऊर्जा आपूर्ति के मुद्दे पर खुलकर बात करते हुए कहा, “अमेरिका इस समय ऐतिहासिक स्तर पर ऊर्जा का उत्पादन और निर्यात कर रहा है। हम भारत को उतनी ऊर्जा बेचने के लिए तैयार हैं, जितनी वह खरीदना चाहे।” भारत को दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते ऊर्जा बाजारों में से एक बताते हुए उन्होंने कहा कि अमेरिका भारत के ऊर्जा पोर्टफोलियो में अपनी भागीदारी को न केवल बढ़ाना चाहता है, बल्कि इसे एक दीर्घकालिक साझेदारी में बदलना चाहता है।
वेनेजुएला तेल और ऊर्जा सुरक्षा
ऊर्जा के विकल्पों को लेकर रूबियो ने एक नई संभावना भी जताई है। उन्होंने वेनेजुएला से तेल आपूर्ति की दिशा में चर्चा के संकेत दिए हैं। जानकारी के अनुसार, वेनेजुएला के अंतरिम राष्ट्रपति की आगामी भारत यात्रा से ऊर्जा व्यापार और तेल आपूर्ति के नए रास्ते खुल सकते हैं। यह कदम भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है, खासकर जब पर्शियन गल्फ क्षेत्र में जारी तनाव वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित कर रहा है।
भारत-अमेरिका: एक ‘बेहतरीन सहयोगी’ का रिश्ता
रूबियो ने भारत की तारीफ करते हुए उसे अमेरिका का “बेहतरीन सहयोगी और साझेदार” करार दिया। अपनी यात्रा के एजेंडे पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने बताया कि:
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क्वाड (QUAD) बैठक: भारत दौरे के दौरान वे क्वाड देशों के प्रतिनिधियों से मुलाकात करेंगे।
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रणनीतिक सहयोग: भारत के साथ ऊर्जा, रक्षा और क्षेत्रीय सुरक्षा पर व्यापक बातचीत होगी।
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भविष्य की रूपरेखा: साल के अंत में भारत में एक और बड़े कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा, जो दोनों देशों के बीच संबंधों की गहराई को दर्शाएगा।
क्यों अहम है यह दौरा?
मार्को रूबियो का यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब पश्चिम एशिया में तनाव और अमेरिकी सैन्य गतिविधियों का सीधा असर भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ रहा है। रूबियो की यात्रा का मुख्य उद्देश्य न केवल द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करना है, बल्कि भारत को ऊर्जा के मोर्चे पर एक भरोसेमंद और स्थायी विकल्प प्रदान करना है। भारत और अमेरिका के बीच ऊर्जा, सुरक्षा और भू-राजनीतिक मुद्दों पर होने वाली यह बातचीत आने वाले समय में वैश्विक समीकरणों को प्रभावित कर सकती है।
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