मिडिल ईस्ट में महायुद्ध! ईरान ने कुवैत एयरपोर्ट पर दागीं मिसाइलें, हमले में एक भारतीय नागरिक की मौत, उड़ानें ठप

मिडिल ईस्ट (Middle East) से इस वक्त की एक बहुत बड़ी और दर्दनाक खबर सामने आ रही है। ईरान और अमेरिका के बीच जारी भीषण तनाव के बीच ईरान ने अब कुवैत इंटरनेशनल एयरपोर्ट को अपना निशाना बनाया है। ईरान द्वारा किए गए इस भीषण हवाई हमले में एक भारतीय नागरिक की मौत हो गई है, जबकि कई अन्य लोग गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। इस अचानक हुए हमले के बाद कुवैत एयरपोर्ट पर हड़कंप मच गया और आनन-फानन में पूरे हवाई यातायात को सस्पेंड करना पड़ा।

टर्मिनल वन को बनाया निशाना, कुवैती प्रशासन के साथ संपर्क में भारतीय दूतावास

आधिकारिक सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, ईरान की तरफ से किए गए इस हवाई हमले में कुवैत इंटरनेशनल एयरपोर्ट के ‘टर्मिनल वन’ को सीधे तौर पर निशाना बनाया गया। इस हमले में एयरपोर्ट की इमारत को भारी नुकसान पहुंचा है और जानमाल की भी क्षति हुई है। नागरिक उड्डयन महानिदेशालय के प्रवक्ता अब्दुल्ला अल-राजही ने सरकारी समाचार एजेंसी ‘केयूएनए’ (KUNA) को इस तबाही की पुष्टि की है।

इस दुखद घटना पर कुवैत स्थित भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पहले ट्विटर) पर गहरा शोक व्यक्त किया है। दूतावास ने हमले में जान गंवाने वाले भारतीय नागरिक के शोक संतप्त परिवार के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं प्रकट की हैं। इसके साथ ही भारतीय दूतावास ने साफ किया है कि वह इस घटना में घायल हुए लोगों और पीड़ित परिवार को हर संभव मदद और समर्थन देने के लिए कुवैती प्रशासन के साथ लगातार तालमेल बिठा रहा है।

देर रात आसमान से बरसी तबाही, ड्रोन और मिसाइल अटैक से कांपा कुवैत

कुवैत के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल सऊद अब्दुलअजीज अल-ओतैबी ने मामले की गंभीरता को बताते हुए कहा कि कई दुश्मन ड्रोनों ने कुवैत एयरपोर्ट की मुख्य इमारत को निशाना बनाया था। इस हमले के बाद कुवैत के विदेश मंत्रालय ने कम से कम एक व्यक्ति की मौत और कई लोगों के घायल होने की आधिकारिक पुष्टि की। हमले के तुरंत बाद कुवैत एयरवेज ने अपनी सभी उड़ानों का संचालन पूरी तरह से रोक दिया था। हालांकि, बाद में नागरिक उड्डयन अधिकारियों ने एयरपोर्ट को आंशिक रूप से फिर से खोल दिया, जिसके बाद प्रभावित टर्मिनल के बजाय दूसरे टर्मिनल से उड़ानों को रिशेड्यूल कर फिर से शुरू किया गया।

यह हमला उस वक्त हुआ जब मंगलवार देर रात ईरान और अमेरिका ने एक-दूसरे के ठिकानों पर ताबड़तोड़ मिसाइल हमले किए थे। अमेरिकी सेना ने दावा किया है कि ईरान ने कुवैत पर दो मिसाइलें भी दागी थीं, जिन्हें सुरक्षा प्रणालियों द्वारा रास्ते में ही मार गिराया गया।

अमेरिका की बड़ी जवाबी कार्रवाई, ईरान ने कुवैत का नाम लेने से क्यों बचाया?

कुवैत और बहरीन पर हुए इस ईरानी हमले के बाद अमेरिकी सेना ने भी बेहद आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया है। अमेरिकी सेना ने दावा किया कि उसने बहरीन और कुवैत पर दागी गई मिसाइलों के जवाब में ईरान के एक बेहद महत्वपूर्ण सैन्य स्टेशन को निशाना बनाकर नेस्तनाबूद कर दिया है।

दूसरी तरफ, ईरान के अर्धसैनिक ‘रिवोल्यूशनरी गार्ड’ ने यह तो स्वीकार किया है कि उसने अमेरिकी नौसेना के पांचवें बेड़े (5th Fleet) के मुख्यालय और एक अन्य देश में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है, लेकिन उसने अपने बयान में सीधे तौर पर कुवैत का नाम लेने से परहेज किया। ईरान का दावा है कि ये हमले केशम द्वीप पर हुए हमलों का बदला लेने के लिए किए गए थे।

बातचीत के सारे रास्ते बंद? ट्रंप ने ईरानी दावों को किया खारिज

इस भीषण सैन्य टकराव के बीच कूटनीतिक मोर्चे से भी परेशान करने वाली खबरें आ रही हैं। ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसियों ने दावा किया है कि देश ने अमेरिका और इजरायल के साथ युद्धविराम की अवधि बढ़ाने को लेकर मध्यस्थों के साथ चल रही बातचीत को पूरी तरह से बंद कर दिया है। एक क्षेत्रीय अधिकारी के अनुसार, ईरान की शर्त थी कि वार्ता फिर से शुरू करने से पहले लेबनान में हुए संघर्ष विराम को पूरी तरह से जमीन पर लागू कराया जाए।

हालांकि, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया है। राष्ट्रपति ट्रंप का कहना है कि दोनों पक्षों के बीच बातचीत अभी भी जारी है। बता दें कि यह बातचीत पिछले कई हफ्तों से खिंचती जा रही है, लेकिन खाड़ी क्षेत्र (Gulf Region) में लगातार हो रहे इन हमलों और लेबनान में इजरायल के बढ़ते सैन्य दखल ने शांति प्रयासों पर भारी दबाव बना दिया है। इस समय ईरान ने दुनिया के तेल और प्राकृतिक गैस परिवहन के सबसे महत्वपूर्ण मार्ग ‘होर्मुज स्ट्रेट’ पर अपना कड़ा नियंत्रण बना रखा है, तो वहीं जवाबी कार्रवाई में अमेरिका ने भी ईरानी बंदरगाहों की सख्त नाकेबंदी जारी रखी है।

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