हिंदी सिनेमा के इतिहास में किशोर कुमार, मोहम्मद रफी और मुकेश जैसे गायकों को जो मकाम मिला, उसकी मिसाल आज भी दी जाती है। लेकिन इसी दौर में एक ऐसा वर्सेटाइल सिंगर भी आया, जिसने 80 और 90 के दशक में अपनी मखमली आवाज से करोड़ों दिलों पर राज किया, मगर इंडस्ट्री ने उन्हें वो सम्मान और पहचान कभी नहीं दी जिसके वो हकदार थे। हम बात कर रहे हैं दिग्गज गायक मोहम्मद अजीज (Mohammed Aziz) की। एक ऐसा फनकार जिसे हमेशा यह मलाल रहा कि शानदार गानों की झड़ी लगाने के बाद भी उनकी गिनती कभी टॉप के सिंगर्स में नहीं की गई। गुजरते वक्त के साथ उनसे काम छीन लिया गया और जब उनका अंतिम समय आया, तो मायानगरी का कोई बड़ा सुपरस्टार उन्हें विदाई देने तक नहीं पहुंचा।
कोलकाता के रेस्टोरेंट से मुंबई का सफर: रफी साहब को सुनकर पक्के किए सुर
साल 1954 में पश्चिम बंगाल में जन्मे सय्यद मोहम्मद अजीज-उन-नबी को घर में सब प्यार से ‘मुन्ना’ बुलाते थे। बचपन से ही वह मोहम्मद रफी के बहुत बड़े प्रशंसक थे और उन्हें कॉपी करते थे। रफी साहब को सुनते-सुनते उनके सुर इतने पक्के हो गए कि वह सातों सुरों में महारत हासिल कर चुके थे। अजीज साहब ने अपने करियर की शुरुआत कोलकाता के ‘ग़ालिब रेस्टोरेंट’ में गाकर की थी। वहीं एक फिल्ममेकर की नजर उन पर पड़ी और उन्हें बंगाली फिल्म में पहला ब्रेक मिला। इसके बाद वह अपनी किस्मत आजमाने मुंबई आ गए, जहां उन्हें कड़ा संघर्ष करना पड़ा।
जब अमिताभ बच्चन के लिए गाया—’मैं हूं मर्द टांगे वाला’
मुंबई में संघर्ष के दिनों में उनकी मुलाकात संगीतकार अनु मलिक से हुई। अनु मलिक अक्सर अजीज साहब से गाने डब करवाया करते थे। साल 1985 में अजीज साहब की किस्मत तब चमकी जब डायरेक्टर मनमोहन देसाई की फिल्म ‘मर्द’ के लिए अनु मलिक ने उन्हें याद किया। अजीज साहब ने अमिताभ बच्चन के लिए ‘मैं हूं मर्द टांगे वाला’ गाना रिकॉर्ड किया। यह गाना ब्लॉकबस्टर साबित हुआ और रातों-रात मोहम्मद अजीज की आवाज देश के कोने-कोने में गूंज उठी।
गोविंदा, सलमान और सनी देओल की बने ‘आवाज’
‘मर्द’ की सफलता के बाद मोहम्मद अजीज बॉलीवुड के सबसे व्यस्त गायकों में से एक बन गए। उन्होंने हिंदी सिनेमा के लगभग सभी बड़े सुपरस्टार्स को अपनी आवाज दी:
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अमिताभ बच्चन: ‘खुदा गवाह’ का आइकॉनिक गाना ‘तू मुझे कुबूल, मैं तुझे कुबूल’।
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गोविंदा: ‘खुदगर्ज’ का सुपरहिट गाना ‘आप के आ जाने से’ और ‘कागज कलम दवात’।
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ऋषि कपूर & सनी देओल: कई रोमांटिक और देशभक्ति गीत।
एक समय ऐसा था जब खुद आशा भोसले संगीतकार आर. डी. बर्मन से मोहम्मद अजीज को काम देने के लिए अड़ गई थीं। बाद में आशा ताई और अजीज साहब ने कई सदाबहार गाने रिकॉर्ड किए।
जीते जी मिला गुमनामी का दर्द, करियर डूबने का नहीं चला पता
इतने बड़े और सफल करियर के बावजूद मोहम्मद अजीज को हमेशा साइडलाइन किया गया। खुद अजीज साहब ने अपने एक पुराने इंटरव्यू में दर्द बयां करते हुए कहा था कि उन्हें इंडस्ट्री में कभी वह पहचान नहीं मिली जिसके वो हकदार थे। उनका करियर कब और कैसे ढलान पर आ गया, उन्हें खुद पता नहीं चला। उन्हें किसी अवॉर्ड फंक्शन में आमंत्रित नहीं किया जाता था और न ही कहीं उनके योगदान का जिक्र होता था।
एयरपोर्ट पर हुए बेहोश और थम गईं सांसें
27 नवंबर 2018 को मोहम्मद अजीज कोलकाता से एक शो करके मुंबई लौट रहे थे। मुंबई एयरपोर्ट पर उतरते ही वह अचानक बेहोश हो गए। उन्हें तुरंत लीलावती अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बाद भी उन्हें बचाया नहीं जा सका। हार्ट अटैक के कारण इस महान गायक ने दुनिया को अलविदा कह दिया।
अंतिम विदाई में नहीं आया कोई बड़ा एक्टर, सोनू निगम ने जताया था दुख
मोहम्मद अजीज के अंतिम सफर की सबसे दुखद बात यह रही कि जिन एक्टर्स को उन्होंने अपनी आवाज के दम पर सुपरस्टार बनाया, उनमें से कोई भी बड़ा अभिनेता उन्हें आखिरी विदाई देने नहीं पहुंचा। हालांकि, संगीत जगत से उदित नारायण, सुखविंदर सिंह, अभिजीत भट्टाचार्य, साधना सरगम, सुरेश वाडकर और श्रवण राठौड़ जैसे दिग्गजों ने नम आंखों से उन्हें अंतिम विदाई दी।
इस बेरुखी पर मशहूर सिंगर सोनू निगम ने भी एक इंटरव्यू में नाराजगी और दुख जाहिर करते हुए कहा था, “इतना बड़ा सिंगर इस दुनिया से चला गया, कम से कम फिल्म इंडस्ट्री को उनके जाने पर सम्मान प्रकट करना चाहिए था।”
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