
प्रेगनेंसी (गर्भावस्था) के दौरान महिलाओं के शरीर में कई तरह के शारीरिक और हार्मोनल बदलाव होते हैं, जिसके चलते हाई ब्लड प्रेशर या जेस्टेशनल हाइपरटेंशन की समस्या होना आम बात है। यदि समय रहते इस पर काबू न पाया जाए, तो यह मां और होने वाले बच्चे दोनों के स्वास्थ्य के लिए जोखिम भरा साबित हो सकता है। मेडिकल एक्सपर्ट्स का मानना है कि सही खान-पान और संतुलित जीवनशैली अपनाकर प्रेगनेंसी के दौरान हाई बीपी को प्राकृतिक रूप से आसानी से कंट्रोल किया जा सकता है।
केला और पोटैशियम युक्त फल
पोटैशियम शरीर में सोडियम के दुष्प्रभावों को संतुलित करने में मदद करता है, जिससे ब्लड प्रेशर नियंत्रित रहता है। केले में भरपूर मात्रा में पोटैशियम पाया जाता है, जिसे गर्भवती महिलाएं अपनी रोजाना की डाइट में आसानी से शामिल कर सकती हैं। इसके अलावा, संतरा, मौसमी और अन्य खट्टे फल विटामिन-सी और एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होते हैं, जो रक्त संचार (Blood Circulation) को बेहतर बनाते हैं और बीपी को सामान्य रखने में सहायता करते हैं।
हरी पत्तेदार सब्जियां और नट्स
पालक, मेथी और अन्य हरी पत्तेदार सब्जियों में मैग्नीशियम और पोटैशियम प्रचुर मात्रा में होते हैं, जो हाई बीपी को कम करने में बेहद असरदार माने जाते हैं। इसके साथ ही, बादाम, अखरोट, अलसी के बीज और चिया सीड्स जैसे नट्स और सीड्स भी हेल्दी फैट्स और मिनरल्स प्रदान करते हैं। ये तत्व न केवल मां के दिल की सेहत का ख्याल रखते हैं, बल्कि गर्भस्थ शिशु के समग्र विकास के लिए भी बहुत फायदेमंद होते हैं।
दही, ओट्स और डॉक्टर की सलाह
कैल्शियम से भरपूर दही ब्लड प्रेशर को रेगुलेट करने में मदद करती है और पेट को ठंडक देती है, जिससे पाचन तंत्र भी दुरुस्त रहता है। सुबह के नाश्ते में ओट्स या फाइबर युक्त साबुत अनाज का सेवन करने से शरीर में कोलेस्ट्रॉल और बीपी दोनों संतुलित रहते हैं। हालांकि, गर्भावस्था एक संवेदनशील अवस्था है, इसलिए अपनी डाइट में किसी भी प्रकार का बड़ा बदलाव करने से पहले अपने गाइनेकोलॉजिस्ट (Gynecologist) या डॉक्टर से परामर्श अवश्य करना चाहिए।
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