
भारतीय सिनेमा के इतिहास में आमिर खान और डायरेक्टर नितेश तिवारी की फिल्म ‘दंगल’ को एक मास्टरपीस माना जाता है। हरियाणा के पहलवान महावीर सिंह फोगाट और उनकी बेटियों गीता-बबीता के संघर्ष पर बनी इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर कमाई के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए थे। आमिर खान को बॉलीवुड में ‘मिस्टर परफेक्टनिस्ट’ कहा जाता है, और नितेश तिवारी को बारीक से बारीक डिटेल्स पर काम करने वाले दिग्गज डायरेक्टर के रूप में जाना जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि दुनिया भर में तारीफ बटोरने वाली इस बेहद परफेक्ट नजर आने वाली फिल्म में भी कई ऐसी गलतियां (Bloopers) और सिनेमैटिक हेरफेर थे, जिन्हें दर्शकों ने पहली, दूसरी या तीसरी बार देखने पर भी नहीं पकड़ा?
नितेश तिवारी ने फिल्म के डायरेक्शन, बैकग्राउंड म्यूजिक और इमोशनल ड्रामा की रफ्तार को इस तरह से सेट किया था कि दर्शक सिनेमाघरों में तालियां बजाते रह गए और पर्दे पर हो रही तकनीकी गलतियों पर किसी का ध्यान ही नहीं गया। सिनेमाई भाषा में इसे ‘सस्पेंशन ऑफ डिसबिलीफ’ कहा जाता है, जहां डायरेक्टर अपनी बेहतरीन कहानी के जरिए दर्शकों को कुछ पलों के लिए इस कदर बांध लेता है कि वे स्क्रीन पर दिख रही गलतियों को भी सच मान बैठते हैं।
गीता फोगाट का फाइनल मैच और कमरे में बंद पिता: नितेश तिवारी का वो सिनेमैटिक दांव
‘दंगल’ के सबसे बड़े क्लाइमेक्स सीन की बात करें तो 2010 कॉमनवेल्थ गेम्स का वो फाइनल मैच हर किसी के रोंगटे खड़े कर देता है। फिल्म में दिखाया गया है कि फाइनल मैच के ठीक पहले गीता फोगाट के भारतीय कोच पी.आर. सोढ़ी (फिल्म में नाम बदला हुआ) साजिश रचते हैं और उनके पिता महावीर सिंह फोगाट (आमिर खान) को एक अंधेरे कमरे में बंद कर देते हैं। इस वजह से महावीर सिंह अपनी बेटी का फाइनल मैच नहीं देख पाते और मैच के आखिरी 5 सेकंड में गीता 5-पॉइंट का थ्रो (Five-Pointer Throw) करके मैच जीतती हैं।
लेकिन असल जिंदगी का सच इससे बिल्कुल अलग है। वास्तव में महावीर सिंह फोगाट को किसी भी कमरे में बंद नहीं किया गया था और वे पूरे समय स्टेडियम में मौजूद थे। इसके अलावा, असली 2010 कॉमनवेल्थ गेम्स के फाइनल में गीता फोगाट ने अपने विरोधी खिलाड़ी को एकतरफा अंदाज में 1-0 और 7-0 से हराया था। वहां आखिरी सेकंड में किसी 5-पॉइंट थ्रो का कोई नाटकीय ड्रामा नहीं हुआ था। नितेश तिवारी ने इस सीन को पूरी तरह से काल्पनिक रूप से री-क्रिएट किया ताकि दर्शकों के मन में डर और उत्सुकता पैदा की जा सके। डायरेक्टर ने दर्शकों को यह महसूस कराया कि यह सब सच में हुआ था, जबकि यह पूरी तरह से एक सिनेमैटिक लिबर्टी (फिल्म की जरूरत के मुताबिक बनाया गया ड्रामा) थी।
स्कोरबोर्ड और टाइमर की गड़बड़ी: कैमरे के एंगल से छिपाया गया ब्लूपर
यदि आप दंगल फिल्म को बहुत ध्यान से और पॉज (Pause) करके देखें, तो कुश्ती के मैचेस के दौरान टाइमर और स्कोरबोर्ड में भारी गलतियां दिखाई देती हैं। फिल्म के एक सब-जूनियर और नेशनल लेवल कुश्ती मैच के दौरान जब स्क्रीन पर घड़ी (Timer) दिखाई जाती है, तो उसमें बचे हुए सेकंड्स आपस में मेल नहीं खाते।
एक फ्रेम में जब रेफरी सीटी बजाता है, तो बैकग्राउंड में लगा टाइमर 15 सेकंड दिखाता है। अगले ही शॉट में जब कैमरा दूसरे एंगल से गीता फोगाट को दिखाता है, तो वही टाइमर अचानक 22 सेकंड पर पहुंच जाता है और फिर अगले कट में सीधे 5 सेकंड हो जाता है। इसी तरह रेफरी द्वारा दिए गए हाथ के इशारे (Points) और इलेक्ट्रॉनिक स्कोरबोर्ड पर चढ़े अंकों में कई जगह विसंगतियां हैं। नितेश तिवारी ने मैच के दौरान बैकग्राउंड में चल रहे ढोल, कमेंट्री और दर्शकों के शोर के जरिए इस टाइमर की गलती को इतनी चालाकी से ढक दिया कि किसी भी सामान्य दर्शक का ध्यान उस घड़ी पर गया ही नहीं।
अपोनेंट खिलाड़ी का नाम और देश का हेरफेर
फिल्म के फाइनल मैच में दिखाया गया है कि गीता फोगाट का मुकाबला ऑस्ट्रेलिया की ‘एंजेलिना वॉटसन’ नाम की पहलवान से होता है। लेकिन इतिहास के पन्नों को पलटें तो 2010 के राष्ट्रमंडल खेलों के फाइनल में गीता फोगाट का मुकाबला ऑस्ट्रेलिया की एमिली बेनस्टेड (Emily Bensted) से हुआ था।
फिल्म में जिस ‘नाइजीरिया’ और अन्य देशों के पहलवानों के मैच दिखाए गए हैं, उनके नाम और राउंड्स को भी फिल्म की कहानी को ज्यादा आसान और मनोरंजक बनाने के लिए बदल दिया गया था। नितेश तिवारी जानते थे कि एक आम भारतीय दर्शक के लिए असली नामों की जटिलता से ज्यादा यह मायने रखता है कि भारत का तिरंगा ऊपर उठ रहा है या नहीं। इसलिए उन्होंने किरदारों के नाम और विरोधी देशों के सीक्वेंस में बदलाव किए और दर्शक इस बात को बिना सवाल उठाए स्वीकार कर गए।
बालों की लंबाई और आमिर खान का बॉडी ट्रांसफॉर्मेशन ब्लूपर
फिल्म में यंग गीता और बबीता के बचपन से लेकर बड़े होने तक के सफर को दिखाया गया है। जब महावीर सिंह फोगाट अपनी बेटियों के बाल कटवाते हैं, तो अगले ही कुछ सीन्स में दंगल लड़ते वक्त गीता और बबीता के बालों की लंबाई शॉट्स के हिसाब से छोटी-बड़ी होती दिखती है। एक सीन में बाल ज्यादा छोटे दिखते हैं, तो तुरंत अगले सीन में बाल थोड़े लंबे नजर आते हैं।
इसके अलावा, आमिर खान के वजन घटाने और बढ़ाने के सीक्वेंस में भी बैकग्राउंड डिटेल्स में कुछ कमियां रह गई थीं। जब आमिर खान 55 साल के बूढ़े महावीर फोगाट के रोल में होते हैं और फिर फ्लैशबैक में युवा पहलवान के रूप में दिखते हैं, तो अखाड़े के आसपास लगे कुछ विज्ञापन और गाड़ियों के मॉडल उस दौर से मेल नहीं खाते थे जिस दौर को स्क्रीन पर दिखाया जा रहा था।
नितेश तिवारी का मास्टरमाइंड डायरेक्शन: क्यों हिट रहीं ये ‘गलतियां’?
फिल्मी दुनिया में इसे ही कुशल निर्देशन कहा जाता है। नितेश तिवारी ने ‘दंगल’ में यह साबित कर दिया कि अगर आपकी कहानी की आत्मा मजबूत है और कलाकारों का अभिनय (Performance) सच्चा है, तो छोटी-मोटी तकनीकी गलतियां फिल्म के अनुभव को खराब नहीं कर सकतीं।
आमिर खान की मेहनत, प्रीतम का संगीत और फातिमा सना शेख व सान्या मल्होत्रा की दमदार कुश्ती ने दर्शकों को इस कदर बांधे रखा कि लोग फिल्म में इतने मग्न हो गए कि वे इन बारीक ब्लूपर्स को पकड़ ही नहीं पाए। यही वजह है कि आज सालों बाद भी जब ‘दंगल’ के इन सीन्स का सच सामने आता है, तो लोग हंस पड़ते हैं और नितेश तिवारी की उस होशियारी की दाद देते हैं जिससे उन्होंने पूरे देश को थियेटर में मंत्रमुग्ध कर दिया था।
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