‘Gen Z में कौन है सबसे पॉपुलर नेता?’, कॉकरोच जनता पार्टी के अभिजीत दीपके ने थलपति विजय पर जताया भरोसा; बेस्ट CM के सवाल पर स्टालिन, विजयन और केजरीवाल के काम को सराहा

देश की राजनीति में युवाओं, बेरोजगारी और परीक्षा पेपर लीक जैसे मुद्दों को लेकर मुखर रहने वाली ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के संस्थापक और राष्ट्रीय संयोजक अभिजीत दीपके इन दिनों अपने बेबाक बयानों को लेकर राष्ट्रीय सुर्खियों में हैं। दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के अधिकारों के लिए हुए बड़े आंदोलनों से पहचान बनाने वाले 30 वर्षीय अभिजीत दीपके ने हाल ही में एक प्रमुख समाचार चैनल के कार्यक्रम में शिरकत की। इस दौरान जब उनसे देश में नई पीढ़ी यानी जनरेशन-जेड (Gen Z) के सबसे लोकप्रिय राजनेता, पसंदीदा युवा चेहरे और अब तक के सर्वश्रेष्ठ मुख्यमंत्रियों को लेकर सवाल पूछे गए, तो उनके जवाबों ने राजनीतिक गलियारों में एक नई बहस छेड़ दी है। जहां एक तरफ उन्होंने दक्षिण भारतीय अभिनेता से राजनेता बने थलपति विजय को Gen Z का सबसे प्रभावशाली नेता बताया, वहीं दूसरी तरफ देश के बेस्ट सीएम के सवाल पर उन्होंने दक्षिण और उत्तर भारत के तीन गैर-बीजेपी मुख्यमंत्रियों के विकास मॉडलों की खुलकर सराहना की।

Gen Z में कौन है सबसे पॉपुलर नेता? थलपति विजय का लिया नाम

न्यूज24 के विशेष कार्यक्रम में जब एंकर ने सीधा सवाल किया कि आज की तारीख में देश की नई पीढ़ी यानी Gen Z (14 से 30 वर्ष के युवा वर्ग) के बीच सबसे ज्यादा लोकप्रिय नेता कौन है, तो मंच पर मौजूद CJP के एक अन्य नेता ने तुरंत अभिजीत दीपके का ही नाम ले लिया। हालांकि, खुद अभिजीत दीपके ने बेहद विनम्रता से इसे टालते हुए कहा कि यह उपाधि उनकी नहीं हो सकती।

अपनी व्यक्तिगत राय रखते हुए दीपके ने कहा, “मुझे लगता है कि जो थलपति विजय ने किया है, वह एक हो सकते हैं। उनका पूरा राजनीतिक अभियान और जमीनी कनेक्ट पूरी तरह से युवाओं और नई पीढ़ी की प्राथमिकताओं को ध्यान में रखकर गढ़ा गया है।” इसी चर्चा के दौरान CJP के मुख्य प्रवक्ता और रिसर्च एक्टिविस्ट सौरभ दास ने भी सहमति जताते हुए कहा कि दक्षिण भारत में विजय की बहुत बड़ी और समर्पित युवा फैन फॉलोइंग है। गौरतलब है कि तमिल सिनेमा के सुपरस्टार सी. जोसेफ विजय ने अपनी राजनीतिक पार्टी ‘तमिलगा वेट्री कझगम’ (TVK) का गठन कर छात्र-छात्राओं की शिक्षा और सामाजिक बदलाव को अपने एजेंडे का केंद्र बनाया है।

देश के बेस्ट चीफ मिनिस्टर कौन? स्टालिन, विजयन और केजरीवाल के मॉडल की तारीफ

इंटरव्यू के दौरान जब एंकर ने दीपके से पूछा कि वे देश का अब तक का सबसे अच्छा मुख्यमंत्री (Best CM) किसे मानते हैं, तो दीपके ने किसी एक चेहरे को चुनने के बजाय विभिन्न राज्यों में हुए सकारात्मक कार्यों का तथ्यात्मक उल्लेख किया।

अभिजीत दीपके ने कहा, “ऐसे तो कई सारे रहे हैं जिन्होंने अपने-अपने क्षेत्रों में बेहतरीन काम किया है। एम. के. स्टालिन ने तमिलनाडु की अर्थव्यवस्था और औद्योगिक निवेश को बहुत मजबूत किया, एक वह हो गए। इसके अलावा पिनाराई विजयन ने केरल में हेल्थकेयर मॉडल और एजुकेशन सिस्टम पर काफी अच्छा काम किया था। वहीं दिल्ली में अरविंद केजरीवाल जी ने भी सरकारी स्कूलों के बुनियादी ढांचे और मोहल्ला क्लीनिक/हेल्थकेयर के क्षेत्र में बहुत शानदार काम किया था। मैं पूरी ईमानदारी से कहूंगा कि जिस सरकार ने धरातल पर अच्छा काम किया है, उसकी सराहना की जानी चाहिए, चाहे वह किसी भी दल से हो।”

‘जिस उम्र में लोग रिटायर होते हैं…’ युवा नेताओं की उम्र पर कसा तंज

जब दीपके से पूछा गया कि भारतीय राजनीति में मुख्यधारा की पार्टियों में उनका सबसे पसंदीदा ‘युवा नेता’ कौन है, तो उन्होंने वर्तमान राजनीतिक व्यवस्था और नेताओं की उम्र की विडंबना पर चुटीला तंज कसा।

दीपके ने मुस्कुराते हुए कहा, “ईमानदारी से कहूं तो मुझे वर्तमान में कोई युवा नेता ऐसा नजर नहीं आता। क्योंकि आप नेताओं की उम्र देखिए न, सब बड़े हो चुके हैं। जिस उम्र में बाकी नौकरियों और प्रोफेशन्स में लोग रिटायरमेंट की कगार पर पहुंच जाते हैं, उस 50-55 साल की उम्र में भी हमारे देश की राजनीति में उन्हें ‘युवा नेता’ कहा जाता है। ऐसे में जब वास्तविक युवा पीढ़ी यानी 20-25 साल के युवाओं को मुख्यधारा की राजनीति में नीति-निर्माण का नेतृत्व ही नहीं मिल रहा है, तो किसी को पसंदीदा युवा नेता कैसे माना जाए?”

शहजाद पूनावाला का पलटवार: सीजेपी और मुख्यमंत्रियों की पसंद पर तीखे सवाल

अभिजीत दीपके द्वारा स्टालिन, विजयन और केजरीवाल के शासन मॉडल की तारीफ करने के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं। हाल ही में भारतीय जनता पार्टी छोड़ने वाले राजनीतिक विश्लेषक शहजाद पूनावाला ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर एक वीडियो जारी कर CJP और अभिजीत दीपके पर तीखा हमला बोला। पूनावाला ने CJP की टीम को ‘फ्रॉडियों का झुंड’ करार देते हुए सवाल उठाया कि दीपके ने जिन मुख्यमंत्रियों को अच्छा बताया है, अगर उनका काम इतना ही बेहतरीन था तो फिर उनके राज्यों की जनता ने चुनावी नतीजों में उन्हें क्यों नकार दिया?

पूनावाला ने तमिलनाडु के बढ़ते सार्वजनिक कर्ज, केरल में स्वास्थ्य प्रबंधन से जुड़े विवादों और दिल्ली में आबकारी नीति का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि CJP का रुख एकतरफा है। वहीं दूसरी तरफ, महाराष्ट्र में शिवसेना (UBT) नेता संजय राउत ने भाजपा नेताओं पर तंज कसते हुए कहा था कि सत्ताधारी दलों को अपने दफ्तरों में अभिजीत दीपके की तस्वीरें लगानी चाहिए, क्योंकि दीपके के आंदोलनों के बाद ही मुख्यधारा के नेताओं को यह समझ आया कि देश में ‘Gen Z’ नाम की भी कोई ताकत मौजूद है।

5 सितंबर को दिल्ली में शांतिपूर्ण महा-मार्च: स्कूलों की बदहाली पर छेड़ा अभियान

अभिजीत दीपके और उनकी कॉकरोच जनता पार्टी अब अपने छात्र आंदोलन को एक नए मुकाम पर ले जाने की तैयारी कर रही है। पार्टी ने शिक्षक दिवस के अवसर पर 5 सितंबर को राजधानी दिल्ली की सड़कों पर एक विशाल और शांतिपूर्ण मार्च निकालने की औपचारिक घोषणा की है।

इस मार्च से पहले CJP ने देश के सभी राज्यों के शिक्षा मंत्रियों को आधिकारिक पत्र भेजकर पिछले 5 वर्षों में सरकारी प्राथमिक व माध्यमिक विद्यालयों में बुनियादी सुविधाओं (सुरक्षित पेयजल, क्रियाशील शौचालय, बैठने के लिए बेंच, पंखे और क्लासरूम), शिक्षकों के खाली पड़े पदों और स्कूलों के विकास बजट के खर्च की विस्तृत जानकारी मांगी है। दीपके ने कहा कि डिजिटल युग में आज भी देश के लाखों बच्चे टूटी छतों और बिना बेंच वाले सरकारी स्कूलों में पढ़ने को मजबूर हैं, जिसे CJP राष्ट्रीय स्तर पर एक नागरिक अधिकार आंदोलन बनाएगी।

कौन हैं अभिजीत दीपके और कैसे खड़ा हुआ ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ आंदोलन?

महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर (औरंगाबाद) के एक साधारण दलित परिवार में जन्मे अभिजीत दीपके अमेरिका के बोस्टन से पब्लिक रिलेशंस में उच्च शिक्षा प्राप्त कर चुके हैं। मई के महीने में जब देश भर में नीट और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक को लेकर छात्र आक्रोश में थे, तब सुप्रीम कोर्ट की एक मौखिक टिप्पणी के संदर्भ में दीपके ने सोशल मीडिया पर केवल छह शब्दों की एक व्यंग्यात्मक पोस्ट लिखी थी—”व्हाट इफ ऑल कॉकरोचेज कम टुगेदर?” (क्या होगा अगर सभी कॉकरोच एक साथ आ जाएं?)।

देखते ही देखते यह सोशल मीडिया पोस्ट एक संगठित जन-आंदोलन में तब्दील हो गई। दीपके भारत लौटे और दिल्ली के जंतर-मंतर पर डेरा डालकर महीनों तक प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता और शिक्षा सुधारों के लिए शांतिपूर्ण प्रदर्शन का नेतृत्व किया। हाल ही में CJP ने अपनी 12 सदस्यीय राष्ट्रीय कार्यसमिति की घोषणा की है, जिसमें 7 सदस्य खुद Gen Z आयु वर्ग (30 वर्ष से कम) के हैं। CJP नेताओं ने स्पष्ट किया है कि वे इसे किसी पारंपरिक राजनीतिक दल में बदलने के बजाय गैर-राजनीतिक धरातल पर छात्रों, बेरोजगार युवाओं और कर्मचारियों की आवाज उठाने वाले एक स्वतंत्र नागरिक मंच के रूप में संचालित करेंगे।

भारतीय राजनीति में Gen Z का नया विमर्श और बदलती प्राथमिकतियां

अभिजीत दीपके का यह पूरा बयान इस बात का पुख्ता संकेत है कि भारत की राजनीति में पहली बार 1995 से 2012 के बीच जन्मी पीढ़ी (Gen Z) अपनी प्राथमिकताओं को पारंपरिक जातिगत और भावनात्मक मुद्दों से अलग हटकर तय कर रही है। आज का युवा नेता की पहचान उसकी उम्र, सरकारी स्कूलों की वास्तविक स्थिति, सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं, रोजगार के अवसरों और आधुनिक आर्थिक दृष्टिकोण के आधार पर कर रहा है। थलपति विजय की लोकप्रियता और मुख्यमंत्रियों के कामकाज के मॉडलों पर दीपके की यह खुली टिप्पणी यह दर्शाती है कि आने वाले समय में देश की मुख्यधारा की राजनीतिक पार्टियों को युवाओं का विश्वास जीतने के लिए खोखले नारों के बजाय ठोस विकास और जवाबदेही के एजेंडे पर ही आगे बढ़ना होगा।

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