
उत्तर प्रदेश में पिछले तीन दिनों से लगातार जारी रुक-रुक कर और मूसलाधार मानसूनी बारिश ने विकराल रूप धारण कर लिया है। प्रदेश के कई हिस्से जलप्रलय और आकाशीय आपदा की चपेट में आ गए हैं। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के लखनऊ स्थित आंचलिक मौसम विज्ञान केंद्र ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश और विशेष रूप से बुंदेलखंड क्षेत्र के 7 जिलों के लिए अत्यंत भारी बारिश का ‘रेड अलर्ट’ जारी किया है। जिन सात जिलों में मौसम विभाग ने अत्यधिक सतर्कता बरतने की चेतावनी दी है, उनमें इटावा, औरैया, जालौन, हमीरपुर, महोबा, झांसी और ललितपुर शामिल हैं। इन इलाकों में अगले 24 से 48 घंटों के दौरान आंधी-तूफान, बादलों की तेज गर्जना, आकाशीय बिजली गिरने और अत्यधिक मूसलाधार बारिश होने की गंभीर संभावना जताई गई है। भारी बारिश की चेतावनी को देखते हुए संबंधित जिला प्रशासनों ने आपदा प्रबंधन टीमों को अलर्ट मोड पर डाल दिया है और लोगों को अत्यंत आवश्यक कार्य होने पर ही पक्के मकानों से बाहर निकलने की सख्त सलाह दी है।
हादसों और आकाशीय बिजली से 10 लोगों की मौत: परिवारों में पसरा मातम
खराब मौसम और लगातार हो रही बारिश राज्य भर में काल बनकर टूटी है। बीते 24 से 36 घंटों के दौरान बुंदेलखंड, पूर्वांचल और अवध के विभिन्न जनपदों में कच्ची दीवारें ढहने, मकान गिरने और आकाशीय बिजली (वज्रपात) की चपेट में आने से कुल 10 लोगों की असामयिक मौत हो चुकी है, जबकि दर्जनों लोग गंभीर रूप से घायल हैं:
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सुलतानपुर में कच्ची दीवार गिरी: सुलतानपुर जिले के धम्मौर थाना क्षेत्र अंतर्गत अंकारीपुर गांव में लगातार हो रही बरसात से सीलन भरी कच्ची दीवार भरभरा कर सो रहे दंपती पर गिर गई। मलबे के नीचे दबने से एक युवक की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि उसकी पत्नी गंभीर रूप से घायल हो गई।
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अंबेडकरनगर में दो लोगों की जान गई: अंबेडकरनगर के मालीपुर थाना क्षेत्र के इस्माइलगंज गांव में बारिश के कारण अचानक कच्ची दीवार ढह जाने से एक अधेड़ व्यक्ति मलबे में दबकर दम तोड़ बैठा। वहीं दूसरी घटना बसखारी थाना क्षेत्र के नाऊनगर में घटी, जहां खुले खेत में काम करते समय आकाशीय बिजली गिरने से एक किसान की मौके पर ही मौत हो गई।
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बांदा में पिता-पुत्री की मौत: बांदा जिले में भारी बारिश के बीच मकान की पुरानी दीवार ढहने से नीचे खड़े पिता और मासूम पुत्री मलबे में दब गए, जिससे दोनों की जान चली गई।
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उन्नाव में दादा-पोते की गई जान: उन्नाव के ग्रामीण क्षेत्र में बारिश के चलते एक पुराना कच्चा मकान अचानक जमींदोज हो गया। मलबे में दबकर दादा और उनके पोते की दर्दनाक मौत हो गई।
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हमीरपुर में छत पर पन्नी बिछाते वक्त हादसा: हमीरपुर में टपकती छत को बारिश से बचाने के लिए उस पर प्लास्टिक (पन्नी) बिछा रहे एक फर्नीचर कारीगर का पैर फिसल गया और नीचे गिरने से उसकी मौत हो गई। इसके अतिरिक्त बुंदेलखंड के अन्य इलाकों में भी जलजमाव और कच्चे निर्माण टूटने से कई लोग हताहत हुए हैं।
हमीरपुर में 220 मिलीमीटर बारिश का रिकॉर्ड, बुंदेलखंड के बांधों का जलस्तर बढ़ा
लखनऊ मौसम मुख्यालय से जारी आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, बीते 24 घंटों में सबसे भयावह स्थिति हमीरपुर में देखने को मिली, जहां रिकॉर्ड 220 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है। इसके अलावा आसपास के जनपदों में भी जमकर मेघ बरसे हैं:
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महोबा: 155 मिलीमीटर
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बांदा: 123.2 मिलीमीटर
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चंदौली: 117 मिलीमीटर
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जालौन (कालपी): 109.4 मिलीमीटर
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इटावा (चक्कर नगर): 105 मिलीमीटर
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रायबरेली: 95.2 मिलीमीटर
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कानपुर नगर: 84.1 मिलीमीटर
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अंबेडकरनगर (जलालपुर): 82.4 मिलीमीटर
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फतेहपुर (बिंदकी): 72.3 मिलीमीटर
बुंदेलखंड की बेतवा, केन, यमुना और धसान नदियां उफान पर हैं, जिससे निचले इलाकों में पानी घुसने लगा है। कई प्रमुख बांधों के गेट खोलकर पानी छोड़ा जा रहा है, जिससे तटीय गांवों में अलर्ट घोषित किया गया है।
फर्रुखाबाद में गंगा-रामगंगा का उफान: 70 गांव बाढ़ से घिरे, 72 स्कूलों में पढ़ाई ठप
मध्य उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद जिले में पहाड़ों पर हो रही वर्षा और बैराजों से लगातार छोड़े जा रहे पानी के कारण गंगा और रामगंगा दोनों नदियां खतरे के निशान के करीब बह रही हैं। फर्रुखाबाद के लगभग 70 गांव बाढ़ के पानी से चारों तरफ से घिर गए हैं।
कटरी क्षेत्र के 72 प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों में पानी भर जाने के कारण पठन-पाठन पूरी तरह ठप हो गया है। प्रशासन ने एहतियात के तौर पर बाढ़ प्रभावित 20 गांवों की बिजली आपूर्ति काट दी है ताकि करंट फैलने का खतरा न रहे। चौरा गांव के पास शमसाबाद-शाहजहांपुर मुख्य मार्ग पर दो से तीन फीट तक पानी बहने के कारण दर्जनों गांवों का सड़क संपर्क जिला मुख्यालय से पूरी तरह कट चुका है, और ग्रामीण नावों के सहारे सुरक्षित स्थानों पर पलायन करने को मजबूर हैं।
प्रशासन की एडवाइजरी: आकाशीय बिजली और भारी बारिश से कैसे करें बचाव?
राहत आयुक्त कार्यालय और राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SDMA) ने सभी जिलाधिकारियों को 24 घंटे नियंत्रण कक्ष (Control Rooms) सक्रिय रखने और फील्ड अधिकारियों को जलभराव वाले क्षेत्रों में तैनात रहने के निर्देश दिए हैं। आम जनता के लिए विशेष सुरक्षा दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं:
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पुराने व जर्जर मकानों से दूरी बनाएं: लगातार बारिश से कच्चे मकानों और पुरानी ईंटों की दीवारों में सीलन आ जाती है, जिससे उनके अचानक ढहने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे ढांचों के नीचे बैठने या सोने से बचें।
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बिजली चमकते समय पेड़ों के नीचे शरण न लें: आकाशीय बिजली कड़कने के दौरान कभी भी खुले मैदान में खड़े न रहें और न ही किसी ऊंचे पेड़ या बिजली के खंभे के नीचे खड़े हों।
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इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का उपयोग बंद करें: गरज-चमक के समय मोबाइल फोन को चार्जिंग पर न लगाएं और घर के भारी बिजली उपकरणों के प्लग निकाल दें।
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जलभराव वाले रास्तों पर गाड़ी न चलाएं: पानी से लबालब भरी सड़कों, पुलियाओं और अंडरपास में जाने से बचें क्योंकि बहाव का अंदाजा न होने से वाहन बहने की आशंका रहती है।
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किसानों को सलाह: किसान भाई मौसम खराब रहने तक खुले खेतों में काम करने, खाद डालने या पशु चराने से पूरी तरह परहेज करें।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, मध्य भारत के ऊपर बने डिप्रेशन और मॉनसून ट्रफ के उत्तर की ओर खिसकने के कारण उत्तर प्रदेश में बारिश का यह सिलसिला अगले दो से तीन दिनों तक लगातार बना रहेगा, जिसके चलते तापमान में भी 3 से 5 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट दर्ज की गई है।
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