लखनऊ | उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने रबी विपणन वर्ष 2026-27 के लिए किसानों के हित में बड़ा फैसला लेते हुए दलहनी और तिलहनी फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) और खरीद की विस्तृत कार्ययोजना जारी कर दी है। मंगलवार को कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बताया कि इस वर्ष न केवल एमएसपी दरों में वृद्धि की गई है, बल्कि खरीद के लक्ष्यों को भी ऐतिहासिक स्तर पर रखा गया है।
नई एमएसपी दरें: पिछले वर्ष के मुकाबले कितनी हुई बढ़ोतरी?
सरकार ने इस वर्ष दलहन और तिलहन की खेती करने वाले किसानों को ‘आर्थिक सुरक्षा कवच’ देने के लिए दरों में ₹225 से ₹300 प्रति क्विंटल तक की वृद्धि की है:
| फसल | नया एमएसपी (₹ प्रति क्विंटल) | पिछले वर्ष से वृद्धि (₹) |
| अरहर | 8,000 | – |
| मसूर | 7,000 | + 300 |
| सरसों | 6,200 | + 250 |
| चना | 5,875 | + 225 |
खरीद की समयसीमा और बड़े लक्ष्य
प्रदेश में सरकारी खरीद की प्रक्रिया 2 अप्रैल 2026 से शुरू होकर 30 जून 2026 तक (कुल 90 दिन) चलेगी। सरकार ने इस बार शत-प्रतिशत खरीद का लक्ष्य रखा है:
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मसूर: 6.77 लाख मीट्रिक टन (उत्पादन का 100%)
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सरसों: 5.30 लाख मीट्रिक टन
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चना: 2.24 लाख मीट्रिक टन
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अरहर: 1.14 लाख मीट्रिक टन
बिचौलियों पर लगाम: ‘आधार’ से जुड़ी पारदर्शी व्यवस्था
कृषि मंत्री ने स्पष्ट किया कि पिछली सरकारों के विपरीत, योगी सरकार दलहन और तिलहन की खरीद को प्राथमिकता दे रही है। भ्रष्टाचार और बिचौलियों को खत्म करने के लिए सरकार ने निम्नलिखित कदम उठाए हैं:
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PoS मशीनें: प्रत्येक क्रय केंद्र पर ‘आधार-सक्षम’ पीओएस मशीनें लगाई गई हैं ताकि वास्तविक किसान की ही पहचान हो सके।
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DBT भुगतान: किसानों की उपज का पैसा किसी चेक या नकद के बजाय सीधे उनके आधार-लिंक्ड बैंक खातों में भेजा जाएगा।
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6 एजेंसियां: खरीद प्रक्रिया को सुचारू बनाने के लिए नैफेड (NAFED) और एनसीसीएफ (NCCF) जैसी 2 केंद्रीय और यूपीपीसीयू, यूपीपीसीएफ जैसी 4 राज्य स्तरीय एजेंसियां तैनात की गई हैं।
190 से अधिक क्रय केंद्र
इस वर्ष नैफेड और एनसीसीएफ द्वारा सीधी खरीद के लिए 190 से अधिक केंद्र खोलने का प्रस्ताव है। इसके अतिरिक्त राज्य एजेंसियां भी अपने केंद्र संचालित करेंगी। पिछले वर्ष इस योजना से 20 हजार से अधिक किसानों को लाभ मिला था, जिसे इस वर्ष और अधिक व्यापक बनाने का लक्ष्य है।
मुख्य बिंदु (Highlights):
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7 अप्रैल से 30 जून तक चलेगी मुख्य खरीद प्रक्रिया (प्रेस वार्ता के अनुसार)।
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मसूर पर सबसे अधिक ₹300 की वृद्धि।
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भुगतान सीधे किसानों के खातों में डीबीटी के जरिए।
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कुल 6 एजेंसियां मिलकर करेंगी खरीद।
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