
लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती ने एक बार फिर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए तीखा हमला बोला है। उन्होंने कांग्रेस को आड़े हाथों लेते हुए स्पष्ट शब्दों में कहा कि कांग्रेस की हमेशा से रही दलित विरोधी नीतियों और उपेक्षापूर्ण रवैये का ही परिणाम था कि बहुजन समाज पार्टी (बसपा) जैसा संगठन अस्तित्व में आया। मायावती के इस बयान ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर गर्माहट पैदा कर दी है, जहां उन्होंने पुराने जख्मों को कुरेदते हुए कांग्रेस की मंशा पर सवाल उठाए हैं।
कांग्रेस और सपा पर ‘अपमान’ का गंभीर आरोप
मायावती ने केवल नीतियों तक ही सीमित नहीं रहीं, बल्कि उन्होंने कांग्रेस और समाजवादी पार्टी पर बेहद गंभीर और भावनात्मक आरोप भी लगाए। उन्होंने कहा कि जब बहुजन नायक मान्यवर कांशीराम जी का निधन हुआ था, तब इन दोनों ही दलों ने संवेदनहीनता की पराकाष्ठा पार कर दी थी। बसपा प्रमुख ने याद दिलाया कि कांशीराम जी के देहांत पर न तो कांग्रेस और न ही सपा सरकार ने राजकीय शोक घोषित करने की जहमत उठाई थी। उन्होंने इसे दलित समाज के महापुरुषों का अपमान करार देते हुए कार्यकर्ताओं को इन दलों की असलियत पहचानने की नसीहत दी।
15 मार्च को कांशीराम जयंती पर शक्ति प्रदर्शन की तैयारी
आगामी कार्यक्रमों की रूपरेखा तय करते हुए मायावती ने पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों में जोश भरा। उन्होंने अपील की कि 15 मार्च को मान्यवर कांशीराम जी की जयंती के अवसर पर आयोजित होने वाले सभी कार्यक्रमों को पूरी भव्यता और अनुशासन के साथ सफल बनाया जाए। मायावती का मानना है कि यह आयोजन केवल एक जयंती नहीं, बल्कि बसपा की ताकत और विचारधारा का प्रदर्शन होगा। उन्होंने कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे गांव-गांव जाकर दलितों और पिछड़ों को उन ताकतों के बारे में बताएं जिन्होंने हमेशा उनके हक की अनदेखी की है।
बसपा का ‘मिशन मोड’: कार्यकर्ताओं को एकजुट होने का आह्वान
चुनावी समीकरणों और दलित वोट बैंक को साधने की कोशिश में मायावती ने एक बार फिर ‘बहुजन’ अस्मिता का कार्ड खेला है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा कि कांशीराम जयंती के कार्यक्रमों के जरिए पार्टी की विचारधारा को जन-जन तक पहुंचाना है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मायावती का यह रुख आगामी चुनावों से पहले अपने कैडर को रिचार्ज करने और दलित मतों को कांग्रेस या सपा की ओर जाने से रोकने की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। अब देखना यह होगा कि मायावती के इन आरोपों पर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी की ओर से क्या प्रतिक्रिया आती है।
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