CDSCO की बड़ी चेतावनी: बगैर पर्चे के ली जाने वाली इन दवाओं से फेल हो सकती है किडनी, तुरंत बरतें सावधानी

सिरदर्द, बदन दर्द, जोड़ों की जकड़न या हल्का बुखार होते ही मेडिकल स्टोर से खुद दवा खरीदकर खा लेने की आदत अब बेहद जानलेवा साबित हो सकती है। भारत की शीर्ष दवा नियामक संस्था केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) ने बिना डॉक्टर के पर्चे (Over-The-Counter यानी OTC) के मिलने वाली दवाओं और विशेष रूप से दर्द निवारक गोलियों (Painkillers) के अंधाधुंध इस्तेमाल को लेकर एक गंभीर सार्वजनिक चेतावनी और सुरक्षा एडवाइजरी जारी की है। नियामक संस्था ने साफ शब्दों में आगाह किया है कि आम समझी जाने वाली नॉन-स्टेरॉयडल एंटी-इन्फ्लेमेटरी दवाएं (NSAIDs) बिना चिकित्सकीय परामर्श और लंबे समय तक खाने से इंसान के गुर्दों (Kidneys) को अपूरणीय क्षति पहुंचा सकती हैं, जिससे अचानक या स्थायी किडनी फेलियर का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

दर्दनिवारक दवाओं का अनियंत्रित सेवन कैसे पहुंचाता है किडनी को नुकसान?

सीडीएससीओ और देश के शीर्ष नेफ्रोलॉजिस्ट्स (गुर्दा रोग विशेषज्ञ) के अनुसार, लोग दर्द से तुरंत राहत पाने के लिए आइबुप्रोफेन (Ibuprofen), डिक्लोफेनाक (Diclofenac), नेप्रोक्सन (Naproxen) और मेफेनामिक एसिड जैसी दवाओं का नियमित सेवन करने लगते हैं।

ये दवाएं शरीर में दर्द और सूजन पैदा करने वाले ‘प्रोस्टाग्लैंडिन्स’ (Prostaglandins) नामक रसायन के उत्पादन को रोकती हैं। हालांकि, प्रोस्टाग्लैंडिन्स का काम केवल दर्द पैदा करना नहीं होता, बल्कि यह किडनी की रक्त वाहिकाओं को फैलाकर वहां तक पर्याप्त रक्त संचार (Blood Flow) बनाए रखने में सबसे अहम भूमिका निभाता है। जब कोई व्यक्ति लगातार या अधिक मात्रा में ये दवाएं लेता है, तो किडनी की सूक्ष्म धमनियों में खून का बहाव अचानक बहुत कम हो जाता है। पर्याप्त ऑक्सीजन और खून न मिलने के कारण किडनी के फिल्टर (नेफ्रॉन्स) डैमेज होने लगते हैं। इस स्थिति को मेडिकल भाषा में ‘एनाल्जेसिक नेफ्रोपैथी’ (Analgesic Nephropathy) या ‘एक्यूट किडनी इंजरी’ (AKI) कहा जाता है।

किन लोगों पर मंडरा रहा है सबसे अधिक जानलेवा खतरा?

सीडीएससीओ की एडवाइजरी में रेखांकित किया गया है कि बिना पर्चे के मिलने वाली दर्द निवारक दवाओं का असर हर व्यक्ति पर एक जैसा नहीं होता, लेकिन कुछ विशेष श्रेणियों के लोगों के लिए यह जहर के समान काम कर सकती हैं:

  • बुजुर्ग नागरिक (60 वर्ष से अधिक): उम्र बढ़ने के साथ किडनी की कार्यक्षमता पहले से ही कम होने लगती है, ऐसे में इन दवाओं का हल्का डोज भी गुर्दे खराब कर सकता है।

  • डायबिटीज और हाई बीपी के मरीज: जिन लोगों को लंबे समय से उच्च रक्तचाप या शुगर की समस्या है, उनकी किडनी की नसें पहले से संवेदनशील होती हैं।

  • डिहाइड्रेशन (पानी की कमी) से जूझ रहे लोग: दस्त, उल्टी या कम पानी पीने वाले लोगों में पेनकिलर्स का सेवन सीधे तौर पर एक्यूट रीनल फेलियर को ट्रिगर कर सकता है।

  • हृदय और लिवर के मरीज: हार्ट फेलियर या सिरोसिस से पीड़ित मरीजों के लिए ये दवाएं अत्यधिक जोखिम भरी हैं।

सिर्फ पेनकिलर्स ही नहीं, एंटासिड और बिना पर्चे के एंटीबायोटिक भी खतरनाक

सीडीएससीओ ने अपनी विस्तृत चेतावनी में केवल पेनकिलर्स ही नहीं, बल्कि पेट में गैस और एसिडिटी के नाम पर लगातार खाई जाने वाली दवाओं (PPIs जैसे ओमेप्राजोल, पेंटोप्राजोल) और अनधिकृत एंटीबायोटिक्स के खुद से सेवन पर भी चिंता जताई है। नियामक ने बताया कि महीनों तक बिना डॉक्टर की राय के गैस की गोलियां खाने से किडनी में क्रोनिक इंटरस्टीशियल नेफ्राइटिस (गुर्दों में सूजन) की शिकायत हो सकती है, जो आगे चलकर क्रोनिक किडनी डिजीज (CKD) में तब्दील हो जाती है।

किडनी डैमेज होने के शुरुआती लक्षण, जिन्हें नजरअंदाज न करें

अक्सर लोग तब तक दवाएं खाते रहते हैं जब तक कि किडनी 70 से 80 प्रतिशत तक खराब न हो जाए। सीडीएससीओ ने मरीजों को इन शुरुआती संकेतों के प्रति सतर्क रहने की सलाह दी है:

  1. पैरों, टखनों, पिंडलियों या आंखों के नीचे असामान्य सूजन आना।

  2. पेशाब की मात्रा में अचानक कमी आना या पेशाब का रंग गहरा/झागदार होना।

  3. बिना किसी भारी काम के लगातार अत्यधिक थकान, सुस्ती और कमजोरी महसूस होना।

  4. भूख में कमी, मतली, उल्टी का अहसास और मुंह में धातु जैसा अजीब स्वाद आना।

  5. त्वचा पर अत्यधिक खुजली होना या ब्लड प्रेशर का अचानक अनियंत्रित हो जाना।

फार्मेसियों और डॉक्टरों के लिए सख्त दिशानिर्देश

केंद्रीय दवा नियामक ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के औषधि नियंत्रकों (State Drug Controllers) को निर्देश दिया है कि वे मेडिकल स्टोरों पर औचक निरीक्षण करें। शेड्यूल-एच (Schedule H) और शेड्यूल-एच1 (Schedule H1) के अंतर्गत आने वाली दवाओं को बिना किसी पंजीकृत मेडिकल प्रैक्टिशनर के वैध पर्चे के बेचना पूरी तरह गैरकानूनी है। नियमों का उल्लंघन कर काउंटर से सीधे पेनकिलर और एंटीबायोटिक थमाने वाले दवा विक्रेताओं के लाइसेंस रद्द करने के आदेश दिए गए हैं। साथ ही चिकित्सकों से भी अपील की गई है कि वे मरीजों को दर्द निवारक दवाएं लिखते समय उनकी किडनी की स्थिति की जांच करें और न्यूनतम अवधि व सबसे सुरक्षित डोज ही प्रिसक्राइब करें।

खुद को सुरक्षित रखने के लिए अपनाएं ये जरूरी नियम

  • सेल्फ मेडिकेशन (खुद से इलाज) से पूरी तरह बचें: शरीर में कहीं भी दर्द होने पर सीधे मेडिकल स्टोर जाकर गोली मांगने की आदत तत्काल छोड़ें।

  • दवा का कोर्स और डोज खुद तय न करें: डॉक्टर द्वारा जितने दिनों के लिए दवा लिखी गई हो, उससे एक दिन भी अधिक उसका सेवन न करें।

  • खूब पानी पिएं: कोई भी आवश्यक दवा लेते समय पर्याप्त मात्रा में पानी का सेवन करें ताकि शरीर से विषाक्त पदार्थ आसानी से बाहर निकल सकें।

  • नियमित रीनल प्रोफाइल जांच: यदि आप अक्सर बदन दर्द या जोड़ों के दर्द से परेशान रहते हैं, तो हर 6 महीने में ब्लड यूरिया और सीरम क्रिएटिनिन (KFT) की जांच अवश्य कराएं।

Check Also

ब्लड शुगर कम करने के लिए कितनी देर टहलना है जरूरी? मेडिकल रिसर्च में हुआ चौंकाने वाला खुलासा

डायबिटीज और प्रीडायबिटीज के मरीजों के लिए भोजन के बाद अचानक बढ़ने वाला ब्लड शुगर …