‘बंगाल की दीदी और तमिलनाडु वाले भैया हुए फेल’, केशव मौर्य का अखिलेश पर सीधा प्रहार, बोले- 2027 का सपना अब कभी नहीं होगा पूरा

UP Politics: पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के नतीजों के रुझानों के बीच उत्तर प्रदेश की सियासत में जुबानी जंग तेज हो गई है। यूपी के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला है। केशव मौर्य ने साफ शब्दों में कहा कि जिन क्षेत्रीय क्षत्रपों के दम पर अखिलेश यूपी की सत्ता में वापसी का ख्वाब देख रहे थे, जनता ने उन्हें हाशिए पर धकेल दिया है।

‘इंडिया’ गठबंधन के सहयोगियों पर केशव का करारा तंज

डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर अखिलेश यादव को घेरते हुए लिखा कि सपा प्रमुख के सहयोगियों का जादू अब पूरी तरह खत्म हो चुका है। मौर्य ने कहा कि पश्चिम बंगाल में ‘दीदी’ (ममता बनर्जी) और तमिलनाडु में ‘भैया’ (एम.के. स्टालिन) को जनता ने नकार दिया है। उन्होंने तंज कसते हुए आगे लिखा कि राहुल गांधी की विफलता और बिहार में तेजस्वी यादव की हार के बाद अब अखिलेश यादव के पास कोई सहारा नहीं बचा है।

2027 की राह हुई मुश्किल: ‘मुंगेरीलाल के सपने देखना छोड़ें अखिलेश’

केशव प्रसाद मौर्य ने अखिलेश यादव के 2027 में सत्ता वापसी के दावों को ‘मुंगेरीलाल के हसीन सपने’ करार दिया। उन्होंने कहा, “सपा बहादुर को यह समझ लेना चाहिए कि पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली डबल इंजन सरकार के विकास कार्यों के सामने नकारात्मक राजनीति की कोई जगह नहीं है।” मौर्य ने दावा किया कि अखिलेश यादव जिन नेताओं के भरोसे अपनी राजनीति चमका रहे थे, वे खुद अपनी जमीन खो चुके हैं।

PDA के नारे और विपक्षी एकजुटता पर सवाल

सपा प्रमुख अखिलेश यादव लगातार ‘PDA’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले के जरिए 2027 की तैयारी का दावा कर रहे हैं, लेकिन केशव मौर्य के इस हमले ने विपक्षी एकजुटता की कमजोर कड़ियों पर चोट की है। मौर्य ने कहा कि मोदी लहर के सामने विपक्ष की ‘डूबती कश्ती’ को कोई किनारा नहीं मिलने वाला और सपा के हिस्से में अब केवल अंतहीन इंतजार ही बाकी है।

यूपी की सियासत में ‘सोशल वॉर’ तेज

राजनीतिक गलियारों में केशव मौर्य के इस बयान को 2027 के विधानसभा चुनाव की बिसात के तौर पर देखा जा रहा है। बीजेपी अब ममता बनर्जी और स्टालिन की चुनावी स्थिति को ढाल बनाकर अखिलेश यादव के राष्ट्रीय स्तर के गठबंधनों की विफलता को यूपी की जनता के बीच बड़ा मुद्दा बनाने की तैयारी में है।

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