आज की मॉडर्न फिटनेस की दुनिया में वजन घटाने (Weight Loss) और खुद को फिट रखने के लिए ‘इंटरमिटेंट फास्टिंग’ (Intermittent Fasting) सबसे लोकप्रिय ट्रेंड्स में से एक बन चुका है। खासकर 16:8 वाला तरीका (यानी 16 घंटे भूखे रहना और दिन के केवल 8 घंटे के दायरे में ही भोजन करना) लोगों को बेहद आसान और असरदार लगता है। शुरुआती दौर में इसके कई फायदे भी दिखते हैं, जैसे तेजी से वजन कम होना, ब्लड शुगर कंट्रोल होना और खराब कोलेस्ट्रॉल का घटना। लेकिन, अब एक नई वैश्विक रिसर्च ने इस पॉपुलर फास्टिंग ट्रेंड को लेकर बेहद चौंकाने वाले और डराने वाले खुलासे किए हैं, जिसने फिटनेस एक्सपर्ट्स की चिंता बढ़ा दी है।
क्या निकला नई रिसर्च में? (91% बढ़ा हार्ट अटैक से मौत का खतरा)
हाल ही में 20,000 (20 हजार) से अधिक वयस्कों पर किए गए एक दीर्घकालिक विश्लेषण (Analysis) में बेहद हैरान करने वाले परिणाम सामने आए हैं। रिसर्च के अनुसार, जो लोग दिनभर में सिर्फ 8 घंटे या उससे कम समय के ईटिंग विंडो (Eating Window) में खाना खाते हैं, उनमें सामान्य लोगों की तुलना में दिल से जुड़ी बीमारियों (Cardiovascular Diseases) से मौत का खतरा 91% (91 प्रतिशत) तक अधिक देखा गया। इस रिसर्च ने इस धारणा को सीधे तौर पर चुनौती दी है कि खाने के समय को बेहद सीमित कर देना हमेशा सेहत के लिए फायदेमंद ही होता है।
दिल पर क्यों बढ़ता है दबाव? एक्सपर्ट्स से जानें 3 मुख्य कारण:
1. हार्मोन्स और शुगर में अचानक उतार-चढ़ाव
वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. दिव्य रंजन बेहेरा के अनुसार, लंबे समय तक भूखे रहने से शरीर में अचानक कई तरह के मेटाबॉलिक बदलाव होते हैं। खून में शर्करा (ब्लड शुगर) का स्तर तेजी से घटता-बढ़ता है, जिससे शरीर में स्ट्रेस हार्मोन (जैसे कोर्टिसोल) का स्तर बढ़ जाता है। ये सभी अनियंत्रित बदलाव सीधे तौर पर दिल पर अतिरिक्त दबाव डालते हैं। वहीं डॉ. दीतेश एम बताते हैं कि लंबे अंतराल तक भोजन न करने से शरीर के जरूरी मिनरल्स और हार्मोन्स असंतुलित हो जाते हैं, जिससे दिल की धड़कन अनियमित (Arrhythmia) होने का खतरा रहता है।
2. डिहाइड्रेशन और जरूरी खनिजों की कमी
फास्टिंग के दौरान एक बड़ी लापरवाही पानी को लेकर होती है। डॉ. सुनील रॉय टी एन के मुताबिक, जब लोग लंबे समय तक उपवास पर रहते हैं, तो वे अक्सर पर्याप्त मात्रा में पानी पीना भी भूल जाते हैं। शरीर में पानी की कमी (Dehydration) होने से पोटैशियम और मैग्नीशियम जैसे बेहद महत्वपूर्ण खनिजों का स्तर गिर जाता है। ये दोनों खनिज दिल की सामान्य धड़कन और उसकी मांसपेशियों के संचालन के लिए सबसे जरूरी माने जाते हैं। इनकी कमी होने पर दिल को सामान्य गति बनाए रखने के लिए दोगुनी मेहनत करनी पड़ती है।
3. शारीरिक और मानसिक थकान
जरूरत से ज्यादा सख्त डाइट या फास्टिंग शेड्यूल फॉलो करने से शरीर में ऊर्जा (Energy) की भारी कमी हो जाती है। इसके कारण व्यक्ति में चिड़चिड़ापन, चक्कर आना, काम करने की क्षमता में कमी और हर वक्त मानसिक थकान हावी रहने लगती है, जो अंततः ब्लड प्रेशर को प्रभावित करती है।
किन लोगों को भूलकर भी नहीं करनी चाहिए ऐसी फास्टिंग?
इंटरमिटेंट फास्टिंग हर व्यक्ति के शरीर के लिए समान रूप से सुरक्षित नहीं है। निम्नलिखित लोगों को विशेष रूप से सावधानी बरतनी चाहिए:
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हार्ट के मरीज और हाई बीपी वाले: जिन्हें पहले से दिल की कोई बीमारी या हाई ब्लड प्रेशर की समस्या है।
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डायबिटीज के मरीज: शुगर की दवाइयां या इंसुलिन लेने वाले लोगों में लंबे उपवास से ‘हाइपोग्लाइसीमिया’ (शुगर का स्तर अत्यधिक गिरना) का जानलेवा खतरा हो सकता है।
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विशेष दवाओं का सेवन करने वाले: जो लोग नियमित तौर पर किसी गंभीर बीमारी की हैवी डोज दवाएं ले रहे हैं।
अंतिम सलाह: उपवास या डाइटिंग अपने आप में गलत नहीं है, लेकिन जब यह बिना किसी डॉक्टरी परामर्श या बिना सही प्लानिंग के बेहद कड़े ढंग से किया जाता है, तब यह शरीर के लिए घातक साबित होता है। इसलिए, किसी भी बड़े लाइफस्टाइल बदलाव या 16:8 फास्टिंग को शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर या सर्टिफाइड न्यूट्रिशनिस्ट से सलाह जरूर लें।
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