
आजकल की व्यस्त जीवनशैली और असंतुलित खान-पान के कारण शरीर को जरूरी पोषक तत्व नहीं मिल पाते हैं। यही वजह है कि पिछले कुछ वर्षों में डाइटरी सप्लीमेंट्स का चलन बहुत तेजी से बढ़ा है। इन सप्लीमेंट्स में सबसे लोकप्रिय नाम ‘फिश ऑयल कैप्सूल’ (Fish Oil Capsules) यानी ओमेगा-3 सप्लीमेंट का है। जिम जाने वाले युवाओं से लेकर दिल और जोड़ों के दर्द से परेशान बुजुर्गों तक, बड़ी संख्या में लोग बिना किसी डॉक्टरी सलाह के रोजाना इसका सेवन कर रहे हैं। दिल को तंदुरुस्त रखने, दिमाग तेज करने, आंखों की रोशनी बढ़ाने और त्वचा में निखार लाने के दावे के साथ बिकने वाले ये कैप्सूल वाकई बहुत फायदेमंद माने जाते हैं। हालांकि, किसी भी सप्लीमेंट की तरह फिश ऑयल का अनियंत्रित और गलत तरीके से सेवन सेहत के लिए गंभीर नुकसान का कारण भी बन सकता है। बाल रोग विशेषज्ञों, हृदय रोग विशेषज्ञों (Cardiologists) और आहार विशेषज्ञों (Nutritionists) के अनुसार, ओमेगा-3 फैटी एसिड शरीर के लिए बेहद जरूरी है क्योंकि हमारा शरीर इसे स्वयं नहीं बना सकता। लेकिन बाजार में मिलने वाले हर कैप्सूल की गुणवत्ता एक जैसी नहीं होती और न ही हर व्यक्ति को एक ही मात्रा में इसकी जरूरत होती है। आइए एक रिपोर्टर की नजर से विस्तार से जानते हैं कि फिश ऑयल कैप्सूल क्या है, इसके क्या-क्या फायदे हैं, ज्यादा सेवन से क्या नुकसान हो सकते हैं और इसे लेने का सही तरीका व समय क्या होना चाहिए।
फिश ऑयल कैप्सूल क्या है और इसमें कौन से पोषक तत्व होते हैं?
फिश ऑयल कैप्सूल वास्तव में वसायुक्त मछलियों (जैसे साल्मन, मैकेरल, सार्डिन, टूना और हैरिंग) के ऊतकों (Tissues) से निकाला गया प्राकृतिक तेल होता है। इस तेल का मुख्य आकर्षण इसमें मौजूद ‘ओमेगा-3 फैटी एसिड’ (Omega-3 Fatty Acids) की प्रचुर मात्रा है। ओमेगा-3 एक प्रकार का पॉलीअनसेचुरेटेड फैटी एसिड (PUFA) होता है, जो हमारे शरीर की कोशिकाओं की झिल्ली (Cell Membrane) को मजबूत बनाने के लिए बेहद जरूरी है। फिश ऑयल में मुख्य रूप से दो प्रकार के ओमेगा-3 फैटी एसिड पाए जाते हैं— पहला ईपीए (Eicosapentaenoic Acid – EPA) और दूसरा डीएचए (Docosahexaenoic Acid – DHA)। ईपीए मुख्य रूप से शरीर और नसों में होने वाली सूजन (Inflammation) को कम करने और हृदय प्रणाली को स्वस्थ रखने का काम करता है। वहीं डीएचए हमारे मस्तिष्क की कोशिकाओं के विकास, तंत्रिका तंत्र (Nervous System) की कार्यप्रणाली और आंखों की रेटीना (Retina) को स्वस्थ बनाए रखने के लिए अनिवार्य घटक माना जाता है। चूंकि हमारी दैनिक भारतीय खुराक में शाकाहारी विकल्पों के जरिए ओमेगा-3 (जैसे एएलए – ALA) तो मिल जाता है, लेकिन ईपीए और डीएचए का सीधा अवशोषण बहुत कम होता है, इसलिए डॉक्टर अक्सर उन लोगों को फिश ऑयल लेने की सलाह देते हैं जो सप्ताह में 2-3 बार मछली का सेवन नहीं करते हैं।
डॉक्टर के अनुसार फिश ऑयल कैप्सूल के 6 प्रमुख स्वास्थ्य लाभ
स्वास्थ्य विशेषज्ञों और विभिन्न चिकित्सकीय शोधों के अनुसार, यदि सही मात्रा और डॉक्टरी देखरेख में फिश ऑयल कैप्सूल का नियमित सेवन किया जाए, तो यह शरीर के विभिन्न अंगों पर बेहद चमत्कारी प्रभाव डालता है:
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1. हृदय स्वास्थ्य और ट्राइग्लीसराइड्स में कमी: ओमेगा-3 फैटी एसिड को दिल का सबसे बड़ा मित्र माना जाता है। यह रक्त में जमा होने वाले हानिकारक फैट यानी ‘ट्राइग्लीसराइड्स’ (Triglycerides) के स्तर को 15 से 30 प्रतिशत तक कम करने में मदद करता है। इसके अलावा, यह धमनियों (Arteries) में प्लॉक बनने से रोकता है, जिससे एथेरोस्क्लेरोसिस का खतरा घटता है और गुड कोलेस्ट्रॉल (HDL) का स्तर सुधरता है।
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2. जोड़ों के दर्द और आर्थराइटिस से राहत: जिन लोगों को उम्र बढ़ने के साथ या रूमेटॉइड आर्थराइटिस के कारण जोड़ों में अकड़न, सूजन और दर्द की शिकायत रहती है, उनके लिए ईपीए से भरपूर फिश ऑयल बहुत असरदार साबित होता है। यह सूजन पैदा करने वाले साइटोकिन्स (Cytokines) के असर को कम करके जोड़ों की गतिशीलता को बढ़ाता है।
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3. दिमाग की कार्यक्षमता और डिप्रेशन में सुधार: हमारा दिमाग लगभग 60 प्रतिशत वसा से बना है और उसमें डीएचए की अहम भूमिका होती है। ओमेगा-3 कैप्सूल का सेवन करने से याददाश्त (Memory), एकाग्रता और सीखने की क्षमता में सुधार होता है। कई क्लिनिकल ट्रायल्स में यह भी पाया गया है कि ओमेगा-3 अवसाद (Depression) और एंग्जायटी के लक्षणों को कम करने में भी मदद करता है।
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4. आंखों की रोशनी और ड्राई आईज की समस्या में फायदा: कंप्यूटर और मोबाइल स्क्रीन पर घंटों काम करने से आजकल लोगों में ‘ड्राई आई सिंड्रोम’ (Dry Eye Syndrome) की समस्या आम हो चुकी है। फिश ऑयल आंखों में प्राकृतिक नमी बनाए रखने वाले आंसुओं के उत्पादन को बढ़ावा देता है और ढलती उम्र में होने वाले मैकुलर डिजनरेशन (Macular Degeneration) से आंखों का बचाव करता है।
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5. चमकदार त्वचा और बालों की मजबूती: ओमेगा-3 फैटी एसिड त्वचा की नमी को सील करने का काम करता है। यह मुहांसों (Acne), सोरायसिस और एग्जिमा जैसी त्वचा संबंधी समस्याओं में जलन व लालिमा को कम करता है। इसके साथ ही, यह बालों के फॉलिकल्स को पोषण देकर बालों को झड़ने से रोकता है और उन्हें घना बनाता है।
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6. फैटी लीवर की समस्या में कमी: नॉन-अल्कोहलिक फैटी लीवर डिजीज (NAFLD) से पीड़ित मरीजों के लिए भी फिश ऑयल फायदेमंद माना गया है, क्योंकि यह लीवर में जमा अत्यधिक वसा को कम करने में सहायता करता है।
गलत तरीके या अत्यधिक सेवन के साइड इफेक्ट्स (नुकसान)
किसी भी चीज की अति नुकसानदायक होती है और यही नियम फिश ऑयल कैप्सूल पर भी लागू होता है। कई बार लोग जल्दी परिणाम पाने की होड़ में रोजाना अत्यधिक कैप्सूल खाने लगते हैं या सस्ते व घटिया क्वालिटी के सप्लीमेंट्स खरीद लेते हैं। डॉक्टरों के अनुसार, ओमेगा-3 की ज्यादा खुराक लेने से निम्नलिखित गंभीर समस्याएं हो सकती हैं:
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रक्त का अत्यधिक पतला होना और ब्लीडिंग रिस्क: ओमेगा-3 में प्राकृतिक रूप से एंटी-कोआगुलेंट (रक्त को पतला करने वाले) गुण होते हैं। यदि आप जरूरत से ज्यादा खुराक लेते हैं या पहले से ही एस्पिरिन जैसी ब्लड थिनर दवाएं खा रहे हैं, तो चोट लगने पर खून का थक्का जमना मुश्किल हो सकता है और नाक या मसूड़ों से ब्लीडिंग का खतरा बढ़ जाता है।
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पाचन तंत्र की खराबी और बदहजमी: अत्यधिक फिश ऑयल लेने से पेट में एसिडिटी, दस्त (Diarrhea), जी मिचलाना, सीने में जलन और पेट फूलने जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
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फिशी बर्प्स (मछली जैसी डकारें) और मुंह की बदबू: यह फिश ऑयल का सबसे आम साइड इफेक्ट है। कैप्सूल खाने के बाद कई घंटों तक मुंह में मछली जैसा स्वाद बना रहता है और मछली की गंध वाली डकारें आती हैं।
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ब्लड शुगर का स्तर बढ़ना: कुछ अध्ययनों में पाया गया है कि टाइप-2 डायबिटीज के मरीजों में ओमेगा-3 की बहुत ज्यादा खुराक लेने से फास्टिंग ब्लड शुगर का स्तर थोड़ा बढ़ सकता है।
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मर्करी और हैवी मेटल टॉक्सिसिटी का खतरा: घटिया क्वालिटी के फिश ऑयल सप्लीमेंट्स में समुद्री प्रदूषण के कारण पारा (Mercury), सीसा या पीसीबी (PCBs) जैसे विषैले तत्व मौजूद हो सकते हैं, जो लंबे समय में लीवर और किडनी को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
फिश ऑयल कैप्सूल लेने का सही तरीका, सही समय और खुराक
डॉक्टरों और आहार विशेषज्ञों का स्पष्ट मानना है कि फिश ऑयल कैप्सूल का पूरा फायदा उठाने के लिए इसे सही समय और सही तरीके से लेना बहुत जरूरी है:
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भोजन के साथ लें (Always Take With Meals): फिश ऑयल कैप्सूल को कभी भी खाली पेट नहीं लेना चाहिए। इसे हमेशा अपने दिन के सबसे मुख्य भोजन (जैसे नाश्ता या दोपहर का खाना) के ठीक साथ या भोजन के तुरंत बाद पानी से निगलना चाहिए। जब आप वसा (Fat) युक्त भोजन के साथ इसे लेते हैं, तो पाचन एंजाइम एक्टिव हो जाते हैं और ओमेगा-3 का अवशोषण (Absorption) कई गुना बढ़ जाता है।
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सही समय का चुनाव: आप इसे सुबह नाश्ते के समय या दोपहर के भोजन के साथ ले सकते हैं। यदि आपको रात में लेने से डकार या एसिडिटी की समस्या होती है, तो रात के समय इसे लेने से बचें।
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लेबल पर EPA और DHA का अनुपात देखें: सिर्फ यह न देखें कि कैप्सूल 1000mg का है। 1000mg फिश ऑयल का मतलब यह नहीं होता कि उसमें 1000mg ओमेगा-3 है। हमेशा कैप्सूल के पीछे का लेबल पढ़ें और देखें कि उसमें संयुक्त रूप से ‘EPA + DHA’ कितना है। एक स्वस्थ वयस्क के लिए रोजाना कम से कम 250mg से 500mg संयुक्त ईपीए और डीएचए होना चाहिए।
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मॉलिक्यूलर डिस्टिल्ड (Molecularly Distilled) सप्लीमेंट चुनें: हमेशा ऐसे ब्रांड्स का चुनाव करें जो ‘थर्ड पार्टी लेबोरेटरी टेस्टेड’ और ‘मॉलिक्यूलरली डिस्टिल्ड’ हों। यह प्रक्रिया तेल में से पारे और अन्य हैवी मेटल्स को पूरी तरह से साफ कर देती है।
किन लोगों को डॉक्टर की सलाह के बिना नहीं लेना चाहिए फिश ऑयल?
यद्यपि ओवर-द-काउंटर (OTC) बिकने वाला यह एक सुरक्षित सप्लीमेंट माना जाता है, फिर भी कुछ विशेष स्वास्थ्य स्थितियों वाले व्यक्तियों को बिना डॉक्टर से पूछे इसका सेवन बिल्कुल शुरू नहीं करना चाहिए:
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सर्जरी कराने जा रहे मरीज: यदि आपकी आने वाले 2 से 3 हफ्तों में कोई बड़ी या छोटी सर्जरी या दांतों का इलाज होने वाला है, तो फिश ऑयल लेना तुरंत बंद कर दें, अन्यथा ऑपरेशन के दौरान ज्यादा खून बहने का जोखिम हो सकता है।
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गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाएं: गर्भवती महिलाओं के लिए बच्चे के दिमागी विकास के लिए डीएचए बेहद जरूरी है, लेकिन उन्हें साधारण फिश ऑयल के बजाय विशेष ‘प्रीनेटल डीएचए’ या डॉक्टर द्वारा सुझाई गई जांच की हुई ब्रांड्स का ही सेवन करना चाहिए ताकि मर्करी का खतरा न रहे।
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समुद्री जीवों (Shellfish) से एलर्जी वाले लोग: जिन लोगों को मछली या सी-फूड से एलर्जी है, उन्हें फिश ऑयल से गंभीर एलर्जिक रिएक्शन (जैसे चकत्ते, चेहरे पर सूजन, सांस लेने में तकलीफ) हो सकता है।
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ब्लड थिनर दवाएं लेने वाले मरीज: जो मरीज वारफारिन, हिपारिन या एस्पिरिन जैसी रक्त पतला करने वाली दवाएं खा रहे हैं, उन्हें सख्त हिदायत दी जाती है कि वे अपने डॉक्टर से पूछे बिना ओमेगा-3 कैप्सूल न शुरू करें।
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