नई दिल्ली। वजन बढ़ना आजकल एक आम समस्या है, लेकिन क्या आपने कभी गौर किया है कि मोटापा चढ़ने का तरीका स्त्री और पुरुष में अलग-अलग होता है? महिलाएं अक्सर अपनी चौड़ी होती कमर और जांघों (Hips & Thighs) से परेशान रहती हैं, जबकि पुरुषों का वजन बढ़ते ही सबसे पहले उनका पेट (Belly Fat) बाहर निकल आता है। यह केवल इत्तेफाक नहीं है, बल्कि इसके पीछे शरीर का जटिल विज्ञान और हार्मोन्स का खेल है। फिटनेस कोच प्रियांक मेहता ने इसके पीछे की असली वजह समझाई है।
महिलाओं की कमर पर फैट: कुदरत का ‘एनर्जी बैंक’
महिलाओं के शरीर में चर्बी का कमर और जांघों पर जमा होना एस्ट्रोजन (Estrogen) हार्मोन के कारण होता है। इसके पीछे एक गहरा जैविक कारण है:
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प्रेगनेंसी और रिकवरी: शरीर इस हिस्से में फैट को ‘रिजर्व एनर्जी’ के तौर पर जमा करता है ताकि प्रेगनेंसी के दौरान भ्रूण को पोषण मिल सके।
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ब्रेस्टफीडिंग: डिलीवरी के बाद स्तनपान के दौरान शरीर को जिस अतिरिक्त ऊर्जा की जरूरत होती है, वह इसी जमा चर्बी से मिलती है।
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गायनॉइड फैट (Gynoid Fat): इस जिद्दी और स्टेबल फैट को ‘गायनॉइड फैट’ कहा जाता है। यही वजह है कि कई महिलाएं वेट लॉस के दौरान चेहरे और ऊपरी शरीर से तो पतली हो जाती हैं, लेकिन लोअर बॉडी फैट कम करना उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती होता है।
पुरुषों का ‘टमी’ निकलना: कम टेस्टोस्टेरोन का संकेत
पुरुषों में चर्बी का सीधा पेट पर जमा होना मुख्य रूप से टेस्टोस्टेरोन (Testosterone) हार्मोन से जुड़ा है।
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हार्मोनल असंतुलन: जैसे ही पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन का लेवल गिरता है, बैली फैट यानी पेट की चर्बी तेजी से बढ़ने लगती है।
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लाइफस्टाइल की भूमिका: स्मोकिंग, शराब का सेवन, अत्यधिक तनाव और एक्सरसाइज की कमी इस प्रक्रिया को तेज कर देते हैं।
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एंड्राइड फैट (Android Fat): पुरुषों में जमा होने वाले इस फैट को ‘एंड्राइड फैट’ कहते हैं। यह महिलाओं के फैट के मुकाबले ज्यादा खतरनाक होता है क्योंकि यह सीधे तौर पर फैटी लिवर, टाइप-2 डायबिटीज और दिल की बीमारियों के खतरे को बढ़ा देता है।
क्या इस जिद्दी फैट को कम किया जा सकता है?
जवाब है—हाँ, लेकिन दोनों के लिए तरीका अलग होगा। चूंकि दोनों तरह के फैट के पीछे का विज्ञान अलग है, इसलिए इनका न्यूट्रिशन और वर्कआउट प्लान भी एक जैसा नहीं हो सकता।
फिटनेस कोच के 3 सुनहरे टिप्स:
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हार्मोनल चेकअप: अगर लाख कोशिशों के बाद भी फैट कम नहीं हो रहा, तो एक बार अपने हार्मोन्स (एस्ट्रोजन/टेस्टोस्टेरोन) की जांच जरूर कराएं।
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स्ट्रेंथ ट्रेनिंग: केवल कार्डियो से काम नहीं चलेगा। वेट लिफ्टिंग या बॉडीवेट एक्सरसाइज मसल्स बनाती हैं, जिससे मेटाबॉलिज्म बढ़ता है और जमा फैट बर्न होता है।
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डाइट में बदलाव: कैलोरी डेफिसिट (जरूरत से कम कैलोरी लेना) जरूरी है, लेकिन प्रोटीन की मात्रा सही रखना भी अनिवार्य है ताकि शरीर मसल्स के बजाय फैट को ऊर्जा के रूप में इस्तेमाल करे।
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