नई दिल्ली: जे.के. रोलिंग की जादुई दुनिया ‘हैरी पॉटर’ (Harry Potter) आज जिस रूप में हमारे सामने है, उसकी कल्पना बिना डैनियल रेडक्लिफ के चश्मे और हॉगवर्ट्स के भव्य सेट के करना नामुमकिन है। लेकिन सिनेमा के इतिहास का एक बहुत बड़ा ‘कन्फ्यूजन’ यह है कि यह फिल्म वैसी बिल्कुल नहीं बनने वाली थी, जैसी आज हम देखते हैं। एक वक्त था जब हॉलीवुड के दिग्गज निर्देशक स्टीवेन स्पीलबर्ग इसे एक एनिमेटेड (कार्टून) फिल्म के रूप में पर्दे पर उतारने की तैयारी कर चुके थे।
स्टीवेन स्पीलबर्ग और ‘टॉय स्टोरी’ का असर
जब वार्नर ब्रोज (Warner Bros.) ने हैरी पॉटर के राइट्स खरीदे, तो उनकी पहली पसंद स्टीवेन स्पीलबर्ग थे। स्पीलबर्ग उस दौर में ‘जुरासिक पार्क’ जैसी फिल्मों से दुनिया को अपनी विजुअल ताकत दिखा चुके थे। उस समय पिक्सर (PIXAR) की ‘टॉय स्टोरी’ जैसी 3D एनिमेटेड फिल्मों का जादू पूरी दुनिया पर छाया हुआ था। स्पीलबर्ग को लगा कि हैरी पॉटर की जादुई दुनिया, उड़ते झाड़ू और अजीबोगरीब जानवरों को एनिमेशन के जरिए ज्यादा बेहतर तरीके से दिखाया जा सकता है।
3 किताबों को मिलाकर एक फिल्म बनाने का था प्लान
स्पीलबर्ग ने ड्रीम वर्क्स (DreamWorks) के साथ मिलकर इसके एनिमेशन डिवीजन पर काम भी शुरू कर दिया था। उनका विजन स्टूडियो से काफी अलग था:
-
कहानी का संगम: स्पीलबर्ग चाहते थे कि शुरुआत की दो या तीन किताबों की कहानी को मिलाकर एक ही एनिमेटेड फिल्म बनाई जाए।
-
क्रिएटिव मतभेद: वार्नर ब्रोज और जे.के. रोलिंग चाहते थे कि हर किताब पर एक अलग फिल्म बने और वह लाइव-एक्शन (असली कलाकारों के साथ) हो।
-
एग्जिट: जब स्पीलबर्ग को लगा कि उन्हें अपनी तरह से जादू रचने की आजादी नहीं मिल रही है, तो उन्होंने इस प्रोजेक्ट से हाथ खींच लिए। उन्होंने बाद में कहा, “यह सिर्फ पैसा बनाने जैसा था, इसमें कोई चुनौती नहीं थी।”
हैरी के चश्मे का दिलचस्प किस्सा: 160 फ्रेम्स का ट्रायल
फिल्म के पहले पार्ट ‘हैरी पॉटर एंड द सॉर्सेरर्स स्टोन’ (2001) को बनाने में करीब 600 करोड़ रुपये खर्च हुए थे, जिसने वर्ल्डवाइड 4940 करोड़ रुपये की रिकॉर्ड तोड़ कमाई की। लेकिन क्या आप जानते हैं कि हैरी पॉटर के लुक को परफेक्ट बनाने के लिए कितनी मेहनत की गई थी?
-
चश्मे का चुनाव: हैरी के आईकॉनिक चश्मे को फाइनल करने से पहले डैनियल रेडक्लिफ पर 160 अलग-अलग फ्रेम्स ट्राई किए गए थे।
-
कास्टिंग की शर्त: लेखिका जे.के. रोलिंग ने सख्त हिदायत दी थी कि सभी कलाकार ब्रिटिश या आइरिश होने चाहिए, ताकि फिल्म का मूल अहसास (British theme) बना रहे।
Shashwat Lokwarta – State News,Up News देश-दुनिया