काशी से ‘स्कूल चलो अभियान’ का शंखनाद; बोले- ‘एक भी बच्चा छूटा, तो संकल्प टूटा’

वाराणसी। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी से प्रदेशव्यापी ‘स्कूल चलो अभियान 2026’ का भव्य शुभारंभ किया। अपने वाराणसी दौरे के दूसरे दिन सीएम योगी ने शिवपुर स्थित परिषदीय विद्यालय पहुंचकर न केवल दीप प्रज्वलित किया, बल्कि खुद अपने हाथों से नन्हे बच्चों को स्कूल बैग पहनाए और किताबें वितरित कीं। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर स्पष्ट संदेश दिया कि प्रदेश का एक भी बच्चा शिक्षा की मुख्यधारा से छूटना नहीं चाहिए।

ड्रॉप आउट रेट पर प्रहार: 19% से घटकर 3% पर आया आंकड़ा

जनसभा को संबोधित करते हुए सीएम योगी ने 2017 से पहले की बदहाल शिक्षा व्यवस्था का जिक्र किया। उन्होंने कहा, “एक समय था जब प्रदेश में स्कूलों की हालत जर्जर थी और ड्रॉप आउट रेट 19 प्रतिशत से भी ज्यादा था। बच्चे स्कूलों के बजाय गलियों, तालाबों और खेतों में खेलते नजर आते थे।” मुख्यमंत्री ने गर्व के साथ बताया कि ठोस प्रयासों और ‘ऑपरेशन कायाकल्प’ की बदौलत आज ड्रॉप आउट रेट घटकर महज 3 प्रतिशत रह गया है, जिसे अब 0 प्रतिशत पर लाने का लक्ष्य रखा गया है।

संस्कार और तकनीक का संगम: ‘डिग्री ही सब कुछ नहीं’

सीएम योगी ने शिक्षकों को उनकी जिम्मेदारी का अहसास कराते हुए कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री बांटना नहीं, बल्कि बच्चों को संस्कारित करना और उनमें नई चीजों को जानने की जिज्ञासा पैदा करना है। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने बच्चों द्वारा लगाई गई वैज्ञानिक प्रदर्शनी का अवलोकन किया और नन्हे वैज्ञानिकों से उनके प्रोजेक्ट्स पर विस्तार से चर्चा की। इससे पहले मुख्यमंत्री ने काल भैरव और काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन-पूजन कर प्रदेश की खुशहाली की कामना की।

15 अप्रैल तक चलेगा महाअभियान, हर स्कूल को बजट

प्रदेश सरकार ने इस अभियान को सफल बनाने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है। ‘स्कूल चलो अभियान’ आगामी 15 अप्रैल तक पूरे प्रदेश में युद्ध स्तर पर चलाया जाएगा।

  • बजट: अभियान के प्रचार-प्रसार के लिए प्रत्येक स्कूल को 2500 रुपये की धनराशि आवंटित की गई है।

  • सुविधाएं: बच्चों को यूनिफॉर्म, जूते-मोजे, स्कूल बैग और किताबें पूरी तरह निशुल्क उपलब्ध कराई जा रही हैं।

  • इन्फ्रास्ट्रक्चर: सीएम ने बताया कि अब हर सरकारी स्कूल में बालक-बालिकाओं के लिए अलग टॉयलेट और शुद्ध पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है।

भैंस और कीचड़ के खेल से क्लासरूम तक का सफर

मुख्यमंत्री ने चुटकी लेते हुए पुराने दिनों को याद किया और कहा कि पहले बच्चे स्कूल जाने के बजाय भैंसों के साथ या कीचड़ में खेलते दिखते थे क्योंकि स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव था। उन्होंने अधिकारियों और अभिभावकों से अपील की कि वे घर-घर जाकर सर्वे करें और सुनिश्चित करें कि 6 से 14 वर्ष का हर बच्चा स्कूल की दहलीज तक पहुंचे। इस अभियान के जरिए यूपी को ‘शत-प्रतिशत साक्षरता’ की ओर ले जाने का संकल्प दोहराया गया है।

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