
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी, बिगड़ी हुई खान-पान की आदतें और शारीरिक निष्क्रियता के कारण शरीर में यूरिक एसिड का बढ़ना एक आम लेकिन बेहद गंभीर समस्या बन चुका है। पहले यह समस्या केवल उम्रदराज लोगों में देखी जाती थी, लेकिन आजकल 25 से 35 वर्ष के युवा भी इसके शिकार हो रहे हैं। यूरिक एसिड शरीर में बनने वाला एक प्राकृतिक अपशिष्ट उत्पाद (Waste Product) है, जो भोजन में मौजूद ‘प्यूरिन’ (Purine) नामक प्रोटीन के टूटने से बनता है।
सामान्य अवस्था में किडनी यूरिक एसिड को फिल्टर करके पेशाब के रास्ते शरीर से बाहर निकाल देती है। लेकिन जब शरीर में प्यूरिन की मात्रा बहुत ज्यादा हो जाती है या किडनी इसे सही तरीके से बाहर नहीं निकाल पाती, तो खून में इसका स्तर अनियंत्रित हो जाता है। इस स्थिति को मेडिकल भाषा में ‘हाइपरयूरिसीमिया’ (Hyperuricemia) कहा जाता है। यह बढ़ा हुआ यूरिक एसिड जोड़ों में नुकीले क्रिस्टल्स (Monosodium Urate Crystals) के रूप में जमा होने लगता है, जिससे गाउट (गठिया), जोड़ों में असहनीय दर्द, सूजन, लालिमा और यहां तक कि किडनी में पथरी (Kidney Stones) और किडनी डैमेज का खतरा उत्पन्न हो जाता है।
अनजाने में की जाने वाली 6 बड़ी गलतियां, जो यूरिक एसिड को लगातार बढ़ाती हैं
अधिकांश लोग यह समझ नहीं पाते कि दवाएं लेने के बावजूद उनका यूरिक एसिड बार-बार क्यों बढ़ जाता है। इसका मुख्य कारण रोजमर्रा की जिंदगी में की जाने वाली कुछ गंभीर गलतियां हैं:
-
प्यूरिन से भरपूर आहार का अत्यधिक सेवन: खान-पान में रेड मीट, मटन, पोर्क, कलेजी, सीफूड (झींगा, सार्डिन) और बहुत अधिक मात्रा में दालों व सूखे मेवों का सेवन करने से शरीर में प्यूरिन का स्तर एकदम से बढ़ जाता है। प्यूरिन का अत्यधिक लोड किडनी की निष्कासन क्षमता से बाहर हो जाता है।
-
मीठे पेय पदार्थ और फ्रुक्टोज का सेवन: बाजार में मिलने वाले पैकेज्ड फ्रूट जूस, कार्बोनेटेड सॉफ्ट ड्रिंक्स, एनर्जी ड्रिंक्स और बेकरी उत्पादों में हाई-फ्रुक्टोज कॉर्न सिरप (HFCS) का भारी इस्तेमाल होता है। वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार, फ्रुक्टोज का चयापचय (Metabolism) सीधे तौर पर शरीर में यूरिक एसिड के उत्पादन को ट्रिगर करता है।
-
शराब और विशेष रूप से बियर का सेवन: शराब यूरिक एसिड के मरीजों के लिए जहर के समान है। विशेषकर बियर में यीस्ट (Yeast) की प्रचुरता के कारण प्यूरिन की मात्रा बहुत अधिक होती है। शराब पीने से शरीर डिहाइड्रेट होता है और किडनी यूरिक एसिड को बाहर निकालने के बजाय अल्कोहल को प्रोसेस करने में लग जाती है।
-
कम पानी पीने की आदत (डिहाइड्रेशन): दिन भर में पर्याप्त पानी न पीना यूरिक एसिड बढ़ने का एक बहुत बड़ा कारण है। जब शरीर में पानी की कमी होती है, तो खून गाढ़ा हो जाता है और किडनी टॉक्सिन्स को सही तरह से फ्लश नहीं कर पाती, जिससे यूरिक एसिड तेजी से जमा होने लगता है।
-
क्रैश डाइटिंग और अत्यधिक वजन: बहुत तेजी से वजन घटाने के लिए अत्यधिक भूखे रहना (Extreme Fasting) या कीटो जैसी हाई-प्रोटीन फैट डाइट फॉलो करने से शरीर में कीटोन बॉडीज बनती हैं। ये कीटोन्स किडनी में यूरिक एसिड के रास्ते में रुकावट पैदा करते हैं, जिससे खून में यूरिक एसिड का स्तर अचानक बढ़ जाता है।
-
गतिहीन जीवनशैली और लंबे समय तक बैठना: शारीरिक रूप से सक्रिय न रहने और लगातार घंटों एक ही जगह बैठे रहने से शरीर का मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है। मोटापा इंसुलिन रेजिस्टेंस को बढ़ावा देता है, जिससे किडनी द्वारा यूरिक एसिड का उत्सर्जन कम हो जाता है।
शरीर में यूरिक एसिड बढ़ने के मुख्य लक्षण
यदि खून में यूरिक एसिड का स्तर बढ़ रहा है, तो शरीर कुछ स्पष्ट संकेत देने लगता है जिन्हें कभी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए:
-
पैर के अंगूठे में अचानक तेज दर्द, गर्माहट, तेज लालिमा और सूजन (गाउट का क्लासिक लक्षण)।
-
एड़ियों, घुटनों, कलाई, उंगलियों और कोहनी के जोड़ों में लगातार अकड़न और उठने-बैठने में दर्द।
-
जोड़ों की त्वचा का खिंचाव महसूस होना और उसका रंग गहरा लाल या बैंगनी पड़ना।
-
पीठ के निचले हिस्से या कमर के किनारों में रुक-रुक कर दर्द होना, जो किडनी में पथरी बनने का संकेत हो सकता है।
-
पेशाब करते समय जलन होना या पेशाब का रंग गहरा पीला-मटमैला आना।
यूरिक एसिड को तेजी से कम करने के 5 अचूक और वैज्ञानिक उपाय
यदि आप अपने यूरिक एसिड को प्राकृतिक रूप से नियंत्रित करना चाहते हैं, तो इन जीवनशैली और आहार संबंधी बदलावों को तुरंत अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं:
-
भरपूर पानी पिएं (वॉटर थेरेपी): दिन भर में कम से कम 3 से 4 लीटर शुद्ध पानी जरूर पिएं। पर्याप्त पानी पीने से पेशाब की मात्रा बढ़ती है, जिससे जोड़ों में जमा यूरिक एसिड के क्रिस्टल्स घुलने लगते हैं और किडनी के जरिए आसानी से बाहर निकल जाते हैं।
-
नींबू पानी और विटामिन-सी का सेवन: विटामिन-सी यूरिक एसिड को शरीर से बाहर निकालने में चमत्कारिक रूप से प्रभावी है। रोजाना सुबह खाली पेट एक गिलास गुनगुने पानी में आधा नींबू निचोड़कर पिएं। इसके अलावा आंवला, संतरा, अमरूद और कीवी का सेवन करने से खून में यूरिक एसिड का स्तर तेजी से नीचे आता है।
-
चेरी और जामुन का उपयोग: डार्क चेरी, स्ट्रॉबेरी, ब्लूबेरी और जामुन में ‘एंथोसायनिन’ (Anthocyanin) नामक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट पाया जाता है। यह एंटीऑक्सीडेंट जोड़ों की सूजन को तुरंत कम करता है और यूरिक एसिड के स्तर को घटाने में दवा की तरह काम करता है।
-
फाइबर युक्त आहार का सेवन: अपने आहार में ओट्स, दलिया, हरी पत्तेदार सब्जियां, खीरा, गाजर और सेब जैसे घुलनशील फाइबर से भरपूर खाद्य पदार्थों को शामिल करें। फाइबर रक्तप्रवाह से अतिरिक्त यूरिक एसिड को सोखने का काम करता है।
-
गिलोय और अदरक का काढ़ा: आयुर्वेद में गिलोय को रक्तशोधक और वात-पित्त शामक माना गया है। ताजे गिलोय के तने का काढ़ा बनाकर पीने से यूरिक एसिड के कारण होने वाला पुराना जोड़ों का दर्द और सूजन पूरी तरह शांत हो जाती है।
यूरिक एसिड में क्या खाएं और किन चीजों से बनाएं दूरी?
यूरिक एसिड को सामान्य बनाए रखने के लिए आहार का संतुलन समझना बेहद जरूरी है:
-
पूरी तरह त्यागें (Don’ts): रेड मीट, ऑर्गन मीट (कलेजी, गुर्दा), झींगा मछली, केकड़ा, बियर, शराब, पैक्ड मीठे जूस, कोल्ड ड्रिंक्स, मैदा, बेकरी बिस्कुट, पालक, मशरूम और अरबी का अत्यधिक सेवन।
-
सीमित मात्रा में लें: राजमा, चना, उड़द दाल, काबुली चने, फूलगोभी और टमाटर।
-
खुलकर खाएं (Do’s): लो-फैट दूध, छाछ, ताजा दही, नारियल पानी, खीरा, तोरी, लौकी, टिंडा, ककड़ी, दलिया, सेब, पपीता, चेरी और नींबू पानी।
कब कराएं जांच और डॉक्टर से कब लें सलाह?
एक स्वस्थ वयस्क पुरुष के खून में यूरिक एसिड का सामान्य स्तर 3.5 से 7.0 mg/dL और महिलाओं में 2.5 से 6.0 mg/dL के बीच होना चाहिए। यदि आपके जोड़ों में लगातार दर्द बना रहता है या स्तर 7.0 mg/dL से ऊपर चला गया है, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
दवाइयों के साथ-साथ जीवनशैली में अनुशासित बदलाव, नियमित 30 मिनट का व्यायाम, पर्याप्त जलपान और प्यूरिन मुक्त आहार ही यूरिक एसिड की समस्या से स्थायी मुक्ति दिला सकता है। थोड़ी सी सतर्कता और सही आदतें आपके जोड़ों को दर्दमुक्त और जीवन को पूरी तरह स्वस्थ बना सकती हैं।
Shashwat Lokwarta – State News,Up News देश-दुनिया