नई दिल्ली | किचन की साफ-सफाई में एक छोटा सा स्पंज सबसे अहम भूमिका निभाता है। बर्तन चमकाने से लेकर स्लैब की गंदगी साफ करने तक, यह हर काम में आता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपके किचन का यह सबसे छोटा सदस्य सबसे ज्यादा कीटाणुओं का घर भी हो सकता है? लगातार नमी, साबुन और खाने के बारीक कणों के संपर्क में रहने के कारण स्पंज बैक्टीरिया का केंद्र बन जाता है। इसे लंबे समय तक इस्तेमाल करना न केवल बर्तनों की सफाई को प्रभावित करता है, बल्कि पूरे परिवार की सेहत के लिए भी जोखिम भरा हो सकता है।
कितने दिनों बाद बदल देना चाहिए स्पंज?
ज्यादातर लोग महीनों तक एक ही स्पंज घिसते रहते हैं, जो सेहत के लिहाज से गलत है। एक्सपर्ट्स और हाइजीन मानकों के अनुसार, किचन स्पंज को हर 1 से 2 हफ्तों के भीतर बदल देना चाहिए। यदि आपके घर में बर्तनों की संख्या ज्यादा है या स्पंज दिनभर गीला रहता है, तो इसे और भी जल्दी बदलना बेहतर है। याद रखें, साबुन से धोने मात्र से स्पंज के अंदरूनी बैक्टीरिया खत्म नहीं होते।
स्पंज बदलने के 3 बड़े संकेत: कभी न करें नजरअंदाज
अगर आपको स्पंज में नीचे दिए गए बदलाव दिखें, तो उसे तुरंत कूड़ेदान में डाल दें:
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अजीब बदबू आना: अगर स्पंज से खट्टी या सड़ी हुई महक आने लगे, तो समझ लें कि इसमें बैक्टीरिया का साम्राज्य बन चुका है। नमी और भोजन के कणों के सड़ने से यह बदबू पैदा होती है।
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आकार का बिगड़ना: जब स्पंज फटने लगे, पतला हो जाए या उसका रेशा टूटने लगे, तो वह बर्तनों से चिकनाई हटाने में नाकाम रहता है।
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जिद्दी गंदगी: यदि धोने के बाद भी स्पंज का रंग साफ न दिखे और उसमें गंदगी फंसी रहे, तो यह संक्रमण फैलाने के लिए तैयार है।
सावधानी: क्या माइक्रोवेव में साफ करना काफी है?
कई लोग स्पंज को गर्म पानी में उबालने या माइक्रोवेव में रखकर स्टरलाइज (Sterilize) करने की कोशिश करते हैं। हालांकि यह कुछ बैक्टीरिया को मार सकता है, लेकिन यह कोई स्थाई समाधान नहीं है। स्पंज की बनावट ऐसी होती है कि उसके छिद्रों में कीटाणु गहराई तक समा जाते हैं, जिन्हें पूरी तरह खत्म करना नामुमकिन होता है। इसलिए, नया स्पंज लेना ही सबसे सुरक्षित विकल्प है।
किचन को सुरक्षित रखने के स्मार्ट टिप्स
अपनी रसोई को ‘बैक्टीरिया फ्री’ बनाने के लिए इन छोटी मगर मोटी बातों का ध्यान रखें:
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काम के आधार पर अलग स्पंज: बर्तन धोने के लिए अलग और किचन के स्लैब या सिंक की सफाई के लिए अलग स्पंज रखें। इससे क्रॉस-कन्टेमिनेशन (गंदगी का एक जगह से दूसरी जगह फैलना) कम होता है।
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सूखा रखना है जरूरी: इस्तेमाल के बाद स्पंज को अच्छी तरह निचोड़कर ऐसी जगह रखें जहां हवा लगती हो। गीला स्पंज कीटाणुओं के लिए ‘ब्रीडिंग ग्राउंड’ होता है।
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धोकर रखें: काम खत्म होने के बाद स्पंज को सादे पानी से अच्छी तरह साफ करें ताकि उसमें खाने के अंश न फंसे रहें।
छोटी आदत, बड़ी सुरक्षा
किचन स्पंज भले ही एक छोटी और सस्ती चीज लगे, लेकिन इसकी समय पर बदली आपके स्वास्थ्य से जुड़ी है। एक साफ और नया स्पंज न केवल बर्तनों को बेहतर तरीके से साफ करता है, बल्कि आपकी रसोई को स्वच्छ और सुरक्षित भी बनाता है।
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