नई दिल्ली | भारतीय किचन में ‘दाल-चावल’ या ‘दाल-रोटी’ को एक साधारण भोजन माना जाता है, लेकिन आधुनिक विज्ञान अब इसे किसी चमत्कारिक दवा से कम नहीं मान रहा है। यूके (UK) के प्रसिद्ध फिजिशियन डॉक्टर करण राजन ने इंस्टाग्राम पर साझा किया है कि कैसे भारतीय घरों में रोजाना खाई जाने वाली दाल न केवल दिल की बीमारियों और ब्लड शुगर को नियंत्रित करती है, बल्कि इसमें कोलन कैंसर (बड़ी आंत का कैंसर) को रोकने की भी अद्भुत क्षमता होती है।
डॉक्टर राजन ने साइंस-बेक्ड (Science-backed) तरीके से समझाया है कि दाल हमारे शरीर के उस हिस्से तक पहुंचती है, जहां अन्य फाइबर नहीं पहुंच पाते।
रोजाना दाल खाने के 3 बड़े फायदे
डॉक्टर राजन के अनुसार, यदि आप अपनी डाइट में दाल को नियमित शामिल करते हैं, तो शरीर में ये बदलाव नजर आते हैं:
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हार्ट अटैक का खतरा 11% कम: दालें कार्डियोवैस्कुलर हेल्थ को जबरदस्त सपोर्ट देती हैं।
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कोलेस्ट्रॉल में 8% की गिरावट: दालें नसों में जमे खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद करती हैं।
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ब्लड शुगर पर 24 घंटे नियंत्रण: दाल में मौजूद ‘रेजिस्टेंस स्टार्च’ और ‘सॉल्यूएबल फाइबर’ इंसुलिन सेंसिटिविटी को सुधारते हैं, जिससे लंच में दाल खाने का असर अगले मील तक बना रहता है।
कोलन कैंसर को कैसे रोकती है दाल? (दाल का ‘स्लो फर्मेंटेशन’ विज्ञान)
डॉक्टर ने समझाया कि दाल में एक खास तरह का फाइबर होता है जिसे गैलेक्टूलिगोसैकेराइड्स (Galactooligosaccharides) कहते हैं। इसके कैंसर-विरोधी होने के पीछे का विज्ञान इस प्रकार है:
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कोलन के आखिरी छोर तक पहुंच: ज्यादातर फाइबर सप्लीमेंट्स या अन्य खाद्य पदार्थ बड़ी आंत (Colon) के शुरुआती हिस्से में ही पच (Ferment) जाते हैं। लेकिन दाल का फाइबर बहुत धीरे-धीरे फर्मेंट होता है और कोलन की पूरी लंबाई को पार करते हुए उसके आखिरी छोर तक पहुंचता है।
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ब्यूटिरेट (Butyrate) का निर्माण: कोलन का आखिरी हिस्सा वही जगह है जहां अक्सर कोलन कैंसर की शुरुआत होती है। जब दाल का फाइबर यहां पहुंचता है, तो गट बैक्टीरिया इसे फर्मेंट करके ‘ब्यूटिरेट’ बनाते हैं।
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कैंसर विरोधी गुण: ब्यूटिरेट कोलन सेल्स को एनर्जी देता है और इसमें शक्तिशाली एंटी-कैंसर गुण होते हैं। यह ठीक उसी जगह सूजन (Inflammation) को कम करता है जहां इसकी सबसे ज्यादा जरूरत होती है।
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अच्छे बैक्टीरिया का पोषण: यह फाइबर ‘बिफिडोबैक्टीरियम’ जैसे फायदेमंद प्रीबायोटिक बैक्टीरिया को पोषण देता है, जिससे गट हेल्थ मजबूत होती है।
डॉक्टर की सलाह: दाल खाने का सही तरीका
डॉक्टर राजन के अनुसार, दाल को ब्रेकफास्ट या लंच में शामिल करना सबसे ज्यादा फायदेमंद है क्योंकि यह पूरे दिन के मेटाबॉलिज्म और शुगर लेवल को स्थिर रखता है। भारतीय दालों जैसे मसूर, तूअर (अरहर), चना और राजमा में ये गुण प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं।
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