मथुरा। वृंदावन के केसी घाट के पास हुए दर्दनाक नाव हादसे के बाद रेस्क्यू टीमों ने करीब 9 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद रात 12 बजे डूबी हुई मोटरबोट को यमुना नदी से बाहर निकाल लिया है। जिस स्थान पर यह हादसा हुआ, वहां पानी की गहराई लगभग 35 फीट बताई जा रही है। वहीं, पुलिस ने हादसे के बाद फरार हुए मुख्य आरोपी और नाव चालक पप्पू को हिरासत में ले लिया है।
9 घंटे का ऑपरेशन: 35 फीट गहरे पानी में फंसी थी बोट
शुक्रवार दोपहर 3 बजे हुए हादसे के बाद से ही गोताखोरों और प्रशासन की टीमें मोटरबोट को तलाशने में जुटी थीं।
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चुनौतियां: नदी के तेज बहाव और नीचे रेता (Sand) होने के कारण गोताखोरों के कांटे बार-बार फिसल रहे थे।
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सफलता: अंततः रात 12 बजे भारी मशीनों और गोताखोरों की मदद से बोट को किनारे लाया गया।
चश्मदीद की जुबानी: “हमने हाथ जोड़े, पर चालक ने बात नहीं मानी”
हादसे में जीवित बचे लुधियाना के श्रद्धालु रोहित ने उस खौफनाक मंजर की दास्तां बयां की है। रोहित के अनुसार, चालक की लापरवाही और जिद ने इस हंसते-खेलते सफर को मातम में बदल दिया:
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तेज हवा का अलर्ट: हादसे के वक्त यमुना में करीब 40 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से तेज हवाएं चल रही थीं, जिससे नाव लगातार डगमगा रही थी।
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अनदेखी: श्रद्धालुओं ने बार-बार चालक पप्पू से नाव रोकने या वापस ले चलने की मिन्नतें कीं, लेकिन उसने बात अनसुनी कर दी।
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दो बार बाल-बाल बची: नाव पलटने से पहले भी दो बार पैंटून पुल से टकराते-टकराते बची थी।
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आखिरी लम्हा: जब काफी दबाव के बाद चालक नाव वापस मोड़ने को राजी हुआ, तब तक हवा के झोंके से पैंटून पुल का एक हिस्सा लहराता हुआ आया और बोट को जोरदार टक्कर मार दी, जिससे बोट पलट गई।
पुलिस की कार्रवाई: चालक पप्पू हिरासत में
हादसे के तुरंत बाद चालक पप्पू तैरकर सुरक्षित बाहर निकल आया था और मौके से फरार हो गया था। पुलिस की एक विशेष टीम ने स्थानीय नाविकों से जानकारी जुटाकर देर रात उसे उसके घर के पास से हिरासत में ले लिया है। हालांकि, आधिकारिक तौर पर अभी इसकी औपचारिक पुष्टि का इंतजार है, लेकिन पुलिस उससे सघन पूछताछ कर रही है कि खराब मौसम के बावजूद उसने नाव क्यों चलाई और सुरक्षा मानकों (जैसे लाइफ जैकेट) की अनदेखी क्यों की गई।
लापरवाही की बड़ी कीमत
इस हादसे ने एक बार फिर धार्मिक स्थलों पर संचालित होने वाली नावों की सुरक्षा और उन पर निगरानी रखने वाले तंत्र पर सवाल खड़े कर दिए हैं। 40 किमी की रफ्तार वाली हवा में मोटरबोट ले जाना न केवल तकनीकी रूप से गलत था, बल्कि मानवीय रूप से भी एक बड़ा अपराध साबित हुआ है, जिसकी कीमत कई परिवारों को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी।
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