ईरान-अमेरिका जंग खत्म होने की दहलीज पर? तेहरान ने रखी 24 अरब डॉलर की शर्त, ट्रंप का क्या होगा अगला कदम

मध्य-पूर्व में जारी तनाव के बीच ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध विराम की कोशिशें तेज हो गई हैं। कतर में जारी हाई-प्रोफाइल बातचीत के दौरान तेहरान ने एक ऐसा ‘आखिरी पेच’ फंसा दिया है, जिसने पूरे वैश्विक कूटनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि युद्ध खत्म करने का रास्ता उसकी फ्रीज की गई अरबों डॉलर की संपत्तियों से होकर गुजरता है। यह घटनाक्रम ऐसे वक्त सामने आया है जब दुनिया की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या डोनाल्ड ट्रंप का प्रशासन तेहरान की इन शर्तों को स्वीकार करेगा या फिर संघर्ष एक नए मोड़ पर पहुंच जाएगा।

24 अरब डॉलर की मांग और 14 सूत्रीय मसौदा

ईरान की समाचार एजेंसी ‘तस्नीम’ की रिपोर्ट के अनुसार, तेहरान ने युद्ध समाप्ति के लिए 14 सूत्रीय समझौते का मसौदा तैयार किया है। इस समझौते की सबसे अहम कड़ी विदेशों में अटकी ईरान की करीब 24 अरब डॉलर की संपत्तियों को रिलीज करना है। ईरान का दावा है कि समझौते की घोषणा होते ही पहले चरण में कम से कम 12 अरब डॉलर की राशि उसे तुरंत उपलब्ध कराई जानी चाहिए। यह मांग उस युद्ध को रोकने की कोशिश है जो 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के हवाई हमलों के बाद शुरू हुआ था। कतर में मौजूद ईरान का उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल इसी शर्त को मनवाने के लिए वाशिंगटन के वार्ताकारों पर दबाव बना रहा है।

संपत्तियों की असली जंग: 24 अरब बनाम 123 अरब डॉलर

ईरान की ओर से आधिकारिक तौर पर फ्रीज संपत्तियों का सटीक आंकड़ा सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन ईरानी मीडिया का अनुमान है कि यह राशि 100 अरब डॉलर से लेकर 123 अरब डॉलर के बीच हो सकती है। कतर पहुंचे ईरान के शीर्ष वार्ताकार, जिनमें विदेश मंत्री अब्बास अराघची और केंद्रीय बैंक के गवर्नर अब्दोल्नासेर हेम्मती शामिल हैं, फिलहाल पहले चरण की 12 अरब डॉलर की राशि को हासिल करने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। गौरतलब है कि इससे पहले 2023 में दक्षिण कोरिया में अटके 6 अरब डॉलर का मामला भी काफी चर्चा में रहा था, जो अमेरिका-ईरान के बदलते रिश्तों की भेंट चढ़ गया था।

ट्रंप की नीतियों पर उठ रहे सवाल, खामेनेई का रुख सख्त

जहां एक तरफ कतर में शांति वार्ता जारी है, वहीं ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने सैन्य कमांडरों के सामने कड़े तेवर अपनाए हैं। उन्होंने खाड़ी देशों में अमेरिका की सैन्य मौजूदगी को ‘अस्थिरता का कारण’ बताते हुए कहा कि सुरक्षा के लिए अमेरिका पर निर्भर रहना अब बेमानी साबित हो चुका है। राष्ट्रपति का यह बयान स्पष्ट करता है कि ईरान अपनी रक्षा संरचना में बड़े बदलाव के मूड में है। अब बड़ा सवाल यह है कि क्या अमेरिका इस बातचीत के जरिए ईरान को शांत कर पाएगा, या फिर यह कूटनीतिक पेंच क्षेत्र में एक और बड़े संघर्ष को जन्म देगा।

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