अंतरराष्ट्रीय राजनीति और कूटनीति के गलियारों से इस वक्त एक बेहद बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। भारत में इजरायल के राजदूत रूवेन अजार (Reuven Azar) ने पाकिस्तान को लेकर एक बेहद तीखा और आक्रामक बयान दिया है। इजरायली राजदूत ने साफ शब्दों में कहा है कि पाकिस्तान एक पूरी तरह से अविश्वसनीय और केवल परेशानी पैदा करने वाला देश है, जो कभी भी भरोसे के काबिल नहीं हो सकता। ऐसे में अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव को कम करने के लिए पाकिस्तान द्वारा मध्यस्थता (Mediation) करने की कोशिशों और दावों पर इजरायल ने गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं। इजरायल ने अमेरिका को भी आगाह किया है कि वह ऐसे कट्टरपंथी समर्थक देश के झांसे में न आए।
‘कट्टरपंथियों का समर्थक भला कैसे करा सकता है समझौता?’
इजरायली राजदूत रूवेन अजार ने मध्य पूर्व (Middle East) में जारी तनाव के बीच पाकिस्तान की भूमिका पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा, “अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मध्यस्थता करने के लिए सबसे पहले एक ऐसी पार्टी की जरूरत होती है, जिसकी छवि साफ हो और जिस पर दोनों पक्ष आंख बंद करके विश्वास कर सकें। लेकिन यह क्वालिटी पाकिस्तान में दूर-दूर तक नहीं है। पाकिस्तान का झुकाव हमेशा से आतंकवाद, कट्टरपंथ और रूढ़िवादी ताकतों की ओर रहा है। यदि मध्यस्थता करने वाला देश खुद आतंकवाद का समर्थक हो, तो उस बातचीत का क्या खाक परिणाम निकलने वाला है।”
अमेरिकी विदेश मंत्री के दावे से बढ़ा विवाद, भारत का रुख साफ
दरअसल, यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब पिछले सप्ताह अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने एक बयान में कहा था कि ईरान के साथ बातचीत के लिए पाकिस्तान की मध्यस्थता पर भारत ने किसी तरह की कोई आधिकारिक आपत्ति जाहिर नहीं की है। इस पर इजरायली राजदूत ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पाकिस्तान के पास ऐसी कोई कूटनीतिक क्षमता ही नहीं है।
गौरतलब है कि पिछले महीने जब अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो भारत यात्रा पर आए थे, तो दोनों देशों के बीच पाकिस्तान को लेकर चर्चा तो खूब हुई थी, लेकिन भारत का पूरा फोकस सिर्फ आतंकवाद के मुद्दे पर ही था। ईरान और अमेरिका के बीच पाकिस्तान की इस तथाकथित मध्यस्थता को लेकर भारत और अमेरिका के बीच कोई द्विपक्षीय चर्चा नहीं की गई थी।
क्या नेतन्याहू और डोनाल्ड ट्रंप के रिश्तों में आ गई है दरार?
इंटरव्यू के दौरान राजदूत रूवेन अजार ने इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच किसी भी तरह के मतभेदों या दरार की खबरों को पूरी तरह से खारिज कर दिया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “जो लोग पिछले 10 सालों से इन दोनों महान नेताओं के बीच फूट पड़ने की उम्मीद लगाए बैठे हैं, उन्हें अपने राजनीतिक एजेंडे को पूरा करने के लिए अभी थोड़ा और लंबा इंतजार करना होगा। दोनों के बीच कोई बुनियादी रणनीतिक मतभेद नहीं हैं।”
लेबनान सैन्य अभियान पर हुई बहस को बताया ‘फ्रेंडली डिस्कशन’
राजदूत ने लेबनान में जारी सैन्य अभियान को लेकर ट्रंप और नेतन्याहू के बीच हुई कथित तीखी बहस को ‘मैत्रीपूर्ण रणनीतिक मतभेद’ (Friendly Strategic Differences) करार दिया। उन्होंने कहा कि कुछ लोग अपने निजी और राजनीतिक स्वार्थ के लिए इन सामान्य मतभेदों को वास्तविकता से कहीं अधिक बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रहे हैं। दोनों नेताओं के बीच जो भी वैचारिक भिन्नता दिखती है, वह किसी दुश्मनी के कारण नहीं बल्कि उनकी अपनी अलग-अलग कार्यशैली और व्यक्तिगत नेतृत्व शैली (Leadership Style) के कारण है। दोनों ही नेता अपने-अपने देशों के हित के लिए पूरी तरह से एकजुट हैं।
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