आशा भोसले के इस सुपरहिट गाने का लोगों ने निकाला गलत मतलब, खुद रेडियो पर आकर सिंगर को देनी पड़ी थी सफाई

बॉलीवुड की सुरों की मल्लिका आशा भोसले ने अपने करियर में एक से बढ़कर एक सदाबहार गाने गाए हैं। किशोर कुमार से लेकर गुलजार साहब तक, इंडस्ट्री के दिग्गजों के साथ उनकी जुगलबंदी ने भारतीय सिनेमा को कई ऐतिहासिक गाने दिए हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आशा जी और गुलजार साहब की जोड़ी का एक गाना ऐसा भी था, जिसका मतलब देश की जनता ने सालों तक गलत समझा? यह गलतफहमी इतनी बढ़ गई थी कि खुद आशा भोसले और गुलजार साहब को ऑल इंडिया रेडियो पर आकर गाने के लिरिक्स का सही अर्थ समझाना पड़ा था। आइए जानते हैं आखिर क्या था यह पूरा माजरा।

सुपरहिट फिल्म ‘लेकिन’ और वो विवादित गाना

यह पूरा किस्सा साल 1991 में रिलीज हुई रहस्य और रोमांच से भरपूर फिल्म ‘लेकिन’ से जुड़ा है। इस बेहतरीन फिल्म का निर्माण खुद सुर कोकिला लता मंगेशकर ने किया था और इसका निर्देशन व कहानी लेखन गुलजार साहब ने किया था। फिल्म में विनोद खन्ना, डिंपल कपाड़िया, हेमा मालिनी, आलोक नाथ और अमजद खान जैसे दिग्गज कलाकारों ने मुख्य भूमिका निभाई थी। हालांकि यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर तो कमाल नहीं दिखा सकी, लेकिन इसके संगीत ने इतिहास रच दिया। आज भी इस फिल्म को आईएमडीबी (IMDb) पर 7.8 की शानदार रेटिंग मिली हुई है। फिल्म का एक गाना ‘यारा सीली सीली’ आज भी लोगों की जुबान पर रहता है। इसी फिल्म में आशा भोसले और गुलजार की आवाज में एक गाना था—‘झूठे नैना बोले सांची बत्तियां’।

‘झूठे’ या ‘जूठे’? इस एक शब्द पर उलझ गए थे लोग

यह खूबसूरत गाना बॉलीवुड की ड्रीम गर्ल हेमा मालिनी पर फिल्माया गया था। गाने के बोलों में एक महिला अपने साथी से किसी दूसरी औरत के साथ रात गुजारने को लेकर सवाल करती है। इस गाने की शुरुआत ‘झूठे नैना बोले सांची बत्तियां’ से होती है। बस इसी पहली लाइन को लेकर दर्शकों और श्रोताओं के बीच भारी कन्फ्यूजन पैदा हो गया। लोगों को लगा कि गाने में इस्तेमाल शब्द ‘झूठे’ का मतलब (Liar यानी असत्य बोलने वाला) है। लोग गाने के इस गहरे और संजीदा अर्थ को पकड़ नहीं पा रहे थे।

जब गुलजार और आशा भोसले को आना पड़ा रेडियो पर

जब यह गलतफहमी हर तरफ फैलने लगी, तब गाने के लेखक गुलजार और गायिका आशा भोसले ने खुद कमान संभाली। दोनों ने रेडियो स्टेशन जाकर लाइव शो में दर्शकों को समझाया कि वे गाने का गलत मतलब निकाल रहे हैं। गुलजार साहब ने स्पष्ट किया कि गाने में इस्तेमाल किया गया शब्द ‘झूठे’ (Liar) नहीं, बल्कि ‘जूठे’ (यानी किसी का खाया हुआ या इस्तेमाल किया हुआ भोजन/अधूरी पवित्रता) है। इस एक बारीक अंतर को समझने के बाद लोगों को गाने की असली गहराई और दर्द का अहसास हुआ। दिलचस्प बात यह है कि आज भी कई लोग इस गाने का सही मतलब नहीं जानते हैं।

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