अयोध्या के भव्य और दिव्य श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के चढ़ावे में कथित हेराफेरी और वित्तीय अनियमितता का मामला थमने का नाम नहीं ले रहा है। समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव और भाजपा के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह के बयानों के बाद, अब इस महाविवाद में अयोध्या के संतों की भी सीधी एंट्री हो गई है।
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास के परम शिष्य और मणिराम दास छावनी के उत्तराधिकारी महंत कमलनयन दास ने इस पूरे मामले पर एक बेहद सनसनीखेज और तीखा बयान दिया है। उन्होंने सीधे तौर पर जांच एजेंसियों और शोर मचाने वाले नेताओं की साख पर सवाल उठाते हुए कहा है कि इस संसार में कोई भी ‘दूध का धुला’ नहीं है, इसलिए अब इस पूरे पाप का न्याय और जांच स्वयं भगवान राम ही करेंगे।
‘कौन दूध का धुला है? सब अच्छे बेईमान हैं…’
मीडिया से बातचीत के दौरान जब महंत कमलनयन दास से राम मंदिर के चढ़ावे में हो रही कथित चोरी और जारी जांच को लेकर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने बेहद बेबाकी से कहा:
महंत कमलनयन दास का बयान: “जो आरोप लग रहे हैं, निश्चित रूप से उस मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। लेकिन सच तो यह है कि जांच करने वाले ही जब सब बेईमान हैं, तो वे क्या खाक जांच करेंगे? यहाँ सब के सब बेईमान हैं, भला कौन दूध का धुला हुआ है? क्या जो लोग आज इस मुद्दे पर इतना हल्ला मचा रहे हैं (विपक्षी नेता), वे दूध के धुले हैं? अब इस मामले की असली जांच और न्याय सिर्फ भगवान ही करेंगे।”
महंत ने आगे तंज कसते हुए कहा कि आज के समय में जो लोग पहले साइकिल पर चला करते थे, वे आज बड़ी-बड़ी लग्जरी गाड़ियों में घूम रहे हैं और उनके पास बड़े-बड़े आलीशान मकान हो गए हैं। आखिर किस-किस का नाम गिनाया जाए? उन्होंने कहा कि जो जैसा कर्म करेगा, उसका फल उसे निश्चित रूप से भुगतना पड़ेगा, भगवान सबको उनके पापों का दंड जरूर देंगे।
पूर्व लेखा प्रभारी महिपाल सिंह के दावों पर गहराया रहस्य
तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट द्वारा समाजवादी पार्टी के आरोपों को खारिज किए जाने के बावजूद, खुद को मंदिर का पूर्व लेखा अधिकारी (Account Officer) बताने वाले महिपाल सिंह के बयानों से संघ परिवार और विश्व हिंदू परिषद (VHP) के भीतर भी तनाव चरम पर है।
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कौन हैं महिपाल सिंह: ट्रस्ट के सूत्रों के अनुसार, महिपाल सिंह राजस्थान के कोटा के निवासी हैं और एक राष्ट्रीयकृत बैंक से सेवानिवृत्त (Retired) अधिकारी हैं। विहिप से उनका पुराना नाता रहा है। उनकी योग्यता को देखते हुए साल 2020-21 में मंदिर निर्माण के दौरान उन्हें अयोध्या बुलाया गया था और चढ़ावे की गिनती की देखरेख का जिम्मा सौंपा गया था।
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टाइमिंग पर उठे सवाल: बताया जा रहा है कि दो-तीन दिन पहले वे अयोध्या रामलला के दर्शन करने आए थे, जहां उनकी मुलाकात एक खास पदाधिकारी से हुई। इसके बाद ही उन्होंने सोशल मीडिया पर आकर यह दावा किया कि मंदिर के चढ़ावे में बड़े स्तर पर चोरी हो रही है जिसकी शिकायत उन्होंने चंपत राय से भी की थी। हालांकि, अब कुछ लोग उनके इस बयान की टाइमिंग और मंशा पर भी सवाल उठा रहे हैं।
नृपेंद्र मिश्र की गोपनीय बैठक और जांच में बड़ी सफलता
इस विवाद के सामने आते ही प्रधानमंत्री संग्रहालय के चेयरमैन और राम मंदिर ट्रस्ट के पदेन न्यासी नृपेंद्र मिश्र सोमवार को आपातकालीन दौरे पर दिल्ली से अयोध्या पहुंचे।
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गोपनीय बैठक: नृपेंद्र मिश्र ने राम मंदिर परिसर में ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के डीजीएम (DGM) और शाखा प्रबंधक के साथ कई घंटों तक बेहद गोपनीय और हाई-लेवल बैठक की। इसके बाद उन्होंने जिला प्रशासन के आला अधिकारियों से भी फीडबैक लिया।
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डेढ़ करोड़ की रिकवरी: सूत्रों के अनुसार, खुफिया टीमों द्वारा की जा रही गोपनीय जांच में अब तक संदिग्ध कर्मचारियों के पास से करीब 1.5 करोड़ रुपये की नगद रिकवरी हो चुकी है। जांच टीम अब उन महंगी जमीनों, मकानों और लग्जरी गाड़ियों का पता लगा रही है, जहां इस चोरी के पैसे को इन्वेस्ट (निवेश) किया गया था। जांच के दायरे में मुख्य रूप से 9 संदिग्ध कर्मचारी हैं।
व्हीलचेयर चालक और सीसीटीवी (CCTV) की भूमिका पर सवाल
इस पूरे घोटाले में एक और चौंकाने वाला पहलू सामने आया है। चर्चा है कि जांच टीम के रडार पर मंदिर परिसर में वृद्ध और दिव्यांग श्रद्धालुओं को व्हीलचेयर से दर्शन कराने वाले कुछ चालक भी शामिल हैं, जो चोरी की रकम को बाहर ले जाने में ‘कैरियर’ (ढोने वाले) की भूमिका निभाते थे।
इसके साथ ही, मंदिर की सुरक्षा और सीसीटीवी की निगरानी पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। राम मंदिर परिसर पूरी तरह से एआई (AI) और अत्याधुनिक कैमरों से लैस है, जिसका एक अलग कंट्रोल रूम है। संतों और आम जनता में यह सवाल तैर रहा है कि यदि इतनी बड़ी धनराशि की हेराफेरी लंबे समय से हो रही थी, तो कंट्रोल रूम में बैठे सुरक्षाकर्मियों और जिम्मेदार अधिकारियों को भनक क्यों नहीं लगी? और यदि कैमरे बंद थे, तो इसकी सूचना उच्च अधिकारियों को क्यों नहीं दी गई थी?
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