लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली: उत्तर भारत समेत पूरे देश में पारा रिकॉर्ड तोड़ रहा है। भीषण गर्मी और लू के थपेड़े न केवल आम लोगों को परेशान कर रहे हैं, बल्कि यह मौसम डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर के मरीजों के लिए किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है। विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ता तापमान शरीर के मेटाबॉलिज्म को सीधे तौर पर प्रभावित करता है, जिससे ब्लड शुगर और बीपी में खतरनाक उतार-चढ़ाव आ सकता है।
अमृता हॉस्पिटल, फरीदाबाद के सीनियर कंसल्टेंट (इंटरनल मेडिसिन) डॉ. मोहित शर्मा के अनुसार, गर्मी के मौसम में सावधानी न बरती जाए तो पुरानी बीमारियां गंभीर रूप ले सकती हैं। आइए जानते हैं कि आखिर सूरज की तपिश आपके शरीर के भीतर क्या बदलाव लाती है।
गर्मी में क्यों अचानक गिर जाता है ब्लड प्रेशर?
डॉक्टर बताते हैं कि जब बाहर का तापमान बहुत ज्यादा होता है, तो शरीर खुद को ठंडा रखने के लिए ‘सेल्फ-कूलिंग मकेनिज्म’ सक्रिय करता है। इस प्रक्रिया में हमारी रक्त वाहिकाएं (Blood Vessels) फैल जाती हैं ताकि त्वचा के रास्ते गर्मी बाहर निकल सके। इस फैलाव की वजह से ब्लड प्रेशर अचानक कम हो सकता है। इसके अलावा, पसीने के जरिए शरीर से इलेक्ट्रोलाइट्स और तरल पदार्थ बाहर निकल जाते हैं, जिससे ब्लड वॉल्यूम कम होता है और चक्कर आने या बेहोशी जैसी स्थिति बन सकती है।
शुगर के मरीजों पर गर्मी का ‘डबल अटैक’
डायबिटीज के मरीजों के लिए गर्मी दोहरी चुनौती लेकर आती है। पहली बात यह कि शरीर में पानी की कमी (Dehydration) होने पर खून गाढ़ा हो जाता है, जिससे रक्त में ग्लूकोज की सांद्रता बढ़ जाती है और शुगर लेवल हाई दिखने लगता है। दूसरी तरफ, अत्यधिक गर्मी के कारण त्वचा से इंसुलिन का अवशोषण (Absorption) बहुत तेजी से होने लगता है, जिससे ब्लड शुगर अचानक सामान्य से काफी नीचे गिर सकता है, जिसे ‘हाइपोग्लाइसीमिया’ कहते हैं।
मेटाबॉलिक बीमारियों का गढ़ बनता भारत
भारत में यह समस्या इसलिए भी विकराल है क्योंकि यहाँ मेटाबॉलिक रोगों का बोझ दुनिया में सबसे ज्यादा है। हालिया ICMR-INDIAB के आंकड़ों की मानें तो भारत में करीब 10.1 करोड़ लोग डायबिटीज की चपेट में हैं। वहीं शहरों में हर तीसरे व्यक्ति को हाइपरटेंशन (High BP) की शिकायत है। ऐसे में गर्मी का मौसम इन करोड़ों लोगों के लिए स्वास्थ्य जोखिम को कई गुना बढ़ा देता है।
इन 4 बातों का रखें खास ख्याल, सुरक्षित रहेगा दिल और सेहत
डॉक्टरों ने गर्मी के प्रकोप से बचने के लिए मरीजों को विशेष हिदायत दी है:
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इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन: सिर्फ पानी पीना काफी नहीं है। शरीर में नमक और खनिजों की पूर्ति के लिए ओआरएस (ORS), नींबू पानी या नारियल पानी का सेवन करें ताकि इलेक्ट्रोलाइट्स का बैलेंस बना रहे।
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पीक ऑवर्स में परहेज: दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे के बीच, जब सूरज की किरणें सबसे तीखी होती हैं, बाहर निकलने से बचें। यदि निकलना जरूरी हो तो छाते और सूती कपड़ों का प्रयोग करें।
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रेगुलर मॉनिटरिंग: गर्मी के दिनों में सप्ताह में कम से कम दो बार अपना ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर खुद चेक करें। रीडिंग में जरा भी बदलाव दिखे तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
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दवाओं का समय: अपनी दवाओं को कभी न छोड़ें। गर्मी में शरीर का रिस्पांस बदल जाता है, इसलिए डॉक्टर की सलाह पर दवाओं की डोज को एडजस्ट करना पड़ सकता है।
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