नई दिल्ली : चिलचिलाती धूप और पसीने से तरबतर गर्मियों के मौसम में सड़क किनारे मिलने वाला ठंडी-मीठी मिठास से भरा गन्ने का रस भला किसे नहीं लुभाता? थकान मिटाने और शरीर को तुरंत एनर्जी देने के लिए इसे सबसे बेहतरीन प्राकृतिक पेय माना जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि स्वाद और ताजगी का यह ‘खजाना’ हर किसी के लिए सेहतमंद नहीं है? हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो गन्ने के जूस में नेचुरल शुगर की मात्रा अत्यधिक होती है, जो कुछ विशेष स्वास्थ्य स्थितियों में फायदे की जगह गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है। अगर आप भी गन्ने के रस के शौकीन हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है।
डायबिटीज के मरीजों के लिए बढ़ सकता है खतरा
मधुमेह यानी डायबिटीज से जूझ रहे मरीजों के लिए गन्ने का रस किसी खतरे की घंटी से कम नहीं है। रिपोर्ट के अनुसार, एक गिलास गन्ने के जूस में लगभग 40 से 50 ग्राम तक शुगर हो सकती है। इसका ग्लाइसेमिक लोड (20 से 25) काफी ज्यादा होता है, जिसके कारण इसे पीते ही ब्लड शुगर लेवल अचानक से स्पाइक कर सकता है। अगर आप शुगर के मरीज हैं, तो बिना डॉक्टर की सलाह के इसका सेवन आपके स्वास्थ्य को गंभीर रूप से बिगाड़ सकता है।
फैटी लिवर की समस्या में बढ़ा सकता है मुश्किलें
आजकल की बिगड़ती जीवनशैली में फैटी लिवर एक आम समस्या बन गई है। ऐसे मरीजों को गन्ने के जूस से दूरी बनाकर रखनी चाहिए। दरअसल, गन्ने के रस में फ्रक्टोज की मात्रा काफी अधिक होती है। जब शरीर में फ्रक्टोज ज्यादा पहुंचता है, तो लिवर इसे फैट में बदलने लगता है, जिससे लिवर की सूजन और फैट जमा होने की प्रक्रिया तेज हो जाती है। कमजोर लिवर वाले लोगों के लिए इसका रोजाना सेवन हानिकारक हो सकता है।
पेट की संवेदनशीलता और पाचन संबंधी विकार
जिन लोगों का पाचन तंत्र संवेदनशील है या जिन्हें अक्सर गैस, ब्लोटिंग (पेट फूलना) और दस्त की शिकायत रहती है, उन्हें गन्ने का रस सोच-समझकर पीना चाहिए। गन्ने की अत्यधिक मिठास कभी-कभी पेट में फर्मेंटेशन पैदा करती है, जिससे लूज मोशन या पेट दर्द की समस्या बढ़ सकती है। आयुर्वेद और विज्ञान दोनों ही पाचन संबंधी गड़बड़ी में भारी मीठे तरल पदार्थों से बचने की सलाह देते हैं।
मोटापा कम करने की राह में बड़ा रोड़ा
अगर आप वजन घटाने की कोशिश कर रहे हैं और जिम में घंटों पसीना बहा रहे हैं, तो गन्ने का रस आपकी पूरी मेहनत पर पानी फेर सकता है। एक गिलास गन्ने के जूस में करीब 150 से 180 कैलोरी होती है और इसमें फाइबर की मात्रा शून्य के बराबर होती है। फाइबर न होने के कारण यह आपका पेट नहीं भरता, लेकिन शरीर में कैलोरी का अंबार लगा देता है। वेट लॉस डाइट पर रहने वालों को इसे अपनी लिस्ट से बाहर ही रखना चाहिए।
कमजोर इम्युनिटी और हाइजीन का रिस्क
सड़क किनारे बिकने वाले गन्ने के रस के साथ सबसे बड़ी चुनौती स्वच्छता (Hygiene) की होती है। गन्ने की पिसाई करने वाली मशीनें और इस्तेमाल किए जाने वाले बर्तनों में अगर सफाई न हो, तो E. Coli जैसे खतरनाक बैक्टीरिया पनपने लगते हैं। जिन लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) कम है, उन्हें इंफेक्शन होने का खतरा सबसे ज्यादा रहता है। ऐसे में हमेशा हाइजीन का ख्याल रखने वाली जगहों से ही जूस पिएं।
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