नई दिल्ली। अगर आप संगीत प्रेमी हैं, तो आपने ‘ढोल जगीरो दा’ (Dhol Jageero Da) गाना जरूर सुना होगा। शादियों और पार्टियों की जान माना जाने वाला यह पंजाबी गाना आज भी उतना ही फ्रेश लगता है जितना दो दशक पहले था। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस आइकॉनिक गाने के बनने की कहानी बहुत ही उतार-चढ़ाव भरी रही है? यह गाना रिकॉर्ड होने के बाद 3 साल तक अलमारी में बंद पड़ा रहा था।
किसने दी है इस गाने को आवाज?
इस सुपरहिट गाने को मास्टर सलीम ने अपनी बुलंद आवाज में गाया है और इसे मशहूर ब्रिटिश-भारतीय डीजे और संगीत निर्माता पंजाबी एमसी (Panjabi MC) ने प्रोड्यूस किया है। पंजाबी एमसी का असली नाम राजिंदर सिंह राय है, जिन्होंने भांगड़ा संगीत को वैश्विक पहचान दिलाने में बड़ी भूमिका निभाई है।
गाने के बनने की रोचक कहानी
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1998 में हुई थी रिकॉर्डिंग: इस गाने की शुरुआत साल 1998 में हुई थी। पंजाबी एमसी के मैनेजर इकबाल सिंह यूके से पंजाब के फगवाड़ा आए थे। वहां उन्होंने मशहूर शास्त्रीय गायक उस्ताद पूरन शाह कोटी से मुलाकात की और उनके बेटे मास्टर सलीम से दो गाने रिकॉर्ड करने का अनुरोध किया।
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म्यूजिक के बिना रिकॉर्ड हुआ गाना: मास्टर सलीम जब स्टूडियो पहुंचे, तो गाने का म्यूजिक पूरी तरह तैयार नहीं था। उन्होंने केवल बेसिक कॉर्ड्स पर अपनी आवाज रिकॉर्ड की। इस काम के लिए उन्हें उस समय 50 हजार रुपये मिले थे।
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पिता को पसंद नहीं आए थे बोल: मास्टर सलीम के पिता उस्ताद पूरन शाह कोटी को इस गाने के बोल कुछ खास पसंद नहीं आए थे। गाना रिकॉर्ड करने के बाद मास्टर सलीम इसके रिलीज होने का इंतजार करते रहे।
3 साल का लंबा इंतजार और क्रेडिट का विवाद
जब गाना साल 1998 से 2000 तक रिलीज नहीं हुआ, तो मास्टर सलीम और उनके परिवार को लगा कि शायद यह प्रोजेक्ट ठंडे बस्ते में चला गया है। लेकिन साल 2001 में जब यह गाना रिलीज हुआ, तो इसने रातों-रात लोकप्रियता के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए।
कैसे मिला मास्टर सलीम को क्रेडिट?
गाना हिट होने के बाद मास्टर सलीम ने नोटिस किया कि वीडियो और कैसेट पर उन्हें कहीं भी गायक के तौर पर क्रेडिट नहीं दिया गया था।
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उन्होंने अपनी मां से 100 रुपये लेकर वीनस कंपनी (जिन्होंने भारत में गाना रिलीज किया था) को फोन किया।
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वहां से उन्हें पता चला कि गाने के ओरिजिनल राइट्स मूवीबॉक्स यूके के पास हैं।
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मास्टर सलीम ने इंग्लैंड फोन लगाकर मूवीबॉक्स के मालिक शब्बीर अहमद से बात की और अपना पक्ष रखा।
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शब्बीर अहमद ने अपनी गलती स्वीकार की और इसके बाद मास्टर सलीम को आधिकारिक तौर पर इस गाने के सिंगर का क्रेडिट मिला।
आज ‘ढोल जगीरो दा’ केवल एक गाना नहीं, बल्कि पंजाबी म्यूजिक इंडस्ट्री का एक ऐसा ‘कल्ट क्लासिक’ बन चुका है जिसके बिना कोई भी जश्न अधूरा है।
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