UP Free Gas Cylinder: उज्ज्वला लाभार्थियों को दिवाली पर मुफ्त गैस सिलेंडर, जानिए खाते में सब्सिडी रिफंड का पूरा प्रोसेस

उत्तर प्रदेश में प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) के तहत पंजीकृत गरीब एवं ग्रामीण परिवारों को स्वच्छ ईंधन उपलब्ध कराने और महिलाओं को धुएं से राहत देने के उद्देश्य से प्रदेश सरकार द्वारा साल में दो मुफ्त एलपीजी गैस सिलेंडर (Free LPG Refill) देने की कल्याणकारी व्यवस्था संचालित की जा रही है। इस योजना के तहत पहला मुफ्त सिलेंडर दीपावली के अवसर पर (अक्टूबर से दिसंबर की तिमाही में) और दूसरा मुफ्त सिलेंडर होली के अवसर पर (जनवरी से मार्च की तिमाही में) प्रदान किया जाता है। राज्य सरकार द्वारा इस पहल के लिए हर वर्ष विशेष बजटीय प्रावधान स्वीकृत किया जाता है, जिससे प्रदेश के लगभग 1.86 करोड़ से अधिक पात्र परिवारों को सीधा आर्थिक लाभ मिलता है।

कई लाभार्थियों के मन में यह सवाल रहता है कि क्या सिलेंडर की डिलीवरी के समय हॉकर को बिना कोई पैसा दिए मुफ्त सिलेंडर मिल जाएगा। योजना के स्पष्ट दिशा-निर्देशों के अनुसार, यह लाभ डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) मॉडल पर आधारित है।सिलेंडर प्राप्त करते समय उपभोक्ता को गैस वितरक एजेंसी या डिलीवरी एजेंट को उस समय लागू 14.2 किलोग्राम घरेलू सिलेंडर की निर्धारित खुदरा कीमत (जैसे लगभग ₹979 से ₹983) का पूरा नकद या ऑनलाइन भुगतान करना होता है। सिलेंडर की सफल डिलीवरी और सिस्टम में कंफर्मेशन दर्ज होने के बाद केंद्र सरकार द्वारा दी जाने वाली निर्धारित सब्सिडी राशि (लगभग ₹300) और राज्य सरकार का अंशदान (लगभग ₹680) मिलाकर पूरी खुदरा राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में वापस (रिफंड) भेज दी जाती है। इस तरह उपभोक्ता की जेब पर कोई भार नहीं पड़ता और सिलेंडर व्यावहारिक रूप से पूर्णतः मुफ्त हो जाता है।

सिलेंडर की सफल डिलीवरी दर्ज होने के बाद तेल विपणन कंपनियों (IOCL, BPCL, HPCL) और राज्य सरकार के एकीकृत सिस्टम द्वारा सब्सिडी प्रक्रिया शुरू की जाती है। आमतौर पर डिलीवरी पूरी होने के 2 से 5 कार्य दिवसों (Working Days) के भीतर डीबीटी के माध्यम से रिफंड राशि लाभार्थी के खाते में क्रेडिट कर दी जाती है। इस प्रक्रिया की समय-सीमा इस बात पर निर्भर करती है कि उपभोक्ता का बैंक खाता आधार से सही तरीके से सीडेड (Seeded) है और नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) मैपर पर सक्रिय रूप से दर्ज है या नहीं। राशि जमा होते ही उपभोक्ता को बैंक और तेल कंपनी की ओर से एसएमएस अलर्ट प्राप्त होता है।

योजना का शत-प्रतिशत वित्तीय लाभ प्राप्त करने के लिए प्रत्येक लाभार्थी को निम्नलिखित तकनीकी और प्रशासनिक आवश्यकताओं को पूरा करना अनिवार्य है:

  • सक्रिय उज्ज्वला कनेक्शन: उपभोक्ता का एलपीजी कनेक्शन अनिवार्य रूप से ‘प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना’ (PMUY) के तहत पंजीकृत होना चाहिए। सामान्य घरेलू गैस कनेक्शन धारकों को इस योजना का लाभ नहीं मिलता।

  • बायोमेट्रिक e-KYC का सत्यापन: संबंधित गैस एजेंसी (इंडेन, भारत गैस, या एचपी गैस) के रिकॉर्ड में लाभार्थी का आधार आधारित बायोमेट्रिक अथवा फेस-ऑथेंटिकेशन e-KYC पूर्ण होना चाहिए। अधूरी ई-केवाईसी वाले उपभोक्ताओं की सब्सिडी सिस्टम द्वारा स्वतः रोक दी जाती है।

  • आधार-सीडेड बैंक खाता: बैंक खाता सक्रिय होना चाहिए और उसमें डीबीटी (Direct Benefit Transfer) की सुविधा सक्षम होनी चाहिए।

यदि आपने निर्धारित समयावधि में सिलेंडर की डिलीवरी ले ली है और उसके बाद भी बैंक खाते में सब्सिडी की राशि नहीं आई है, तो सबसे पहले अपनी गैस वितरक एजेंसी के कार्यालय जाकर जांच कराएं कि सिस्टम में आपकी डिलीवरी ‘Delivered’ दर्ज हुई है या नहीं और ई-केवाईसी सक्रिय है या नहीं। इसके बाद अपनी बैंक शाखा जाकर यह सुनिश्चित करें कि आपका खाता एनपीसीआई (NPCI) मैपर पर आधार से सही तरीके से मैप है और कोई खाता सीमा (Freezing/Inoperative) तो लागू नहीं है। उपभोक्ता आधिकारिक पोर्टल (mylpg.in) पर लॉगिन करके भी अपने सिलेंडर बुकिंग इतिहास और सब्सिडी ट्रांसफर स्टेटस की लाइव जांच कर सकते हैं।

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