UP Panchayat Chunav: ‘विधानसभा से पहले नहीं होने दूंगा पंचायत चुनाव…’ कोर्ट के आदेश के बीच ओपी राजभर का बड़ा बयान

उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों को लेकर एक बार फिर बड़ा सियासी घमासान छिड़ गया है। इलाहाबाद हाई कोर्ट द्वारा तीन महीने के भीतर पंचायत चुनाव कराने के कड़े निर्देश के बाद जहां प्रशासनिक स्तर पर हलचल तेज थी, वहीं योगी सरकार में पंचायती राज मंत्री और सुभासपा (SBSP) प्रमुख ओम प्रकाश राजभर ने एक सार्वजनिक मंच से दो टूक ऐलान कर दिया है कि वे विधानसभा चुनाव से पहले पंचायत चुनाव नहीं होने देंगे। एक जनसभा को संबोधित करते हुए राजभर का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वे यह कहते सुनाई दे रहे हैं कि उनके पास बतौर मंत्री संवैधानिक अधिकार (पावर) है और वे पिछड़ों के हक के लिए इस ताकत का पूरा इस्तेमाल कर रहे हैं। उनके इस बयान ने प्रदेश के प्रशासनिक गलियारों से लेकर विपक्षी खेमे तक खलबली मचा दी है।

कोर्ट के 3 महीने के आदेश की क्या निकाली ‘काट’?

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 14 अक्टूबर को एक अहम आदेश पारित करते हुए राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग को तीन महीने के भीतर पंचायत चुनाव संपन्न कराने का निर्देश दिया था। इसके साथ ही अदालत ने पिछड़ा वर्ग आयोग (Backward Class Commission) को भी एक माह के भीतर अपनी सर्वे रिपोर्ट सौंपने को कहा था।

कोर्ट के इस सख्त रुख के बीच ओम प्रकाश राजभर ने चुनावी प्रक्रिया को आगे खिसकाने की रणनीति का खुलासा किया। राजभर के अनुसार, पिछड़ा वर्ग आयोग एक बार फिर हाई कोर्ट का रुख करने जा रहा है। आयोग अदालत को अवगत कराएगा कि प्रदेश के 75 जिलों में से अभी लगभग 50 जिलों का रैपिड सर्वे और डेटा संकलन पूरा हो सका है, जबकि 25 जिलों का काम अभी बाकी है। इस कार्य को त्रुटिहीन तरीके से पूरा करने के लिए आयोग अदालत से कम से कम 3 महीने का अतिरिक्त समय मांगेगा। राजभर ने तर्क दिया कि जब संवैधानिक रूप से गठित आयोग ही समय की मांग करेगा और बिना सर्वे पिछड़ों का आरक्षण तय नहीं हो सकता, तो सरकार चाहते हुए भी चुनाव नहीं करा पाएगी।

‘बिना ओबीसी आरक्षण नहीं होंगे चुनाव’: पिछड़ों के मुद्दे पर आक्रामक रुख

राजभर ने साफ लफ्जों में कहा कि सुप्रीम कोर्ट की ‘ट्रिपल टेस्ट’ गाइडलाइंस और सामाजिक न्याय के सिद्धांतों के तहत जब तक अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) का आरक्षण पूरी पारदर्शिता के साथ सुनिश्चित नहीं हो जाता, तब तक वे किसी भी कीमत पर पंचायत चुनाव की अनुमति नहीं देंगे। उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती सरकारों के समय कई विसंगतियां रह गई थीं, जिन्हें दुरुस्त किए बिना चुनाव कराना पिछड़ों के अधिकारों पर डाका डालने जैसा होगा। उनका सीधा संकेत है कि जब आयोग की रिपोर्ट आएगी और उस पर आपत्तियां व परिसीमन तय होगा, तब तक प्रदेश 2027 के विधानसभा चुनाव के मुहाने पर पहुंच चुका होगा, जिसके चलते पंचायत चुनाव विधानसभा चुनाव संपन्न होने के बाद ही कराए जा सकेंगे।

प्रशासकों का कार्यकाल 6 महीने बढ़ाने का भेजा प्रस्ताव: प्रधानों को राहत

प्रदेश में पंचायतों का पांच साल का कार्यकाल समाप्त होने के बाद ग्राम प्रधानों को ही प्रशासक (Administrator) नियुक्त किया गया था। प्रशासकों के तौर पर उनका वर्तमान 6 महीने का कार्यकाल 24 नवंबर को समाप्त हो रहा है। इस समय-सीमा के समाप्त होने से पहले ही पंचायती राज विभाग ने एक नया पैंतरा चल दिया है।

मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने पुष्टि की है कि उन्होंने प्रधानों के बतौर प्रशासक कार्यकाल को अगले 6 महीनों के लिए बढ़ाने संबंधी पत्रावली पर हस्ताक्षर कर दिए हैं और प्रस्ताव अंतिम मंजूरी के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पास भेज दिया गया है। उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि “ग्राम प्रधान लोग आराम से छह महीने और अपने पद व विकास कार्यों का आनंद लें, चुनाव की जल्दी में न रहें।”

विरोधियों पर बरसे: ‘सोशल मीडिया पर बोलने वाले अपनी औकात में रहें’

जनसभा में राजभर ने सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ अभियान चलाने वाले विपक्षी नेताओं और आलोचकों पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि कुछ लोग सोशल मीडिया पर भ्रम फैला रहे हैं और कह रहे हैं कि राजभर को चुनाव नहीं कराने दिया जाएगा। राजभर ने तल्ख तेवर में कहा कि बोलने वालों को अपनी औकात के हिसाब से बात करनी चाहिए। उनके नेता खुद दिशाहीन हो चुके हैं और जनता के बीच अपनी जमीन खो चुके हैं।

राजभर के इस कड़े रुख के बाद अब उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनावों को लेकर कानूनी और सियासी रस्साकशी का एक नया दौर शुरू होना तय माना जा रहा है, जहां एक तरफ हाई कोर्ट की तय डेडलाइन है और दूसरी तरफ सरकार का ओबीसी आरक्षण सर्वे व प्रशासकों के सेवा विस्तार का दांव।

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